जौनपुर में टावर से कूदकर युवक ने अफसरों के सामने जान दे दी। वह 100 फीट ऊंचाई पर 7 घंटे से चढ़ा हुआ था। युवक के नीचे गिरते ही अफसर उसे इलाज के लिए सरकारी गाड़ी से लेकर सदर अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। युवक खेत से रास्ता निकाले जाने से नाराज था। वह दोबारा नपाई की मांग कर रहा था। तहसीलदार ने दोबारा नाप कराई। लेकिन इस बार भी पहले वाली नाप सही निकली। युवक को जैसे ही इस बात का पता चला उसने आहत होकर जान दे दी। घटना के समय तहसीलदार, नायब तहसीलदार, थाना प्रभारी पुलिस टीम और फायर ब्रिगेड के साथ मौजूद थे। घटना जिला मुख्यालय से करीब 11 किमी दूर बक्शा थाना क्षेत्र की है। 2 तस्वीरें देखिए… अब पूरा मामला विस्तार से… बक्शा के उतरीजपुर गांव में विशेषरपुर पड़ता है। यहां राजाराम यादव पत्नी और दो बेटों के साथ रहते हैं। बड़ा बेटा श्रीप्रकाश यादव (30) शंभूगंज बाजार में चाय की दुकान लगाता था। श्रीप्रकाश यादव की शादी हो गई थी। उसकी तीन बेटियां हैं। छोटा बेटा जय शंकर यादव उर्फ भोला पढ़ाई करता है। बताया जा रहा है कि 2016 में जमीन का सीमांकन हुआ था। इसमें राजाराम यादव की 15 बिसवा जमीन से चकरोड निकाल दी गई थी। अफसरों का कहना था कि ये रास्ता उनकी जमीन से नहीं निकाला गया। जबकि, श्रीप्रकाश के मुताबिक, ये चकरोड किसी भी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। 4 साल पहले मुकदमा लिखवाया था करीब 4 साल पहले श्रीप्रकाश ने तहसील में खेत की पैमाइश के लिए मुकदमा दाखिल किया था। SDM के आदेश पर सीमांकन हुआ। लेकिन श्रीप्रकाश इससे संतुष्ट नहीं था। उसका कहना था खेत का रकबा कम मिला। कई बार तहसील में शिकायत की। लेकिन कोई अफसर दोबारा सीमांकन के लिए तैयार नहीं हुआ। विवादित जमीन पर बनाई जा रही थी सड़क कुछ दिन पहले इस जमीन पर पड़ोसी बसंतु सड़क बनवा रहा था, जिसका श्रीप्रकाश विरोध कर रहा था। गुरुवार सुबह 7 बजे श्रीप्रकाश घर से 500 मीटर की दूर बने मोबाइल टॉवर पर चढ़ गया। यहां से उसने गांव के प्रधान बृजेश यादव को फोन किया। उनसे बोला- मेरे खेत का दूसरे काननूगो और लेखपाल से सही सीमांकन कराएं। वरना मैं यहां से कूदकर जान दे दूंगा। बृजेश यादव ने पुलिस और राजस्व विभाग के अफसरों को मामले की सूचना दी। थाना प्रभारी विरेंद्र कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। फायर बिग्रेड और सीनियर अफसरों को भी मामले की जानकारी दी। इसके बाद SDM संतवीर सिंह, सीओ दिवेश कुमार सिंह और तहसीलदार समेत राजस्व विभाग के कर्मी मौके पर पहुंच गए। सभी युवक को समझाने लगे। तहसीलदार ने तुरंत टीम गठित की तहसीलदार ने प्रधान के फोन से श्रीप्रकाश से बात की। उससे नीचे उतरने के लिए कहा। लेकिन, श्रीप्रकाश ने साफ मना कर दिया। उसने कहा कि कि जब तक दूसरे अफसर दोबारा नाप नहीं करते मैं नीचे नहीं आऊंगा। इसके बाद एसडीएम मौके से चले गए। तहसीलदार ने तुरंत दूसरे क्षेत्र के काननूगो और लेखपाल को बुलवाया। श्रीप्रकाश के खेत की