पूर्व सांसद और बाहुबली नेता आनंद मोहन ने JDU के खिलाफ बागी रुख अख्तियार कर लिया है। सम्राट सरकार के मंत्रियों के शपथ ग्रहण के 10 दिन बाद उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की है। JDU की टॉप लीडरशिप पर आरोप लगाते हुए कहा, ‘पार्टी की चंडाल चौकड़ी ने JDU का सफाया कर दिया है। इन्होंने नीतीश कुमार को जिंदा दफन कर दिया है।’ आनंद मोहन के बयान के बाद JDU ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी नेताओं ने कहा है, ‘आनंद मोहन पार्टी से जुड़े हुए नहीं हैं। उनकी पत्नी और बेटे का JDU से जुड़ाव है। नीतीश कुमार के कारण ही ये जेल से निकले हैं। अब JDU के खिलाफ उल्टा-सीधा बोल रहे हैं।’ ऐसे में सवाल है कि क्या केवल बेटे चेतन आनंद को सम्राट सरकार में मंत्री नहीं बनाने से आनंद मोहन नाराज हैं? जवाब है नहीं। मामला केवल मंत्री नहीं बनाने भर तक सीमित नहीं है। JDU के खिलाफ आनंद मोहन का लहजा तल्ख होने का सबसे बड़ा कारण शिवहर की विधायक श्वेता गुप्ता को मंत्री बनाना है। हमने आनंद मोहन के करीबियों से बात कर इसे समझा। अब पूरे मामले को विस्तार से समझिए… आनंद मोहन को डर, उनकी सियासत को किनारे लगाने की कोशिश दरअसल, सियासत का सूखा देखने और 16 साल जेल में गुजारने के बाद आनंद मोहन ने लंबे अर्से के संघर्ष के बाद पॉलिटिक्स में अपनी बुलंदी दोबारा कायम की है। 2024 के लोकसभा चुनाव में वे न केवल पुरानी लोकसभा सीट शिवहर को हासिल करने में कामयाब रहे, बल्कि अपनी पत्नी लवली आनंद को सांसद बनाने में सफल रहे। आनंद मोहन को आशंका, शिवहर से उन्हें दूर करने की तैयारी दरअसल, आनंद मोहन को अब इस बात की आशंका हो गई है कि नीतीश कुमार के सियासी तौर पर संन्यास लेने के बाद JDU आलाकमान उन्हें शिवहर की सियासत से किनारे करने की तैयारी में जुट गया है। इसे दो कारण से समझिए- 1. बेटे चेतन आनंद की सिटिंग सीट बदल दी लवली आनंद के शिवहर से सांसद बनने के बाद आनंद मोहन को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब शिवहर से सिटिंग विधायक उनके बेटे चेतन आनंद की सीट बदल दी गई। विधानसभा चुनाव में उन्हें शिवहर से हटाकर औरंगाबाद के नवीनगर भेज दिया गया। जबकि चेतन आनंद ने 5 साल तक शिवहर में तैयारी की थी। औरंगाबाद में उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ा। मुकाबला इतना कड़ा हो गया कि वे मात्र 112 वोट से जीत पाए। 2. शिवहर से पहली बार विधायक बनीं श्वेता गुप्ता को मंत्री पद आनंद मोहन को दूसरा झटका तब लगा जब पॉलिटिक्स में मात्र एक साल पुरानी और पहली बार विधायक बनीं श्वेता गुप्ता को सम्राट कैबिनेट में मंत्री बना दिया गया। यह आनंद मोहन के लिए सबसे बड़ा झटका था। नए विधायकों के मंत्री बनने की रेस में सबसे आगे चेतन आनंद का नाम चल रहा था। आनंद मोहन भी इस बात की डिमांड कर चुके थे। आनंद मोहन बार-बार इस बात का तर्क दे रहे थे कि 2024 में जब नीतीश सरकार को बचाने की जरुरत थी तब चेतन आनंद ने राजद का साथ छोड़ JDU का दामन थामा था। लेकिन चेतन को नजरअंदाज कर श्वेता को तवज्जो दिया गया। श्वेता का कद बढ़ने से शिवहर की सियासत बदलने का संकेत आनंद मोहन को चेतन के मंत्री नहीं बनने से ज्यादा खतरा श्वेता के कद बढ़ने से सता रहा है। दरअसल बिहार के सबसे छोटे जिले शिवहर में लोकसभा की मात्र एक सीट है। यहां राजपूत जाति का दबदबा रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि अब तक यहां से 10 सांसद बने हैं। इसमें 7 राजपूत जाति से रहे हैं। दो वैश्य और एक मुस्लिम सांसद बने हैं। जातीय समीकरण के लिहाज से देखें तो शिवहर की राजनीति में हार और जीत दो जातियों (राजपूत और वैश्य) के तालमेल से तय होता है। इसके साथ मुस्लिम-यादव वोटों के संतुलन को साधना होता है। शिवहर में हार-जीत केवल एक जिले की सियासत से तय नहीं होती है। इसमें 6 विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जो तीन पड़ोसी जिलों से मिलकर बनी है। इसमें सीतामढ़ी का रीगा और बेलसंड। पूर्वी चंपारण का मधुबन, चिरैया और ढाका। जबकि शिवहर जिले में शिवहर विधानसभा क्षेत्र शामिल है। 