बक्सर में सीएम सम्राट चौधरी का हेलीकॉप्टर धूल के कारण लैंड नहीं कर पाया। यहां के किला मैदान में हैलीपेड बनाया गया था, लेकिन दो बार के प्रयास के बाद भी मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर लैंड नहीं कर पाया। इसके बाद तीन किलोमीटर दूर बक्सर हवाई अड्डा मैदान में बिना सुरक्षा के सीएम के हेलीकॉप्टर को लैंड कराया गया। प्रत्यक्षदर्शी राज ने बताया, ‘सीएम का हेलीकॉप्टर जब बक्सर हवाई अड्डा पर लैंड हुआ तो वहां प्रशासन की कोई टीम मौजूद नहीं थी। इसी वजह से आसपास मौजूद लोग और बच्चे सीधे हेलीकॉप्टर के काफी करीब पहुंच गए। फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करने लगे, लेकिन उस समय कोई सुरक्षा व्यवस्था नजर नहीं आई। न पुलिस प्रशासन वहां मौजूद था और ना ही किसी तरह की बैरिकेडिंग की गई थी। ऐसा लगा जैसे बिना किसी तैयारी के ही हेलीकॉप्टर को उतार दिया गया हो। करीब 5 से 10 मिनट बाद अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की आवाजाही शुरू हुई।’ मौके से आई 2 तस्वीरें… CM ने की बक्सर जेल में वामन भगवान के मंदिर में पूजा इससे पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बक्सर जेल में वामन भगवान के मंदिर में पूजा की। ये मंदिर बक्सर जेल के अंदर है। सम्राट चौधरी समृद्धि यात्रा में नीतीश कुमार के साथ बक्सर पहुंचे थे। उस वक्त वे डिप्टी CM थे। उन्होंने मंच से ऐलान किया था कि जल्द भगवान वामन जेल से बाहर आएंगे। मंदिर जेल के अंदर है इससे श्रद्धालुओं को परेशानी होती है। मंदिर में पूजा-अर्चना, दर्शन और मेले के आयोजन के लिए भी जेल प्रशासन की अनुमति लेनी पड़ती थी। प्रशासनिक स्तर पर मंदिर को जेल परिसर से अलग करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि उनकी सालों पुरानी ये मांग अब पूरी होगी। वामन मंदिर में CM की पूजा की तस्वीरें… मंदिर को बाहर निकालने के लिए सालों से चल रहे आंदोलन वामनेश्वर मंदिर को जेल परिसर से बाहर लाने को लेकर कई सालों से सामाजिक संगठन, स्थानीय लोग और श्रद्धालु आंदोलन चला रहे थे। उनका कहना था कि धार्मिक स्थल होने के बावजूद मंदिर तक स्वतंत्र पहुंच न होने से आस्था प्रभावित हो रही थी। मुख्यमंत्री के आगमन और प्रशासनिक सक्रियता के बाद यह आंदोलन सफल होता दिख रहा है। जेलर के आदेश पर होती है भगवान वामन की पूजा बक्सर शहर के केंद्रीय जेल परिसर में भगवान वामन का मंदिर स्थापित है। मंदिर में पूजा दर्शन के लिए लोग दूर-दूर से लोग पहुंचते है। भगवान वामन के मंदिर में पूजा सेंट्रल जेल के जेलर के आदेश पर होती है। जिसको लेकर मंदिर परिसर में जगह-जगह नोटिस भी चिपकाया गया है। जेलर के आदेश पर पूजा दर्शन इसलिए किया जाता है क्योंकि मंदिर जेल परिसर में होने के कारण मंदिर का खुलने और बंद होने का समय निर्धारित किया गया है। मंदिर के गेट खुलने का समय सुबह 5 बजे से 11 बजे और शाम में 3 बजे से आरती होने के समय तक है। सेंट्रल जेल से मुक्ति के लिए चल रही लड़ाई सेंट्रल जेल से मुक्ति को लेकर वामन चेतना मंच लड़ाई लड़ रहा है। लड़ाई चेतना मंच के सदस्य प्रमोद चौबे ने बताया कि भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से एक बटुक वामन का अवतार बक्सर के सिद्धाश्रम में हुआ था, जो आज केंद्रीय कारागर परिसर में मौजूद है। उन्होंने बताया कि पूरे विश्व में यदि भगवान वामन का कहीं मन्दिर है तो वह बक्सर में है। उन्होंने बताया कि यह मंदिर बेहद पुराना है। यहां आस-पास में 250 वर्ष पुराना वृक्ष भी है। उन्होंने बताया कि अंग्रेजी हुकूमत के दौरान हीं यहां सेंट्रल जेल बना था, तो मंदिर का परिसर भी इसके अंदर चला गया। हालांकि, भगवान वामन के मन्दिर को जेल परिसर से मुक्त कराने के लिए कई सालों से वामन चेतना मंच लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन अबतक इसे मुक्त नहीं किया जा सका है। जिससे श्रद्धालुओं को काफी परेशानी होती है। वामन द्वादशी पर लगता है भव्य मेला वामन द्वादशी पर सेंट्रल जेल के आसपास भव्य मेला का आयोजन किया जाता है। विभिन्न प्रकार के झूलों के साथ तरह-तरह की दुकानें सजाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार वामन द्वादशी के दिन ही भगवान वामन ने अवतार लिया था। इस मौके पर तीन साल से वामन चेतना मंच द्वारा वामन भगवान की रथ यात्रा भी निकाली जाती है। रथ यात्रा बक्सर रामेश्वर नाथ मंदिर से शुरू होकर पूरे शहर का भ्रमण करते हुए सेंट्रल जेल परिसर में पहुंचती है। इस दिन लाखों की संख्या की भीड़ गंगा स्नान के बाद दर्शन पूजन के लिए आती है। विधि व्यवस्था बनाने में जिला प्रशासन के अधिकारियों को पसीने छूट जाते हैं। बक्सर जिला मुख्यालय से 3 किलोमीटर दूरी पर मंदिर भगवान विष्णु के सभी अवतारों में पाचवां अवतार पहली बार शरीर धारी स्वरूप माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार दैत्यराज बलि के आतंक को खत्म करने के लिए श्री नारायण ने चरित्रवन स्थित आश्रम में ब्राह्मण दंपति के कोख से जन्म लिया था। इसके बाद इस जगह का नाम वामनाश्रम पड़ गया। कद-काठी में ठिगना यानि छोटा होने के कारण ब्राह्मण बालक का नाम वामन पड़ा। जिन्होंने अपनी बुद्धि और कौशल के बल से असुर राज बलि को साम्राज्य विहीन कर देवराज इंद्र को फिर से गद्दी दिलाई थी। फिलहाल जिस जगह को इनके अवतरण का स्थान माना जाता है। वह केंद्रीय जल परिसर है। जहां उनका मंदिर स्थापित है। यह मंदिर बक्सर जिला मुख्यालय से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।