इंजीनियर की मां रोईं, बोलीं-काश, मुझे भी साथ ले जाता:राजा बेटा चला गया, कैसे जियूंगी; यूपी में पत्नी से तंग आकर जान दी थी

साहब मेरा बेटा अब नहीं रहा। तीन महीने पहले देखा था। उससे आखिरी बार भी नहीं मिल पाई। गांव के एक लड़के ने फेसबुक पर उसका वीडियो दिखाया, तबसे मुझे चैन नहीं है। कैसे भूलूंगी उसे… काश वह मुझे भी साथ ले जाता। ये दर्द कुशीनगर के सुसाइड करने वाले जवान इंजीनियर की मां का है। प्रद्युम्न यादव (33) की मां रोते हुए कहती हैं कि बहू की प्रताड़ना से परेशान बेटे ने जान दे दी। उसने गुरुवार को पहले मंदिर में पूजा की। फिर वहीं लगे पेड़ पर फंदे से लटक गया। सुसाइड से पहले उसने वीडियो बनाकर व्हाट्सऐप स्टेटस लगाया था। इंजीनियर बेटे के परिवार का दर्द जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम कुशीनगर जिला मुख्यालय से दूर कसयां तहसील पहुंची। यहां प्रद्युम्न के घर से महिलाओं के रोने की आवाज आ रही थी। हमने उसके घरवालों और पड़ोसियों से बातचीत की। पढ़िए रिपोर्ट… मां रोते-रोते बोली- राजा बेटा चला गया
प्रद्युम्न की मां कलावती देवी (72) को घर की महिलाएं और बेटियां संभाल रही थीं। वह बार-बार बेसुध हो जा रही थीं। घर से बाहर मेन दरवाजे पर आकर रोते-रोते कहतीं- ‘मेरा राजा बेटा चला गया’ घर की ओर आने वाले रास्ते की ओर देखतीं। जैसे उन्हें अब भी प्रद्युम्न के आने की आशा हो। बेटे को खोने का दर्द आंसू बनकर बह रहा था। रोते-बिलखते हुए मां कलावती ने कहा, साहब मेरा बेटा अब नहीं रहा। तीन महीने पहले गांव के एक लड़के ने फेसबुक पर उसका आखिरी वीडियो दिखाया था। वो तो नहीं रहा। इस घर में सिर्फ उसकी यादें ही बची हैं। बहन बोली- भाई की मौत के बाद तो उसे न्याय मिले
मां के बगल में बैठी बहन पूनम की आंखें भी नम थीं। उन्होंने भरे हुए गले से कहा- हमारे घर का सोना चला गया। मेरा भाई बहुत सीधा था, सबसे मिल-जुलकर रहता था। उसे कभी चैन से जीने नहीं दिया गया। बस यही चाहती हूं कि जीते-जी नहीं मिला तो मरने के बाद मेरे भाई को न्याय जरूर मिले। भाई बोले- उसके काम को देखकर प्रमोशन मिला था
प्रद्युम्न के भाई राघवेंद्र सिंह यादव ने कहा- मेरा भाई इंजीनियर था। ऑटोमोबाइल सेक्टर में काम करता था। उसकी शुरुआत गुड़गांव से हुई थी। इस समय मध्य प्रदेश की एक कंपनी में नौकरी कर रहा था। कितना कमाता था इस पर मैं ज्यादा बात नहीं करना चाहता, क्योंकि जो लड़का पहले से इतना परेशान हो, उससे हम और क्या उम्मीद रखते। हम लोग खेती-किसानी करके घर चलाते हैं। पिताजी 2007 में डेयरी डेवलपमेंट ऑफिसर पद से रिटायर हुए थे। भाई ने शुरुआती पढ़ाई कुशीनगर में की थी। उसके काम और अनुभव को देखते हुए मौजूदा कंपनी में उसे प्रमोशन भी मिला था। यह बताते-बताते राघवेंद्र रुक गए, उनका गला भर आया। कुछ देर बाद बोले- उसकी पत्नी अर्पिता ने भरण-पोषण का केस किया था। केस में पडरौना कोर्ट में सुनवाई थी। प्रद्युम्न इसी केस के लिए 10 मई को इंदौर से कुशीनगर आए थे। कोर्ट में सुनवाई के बाद अगली तारीख 21 जुलाई पड़ी। प्रद्युम्न बेहद तनाव में थे। केस के लिए उन्हें बार-बार छुट्टी लेकर आना पड़ता था। उसी केस की आखिरी सुनवाई में उसके ऊपर 125 का खर्चा बहाल हुआ था। आठ हजार रुपए महीना देना था। फिर लगभग 3 लाख 84 हजार रुपए की वसूली तय हुई। उसी को लेकर वारंट जारी हुआ था। इसके बाद वह भागा-भागा फिर रहा था। पढ़िए, प्रद्युम्न ने वीडियो में क्या कहा था…
हार गया यार जिंदगी की जंग। बहुत दुख देखे हैं। दुख देने वाला कोई और नहीं, मेरी वाइफ है। सभी लोगों से रिक्वेस्ट है- कोई यह मत बोले कि बेसमय चला गया। मेरे जाने का अभी समय नहीं था। पिछले एक-डेढ़ महीने से मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि बेटा, सुसाइड कर ले। ठीक है, आज वह समय आ गया। मैं अपने बड़े भाई को एक संदेश देना चाहता हूं। भाई, कभी मां-बाप को यह एहसास मत होने देना कि एक बेटा दुनिया से चला गया। हालांकि, मैं गलती तो कर रहा हूं। हर मां-बाप को लगता है कि बुढ़ापे में बेटा सहारा बनेगा, लेकिन मैं सहारा न बनकर बहुत दुख दे रहा हूं। मैं इस समय जा रहा हूं तो मुझे पता है कि उन्हें कितनी पीड़ा होगी, लेकिन अपने दर्द के आगे उनकी पीड़ा भूल जा रहा हूं। पूरी घटना सिलसिलेवार पढ़िए… ——————- ये खबर भी पढ़ेंः- ‘डार्लिंग तुम्हारे लिए पेपर आउट किया, आकर मिलो’:लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने छात्रा को कॉल करके मिलने का दबाव बनाया; गिरफ्तार लखनऊ यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर परमजीत सिंह (50) को पुलिस ने शुक्रवार रात गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि प्रोफेसर ने बीएससी फाइनल ईयर की छात्रा को फोन किया और मिलने का दबाव बनाया। कहा, ‘डार्लिंग, तुम्हारे लिए पेपर आउट करा दिया है। एग्जाम से पहले घर से आ जाओ। यहां पेपर तुम्हें दे देते हैं।’ पढ़ें पूरी खबर…

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