15 साल बाद राजपूत लौटे, फिर से वैश्य को बढ़ाने की तैयारी 2009 से 2019 पिछले तीन बार से लगातार शिवहर सीट से रमा देवी जीतती रहीं थी। वह वैश्य/कलवार जाति से ताल्लुक रखती हैं। 2024 में JDU ने सीतामढ़ी और शिवहर के जातीय समीकरण में उलटफेर की। शिवहर से राजपूत जाति के आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद और सीतामढ़ी से ब्राह्मण जाति से आने वाले देवेशचंद्र ठाकुर को उम्मीदवार बनाया था। सीतामढ़ी से सुनील पिंटू का टिकट कटा था। ये भी वैश्य जाति से ही ताल्लुक रखते हैं। ऐसे में इस इलाके के वैश्य में नाराजगी की बात सामने आई। विधानसभा चुनाव में इसकी भरपाई की गई। दोनों जिलों में वैश्य कैंडिडेट को टिकट दिया गया। सभी जीतने में सफल भी रहे। जीतने वाले में सीतामढ़ी से सुनील पिंटू और रीगा से बैद्यनाथ प्रसाद जैसे पुराने नेता भी शामिल हैं जो वैश्य जाति से ताल्लुक रखते हैं। लेकिन, मंत्री कोटा यहां से JDU को दिया गया और शिवहर से फर्स्ट टाइमर श्वेता गुप्ता को मंत्री बनाया गया। यही कारण है कि आनंद मोहन को शिवहर सीट खोने का खतरा सताने लगा है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि शिवहर विधानसभा से पहली बार महिला विधायक के तौर पर जीतने वाली श्वेता गुप्ता को वैश्य कोटे से शिवहर लोकसभा सीट से भी लड़वाया जा सकता है। शिवहर से आनंद मोहन का पुराना कनेक्शन, पूरा परिवार चुनाव लड़ चुका है शिवहर से आनंद मोहन का पुराना कनेक्शन रहा है। इस सीट पर इनके दबदबा का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि शिवहर की सियासत में एक बात कही जाती है 5 साल कोई भी मेहनत कर ले आखिरी वक्त में आनंद मोहन किसी भी पार्टी से टिकट लेकर यहां अपना झंडा गाड़ सकते हैं। कई मौकों पर वे ऐसा कर चुके हैं। इस बार भी लोकसभा चुनाव के दौरान यह देखने को मिला। तीन बार की सिटिंग सांसद रमा देवी और राणा रंधीर जैसे लोग आलाकमान का चक्कर लगाते रहे। आखिरी वक्त में सीट बीजेपी से JDU के खाते में गई और आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद कैंडिडेट बनीं। वह जीतने में भी सफल रही। आनंद मोहन 90 के दशक से ही अपनी राजनीति शिवहर से करते आ रहे हैं। वे यहां से लगातार दो बार सांसद रह चुके हैं। 1996 में समता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े और जीते थे। इसके बाद 1998 में ऑल इंडिया राष्ट्रीय जनता पार्टी के टिकट पर आनंद मोहन लड़े और जीते। 2015 में उनकी पत्नी लवली आनंद भी यहां से चुनाव लड़ चुकी हैं। तब BJP के बतौर कैंडिडेट ठाकुर रत्नाकर राणा का टिकट काटकर यहां हम के टिकट से लवली आनंद को चुनाव लड़ाया गया। हालांकि तब रत्नाकर के निर्दलीय चुनाव लड़ने के कारण लवली आनंद को हार का सामना करना पड़ा था। 2015 में लवली आनंद के हारने के बाद 2020 में राजद ने यहां उनके बेटे चेतन आनंद को चुनाव मैदान में उतारा। वे चुनाव जीतने में सफल रहे थे। श्वेता गुप्ता बोली, इस पर कुछ नहीं बोलूंगी वहीं, इस पूरे प्रकरण पर भास्कर ने बिहार सरकार की मंत्री और शिवहर से विधायक श्वेता गुप्ता से बात की। उन्होंने बताया, ‘फिलहाल इस मामले पर कुछ नहीं बोलूंगी। पार्टी के सीनियर लोग इस पर जवाब दे रहे हैं।’ 2029 का लोकसभा चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘यह मेरे गार्जियन तय करेंगे और वक्त बताएगा कि मैं आगे क्या करुंगी।’ आनंद मोहन के बेटे अपने इलाके में व्यस्त वहीं, इस पूरे प्रकरण के बीच चेतन आनंद अपनी पार्टी के काम में पूरी तरह व्यस्त हैं। जब आनंद मोहन सीतामढ़ी के कार्यक्रम में बयान दे रहे थे तब चेतन आनंद नवीनगर में अपने क्षेत्र की जनता की समस्या सुन रहे थे। वहीं, जिस आरा-बक्सर चुनाव में NDA के हार को आनंद मोहन मुद्दा बता रहे हैं उस चुनाव में भी उनके बेटे चेतन आनंद JDU कैंडिडेट के पक्ष में प्रचार कर रहे थे। भास्कर ने जब उनसे इस पूरे प्रकरण पर बात करने की कोशिश की तो उन्होंने कुछ भी कमेंट करने से इनकार कर दिया।