‘साहब ये मेरी मां का कटा हाथ है। मैं तीन दिन से थाने, चौकी और एडीसीपी से लेकर डीसीपी ऑफिस के चक्कर काट रहा हूं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं कर रहा है। इंसाफ चाहिए।’ यह कहते हुए ITBP जवान विकास सिंह फफक पड़े। सोमवार को विकास पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के पास पहुंचे थे। उन्होंने कमिश्नर को अपनी मां का कटा हाथ दिखाया तो वे सन्न रह गए। विकास ने बताया कि उनकी मां को पेट में समस्या थी। टाटमिल चौराहा स्थित कृष्णा अस्पताल में गलत इलाज के चलते हाथ काला पड़ गया। इंफेक्शन होने के बाद हाथ काटना पड़ा। कमिश्नर ने कटे हाथ को थर्माकोल के बॉक्स में रखवाया। मामले में सीएमओ से बात की और जांच कराने के लिए कहा। रघुवीर लाल ने जांच के बाद एफआईआर दर्ज करने का भरोसा भी दिया। तब सिपाही विकास सिंह के आंसू रुके। कांस्टेबल के साथ आईटीबीपी के अफसर भी पहुंचे थे। वे अस्पताल के खिलाफ गुस्से में थे। 3 तस्वीर देखिए… अब पूरा मामला विस्तार से जानिए… फतेहपुर के रहने वाले, कानपुर के महाराजपुर में तैनाती विकास सिंह मूलरूप से फतेहपुर में खागा हथगाम के रहने वाले हैं। इस समय विकास की पोस्टिंग महाराजपुर स्थित 32वीं बटालियन में है। यहां आईटीबीपी का ऑफिस है। विकास ने बताया कि उनकी 56 साल की मां निर्मला देवी को सांस की दिक्कत थी। उन्हें कब्ज और कमजोरी की शिकायत थी। मां को आईटीबीपी महाराजपुर स्थित अस्पताल में दिखाया था। 13 मई, 2026 को अचानक उनकी मां की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद डॉक्टरों ने आईटीबीपी के पैनल में शामिल अस्पताल यानी हायर सेंटर रेफर किया था। विकास मां को एम्बुलेंस से लेकर निकले। रास्ते में भीषण जाम लगा था और उनकी मां की हालत लगातार नाजुक हो रही थी। इस कारण, विकास उन्हें आनन-फानन में टाटमिल स्थित कृष्णा हॉस्पिटल ले गए। वहां डॉक्टरों ने मां को तुरंत ऑक्सीजन सपोर्ट पर लिया और उनके हाथ में कैनुला (वीगो) लगाया। विकास का आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने मां को गलत इंजेक्शन लगा दिया। इससे उनका हाथ काला पड़ गया। सूजन लगातार बढ़ती चली जा रही थी। मां की हालत बिगड़ने लगी तो 14 मई की शाम उन्हें बिठूर रोड बैकुंठपुर स्थित पारस हॉस्पिटल में एडमिट कराया। 17 मई को डॉक्टरों ने बहुत प्रयास किया, लेकिन इस स्टेज पर उन्हें रेफर किया गया था कि मां के हाथ में संक्रमण फैल चुका था। इस वजह से डॉक्टरों को उनका हाथ काटना पड़ गया। मेरे ही सामने मां का हाथ काटा गया
विकास सिंह ने बताया कि मैंने डॉक्टरों से पता करने का प्रयास किया, लेकिन कुछ स्पष्ट नहीं हो सका कि आखिर हाथ में संक्रमण क्यों हुआ और उनका हाथ क्यों काटना पड़ा। आरोप लगाया कि कृष्णा हॉस्पिटल की लापरवाही के चलते ही ऐसा हुआ है। हॉस्पिटल संचालक और डॉक्टरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। मेरी मां के इन्हीं हाथों ने मुझे बचपन से पाला-पोसा और इतना बड़ा किया। आज मेरे ही सामने मेरी मां का हाथ काट दिया गया, मैं सेना में होने के बाद भी अपनी मां को इंसाफ नहीं दिला सकता हूं। पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने सीएमओ को मामला रेफर करते हुए पैनल गठित करके जांच करने की मांग की है। इसके बाद जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया। तब ताकर सेना का जवान शांत हुआ और वहां से लौटा। अफसर बोले- मेरे कांस्टेबल और इंस्पेक्टर की भी हो चुकी है मौत आईटीबीपी के लाइजनिंग ऑफिसर अर्पित सिंह ने बताया- मुझे यह भी जानकारी मिली है कि आईटीबीपी की एक महिला कांस्टेबल की भी इलाज के दौरान कृष्णा हॉस्पिटल में मौत हो चुकी है। एक इंस्पेक्टर की भी इलाज में लापरवाही के चलते मौत हो चुकी है। इस वजह से इस अस्पताल के खिलाफ मैं खुद अपने कांस्टेबल के साथ यहां पर शिकायत करने पहुंचा हूं। ताकि कृष्णा हॉस्पिटल के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जा सके। मामले में कानपुर एसीपी के स्टाफ अफसर अमरनाथ यादव ने कहा, आईटीबीपी जवान ने डीसीपी पूर्वी से मुलाकात की थी। डीसीपी ने सीएमओ कानपुर नगर को लेटर लिखकर कृष्णा अस्पताल और पारस अस्पताल दोनों की भूमिका की जांच कराए जाने के लिए निर्देशित किया है। जांच में जो भी तथ्य प्रकाश में आएंगे, उनके आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। कटे हुए हाथ के संबंध में फोरेंसिक जांच कराने हेतु भी निर्देश दिए गए हैं। ————————- यह खबर भी पढ़ें सीएम शुभेंदु PA हत्याकांड- यूपी से मुख्य शूटर पकड़ा गया:परिवार के साथ हरिद्वार से लौट रहा था, ये भी बलिया का ही रहने वाला बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ की हत्या में सोमवार को यूपी से एक और आरोपी गिरफ्तार किया गया। बलिया के रहने वाले राजकुमार सिंह को CBI ने मुजफ्फरनगर से पकड़ा। उसे हत्याकांड का मुख्य शूटर माना जा रहा है। इससे पहले 10 मई को बलिया के ही रहने वाले राज सिंह को अयोध्या से पकड़ा गया था। पढ़ें पूरी खबर…