दोबारा नाप कराई गई। लेकिन, इसमें भी पुरानी नाप को ही सही बताया गया। प्रधान के फोन से दोबारा श्रीप्रकाश को जब ये बताया गया तो वह आहत हो गया और नीचे कूद गया। करीब 7 घंटे तक ये सब चलता रहा। सरकारी गाड़ी से युवक को अस्पताल पहुंचाया श्रीप्रकाश के कूदने के दौरान मौके पर तहसीलदार, नायब तहसीलदार, थाना प्रभारी के अलावा फायर ब्रिगेड और सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे। थाना प्रभारी ने पुलिस टीम की मदद से श्रीप्रकाश को तुरंत गाड़ी में लिटाया। इलाज के लिए सदर अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी पर एसपी ग्रामीण आतिश कुमार, एसपी कुंवर अनुपम सिंह, सीओ सदर देवेश कुमार सिंह सहित कई थानों की फोर्स और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया। मां बोली- हम लोग 12 साल से परेशान हैं श्रीप्रकाश की मां सीता देवी ने बताया कि मैं 12 साल से परेशान हूं। मेरी 15 बिसवा खेत के बगल में अर्जुन, बसंतु और महावीर यादव ने बाउंड्री करवा ली है और घर भी बना लिया है। फिर भी मेरी ही जमीन से रास्ता निकाल रहे हैं। राजस्व विभाग ने 5 लट्ठा छोड़कर करके जमीन की नाप की है। अफसर रुपए लेकर फाइल को दबा दे रहे हैं। जबरदस्ती पत्थर लगाकर कहते हैं कि जाओ तुम्हारा पत्थर नसब हो गया। लेकिन, हमको मालूम ही नहीं था कि कब मेरे खेत का सीमांकन कराया गया है। भाई बोला- 15 दिन से चक्कर काट रहे थे छोटे भाई जय शंकर यादव ने पुलिस को बताया- लंबे समय से जमीनी विवाद चल रहा था। सीमांकन के लिए आदेश हुआ था। हमारे बुलाने पर अफसर नहीं आते थे। वहीं विपक्षी के बुलाने पर आ जाते थे। मेरा विपक्षी जिला पंचायत निधि से रुपये पास करवाकर रास्ता बनवा रहा था। इसे रुकवाने के लिए हम लोग काफी सालों से परेशान हैं। डीएम ने जांच का भरोसा दिया था श्रीप्रकाश के भाई ने बताया- डीएम साहब ने मामला देख लेने का भरोसा दिया था। एक दिन एसडीएम ऑफिस गया तो उन्होंने कहा- चलो कल तुम्हारी फाइल निकलवाकर देखते हैं। अगले दिन गया तो उन्होंने कहा कि नपाई हो गई है। अब दोबारा नहीं होगी। इसके बाद विपक्ष के लोग सड़क बनवाने लगे। हम लोग जब भी पुलिस को बुलाते तो पुलिस वाले उल्टा हमें ही धमकाते-गाली देते थे। इससे परेशान होकर भाई ने जान दे दी। डीएम सैमुअल पाल एन ने बताया कि लड़के को समझाने की काफी कोशिश की गई थी। परिवार के साथ हमारी संवेदनाएं है। 3 अधिकारियों की टीम बनाकर 3 दिन में रिपोर्ट मांगी गई है। ——————– ये खबर भी पढ़ें… बलिया में एक ही व्यक्ति चपरासी भी और शिक्षामित्र भी:रोक के बावजूद शिक्षा विभाग में 179 फर्जी कर्मियों का वेतन जारी रामेश्वर सिंह बलिया में भीमपुरा कस्बे के रामकरण इंटर कॉलेज में चपरासी हैं। नियुक्ति 1 जुलाई, 2005 को हुई थी। हैरत की बात ये है कि रामेश्वर कस्बे के कंपोजिट स्कूल में 23 अगस्त, 2015 से शिक्षामित्र के रूप में भी तैनात हैं। दोनों पदों का वेतन और मानदेय ले रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…