‘पूर्व सीएम नीतीश कुमार ने लाइन इतनी लंबी खीच दी है कि उसे छू पाना संभव नहीं है। अब कोई सीएम से सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बात नहीं कर सकता है, जो पहले बिहार का सबसे बड़ा दर्द था। लेकिन, इन सब से आगे कुछ तो करना होगा न।’ बिहार के नए CM सम्राट चौधरी ऑफ द रिकॉर्ड और ऑन द रिकॉर्ड अक्सर इन बातों को दोहरा रहे हैं। नीतीश के उत्तराधिकारी के तौर पर उन्हें खाली बिहार नहीं मिला है, कुछ चुनौतियां भी हैं, जिससे बिना निबटे वे बिहार के ‘चौधरी’ नहीं बन सकते। इस बार मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए 15 अप्रैल को बिहार के 24वें CM की शपथ लेने वाले सम्राट चौधरी को अपनी पार्टी से सरकार तक किस स्तर तक मुश्किलों से जूझना होगा। बिहार से पहले पार्टी को संभालनी होगी, स्वीकार्यता बनानी होगी CM सम्राट के लिए सबसे बड़ी चुनौती घर से ही है। NDA के सभी दलों ने इन्हें अपना नेता मान लिया है। कहीं से किसी तरह का कोई विरोध सामने नहीं आया है। BJP के नेता ही इनके CM बनने से नाराज हो गए हैं। कुछ नेता खुलकर तो कुछ पर्दे के पीछे से अपनी नाराजगी दिखा रहे हैं। पॉलिटिकल एक्सपर्ट अरुण कुमार पांडेय बताते हैं, ‘बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने सम्राट चौधरी पर भरोसा किया है। लेकिन, पार्टी के भीतर ही लोग इनको आउट साइडर बता रहे हैं। पुराने नेता उत्साह नहीं दिखा रहे हैं। पार्टी के भीतर ही मूल भाजपाई और आयातित भाजपाई का धड़ा बन गया है।’ 2. क्राइम पर करना होगा कंट्रोल सम्राट चौधरी के गृह मंत्री बनते ही जिस घटना ने उनकी सबसे ज्यादा किरकिरी कराई, ‘वो है नीट छात्रा रेप मौत मामला’। घटना के 4 महीने बाद तक पुलिस और सीबीआई चार्जशीट भी नहीं कर पाई। इनके अलावा लूट और मर्डर के कई बड़े मामले हुए। हालांकि इसी आंकड़े को पेश करने के दौरान DGP की तरफ से बताया गया था कि बिहार में क्राइम का नया मॉडल तेजी से आकार ले रहा। साइबर क्राइम की घटना लगातार बढ़ रही है। 15 दिसंबर 2025 तक एक साल में बिहार में 5,624 से अधिक एफआईआर दर्ज की गई थी, जो 2022 में एक हजार से भी नीचे था। 3. नीतीश के कल्याणकारी योजनाओं के लिए जुटाना होगा रेवेन्यू सबसे पहले 2 आंकड़े समझिए… चुनाव से ठीक पहले जन कल्याण को लेकर कई घोषणाएं की गईं। अगर बड़ी योजनाओं को देखें तो 1.8 करोड़ से ज्यादा जीविका दीदीयों को रोजगार करने के लिए 10 हजार रुपए, 125 यूनिट बिजली फ्री, सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि डबल, आंगनबाड़ी-आशा कार्यकर्ताओं की सैलरी डबल, आंगनबाड़ी सेविका को स्मार्टफोन। ऐसी लोकलुभावन घोषणाओं का सरकार के खजाने पर करीब 12 हजार करोड़ से ज्यादा का बोझ पड़ा। इन सब के साथ सीएम नीतीश कुमार ने समृद्धि और प्रगति यात्रा के दौरान लगभग 50 हजार करोड़ से ज्यादा की योजनाओं का शिलान्यास किया था। इन योजनाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी भी अब नई सरकार की होगी। 4. भ्रष्टाचार मुक्त बिहार के नारे को हकीकत में बदलना होगा नीतीश कुमार ने जब सरकार संभाला था तब उन्होंने 3C (क्राइम, करप्शन और कम्युनिज्म) से समझौता नहीं करने का फॉर्मूला दिया था। शुरुआती 10 साल तक उन्होंने इसे फॉलो भी किया। हालांकि बाद के दिनों में उनकी पकड़ इस पर कमजोर हुई। 5. बीजेपी का वादा- नौकरी, उद्योग और पलायन रोकना होगा इन सारी चुनौतियों के साथ सम्राट के सामने एक चुनौती चुनाव के दौरान BJP के चुनावी वादों को पूरा करना है। पहली बार बिहार में BJP की सरकार बनी है तो इन्हें अगले चुनाव में अपनी घोषणा पत्र का जवाब भी देना होगा। अगर बीजेपी की घोषणा पत्र की टॉप-5 बड़ी घोषणआों की बातों करें तो इनमें 5 साल में एक करोड़ रोजगार, सरकारी नौकरी, केजी से पीजी तक फ्री शिक्षा, 7 नई एक्सप्रेस वे, 1 करोड़ लखपति दीदी तैयार करना जैसी योजनाएं शामिल हैं।