IDFC बैंक केस में CBI की पहली चार्जशीट दाखिल:504 करोड़ के स्कैम में 15 आरोपी नामजद; घोटाले के मेन किरदारों का जिक्र, IAS से पूछताछ

हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों से 504 करोड़ रुपए के कथित गबन मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। CBI ने वीरवार को पंचकूला स्थित विशेष CBI कोर्ट में यह चार्जशीट पेश की। मामले में बैंक अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों सहित कुल 15 आरोपियों को नामजद किया गया है। CBI की चार्जशीट के अनुसार, आरोपियों में IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के 6 अधिकारी, हरियाणा सरकार के 3 कर्मचारी, 2 शेल कंपनियां व उनके 3 साझेदार/निदेशक तथा एक निजी व्यक्ति शामिल हैं। सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। जांच एजेंसी ने आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, फर्जीवाड़ा, सबूत नष्ट करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत अपराध करने के आरोप लगाए हैं। पढिए…CBI की पहली चार्जशीट में क्या… 15 को आरोपी बनाया 504 करोड़ रुपये के बहुचर्चित सरकारी फंड घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। सीबीआई ने पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत में यह चार्जशीट पेश की, जिसमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक, हरियाणा सरकार के अधिकारियों और निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। सीबीआई के अनुसार इस मामले में कुल 15 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। इनमें 6 बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के 3 कर्मचारी, 2 शेल कंपनियां उनके 3 निदेशकों, पार्टनरों सहित और एक निजी व्यक्ति शामिल है। सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। सेकेंड चार्जशीट भी दाखिल करेगी जांच एजेंसी ने आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी, सबूत नष्ट करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत केस दर्ज किया है।
सीबीआई ने बताया कि जिन 15 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है, उनके संबंध में जांच पूरी कर ली गई है। हालांकि अन्य आरोपियों और दूसरे विभागों में सरकारी धन के गबन की जांच अभी जारी है। एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही अतिरिक्त चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती हैं। चार्जशीट में घोटाले के प्रमुख किरदारों का जिक्र… 1. मुख्य साजिशकर्ता और बैंक कर्मी रिभव ऋषि: यह IDFC फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32, चंडीगढ़ शाखा का पूर्व मैनेजर था। बाद में इसने AU स्मॉल फाइनेंस बैंक जॉइन कर लिया था। इसे इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड माना गया है। इसने फर्जी कंपनियों के नाम पर खाते खुलवाकर सरकारी धन को वहां डायवर्ट करने की साजिश रची। अभय: यह IDFC बैंक में पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर था। इसने अगस्त 2025 में इस्तीफा दे दिया था। जांच के अनुसार, अभय और रिभव ने मिलकर फर्जी चेक और भुगतान निर्देशों के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी की। 2. निजी कंपनियों के संचालक (पैसा लेने वाले) स्वाति सिंगला: यह आरोपी अभय की पत्नी है। वह ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स’ नामक कंपनी की मालकिन है (करीब 75% हिस्सेदारी)। आरोप है कि बैंक से फर्जी तरीके से निकाले गए करीब 300 करोड़ रुपए सीधे इसी कंपनी के खाते में ट्रांसफर किए गए थे। अभिषेक सिंगला: यह स्वाति सिंगला का भाई है और उसी कंपनी में हिस्सेदार है। इसे भी फंड ट्रांसफर और मनी लॉन्ड्रिंग की प्रक्रिया में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। 3. सरकारी अधिकारी और कर्मचारी अमित दीवान: यह हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPGCL) में डायरेक्टर (फाइनेंस) के पद पर तैनात था। इसे मार्च 2026 में गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि इसने रिश्वत लेकर सरकारी धन को गलत तरीके से निजी बैंकों में जमा कराने और अवैध लेनदेन को अनदेखा करने में मदद की। राजेश सांगवान: ये वित्त और लेखा नियंत्रक (CFA) थे, जिन्हें घोटाले में भूमिका के चलते सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। अन्य गिरफ्तारियां: पुलिस और ACB ने अब तक कुल 16 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें बिचौलिए, रियल एस्टेट डेवलपर्स और कुछ अन्य बैंक कर्मचारी शामिल हैं। घोटाले का तरीका…. फर्जी खाते: आरोपियों ने सरकारी धन (जैसे हरियाणा विकास पंचायत विभाग और HPGCL का पैसा) को डायवर्ट करने के लिए फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों का सहारा लिया गया। निजी निवेश: सरकारी पैसा निजी बैंकों में जमा किया गया और वहां से इसे ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स’ जैसी शेल कंपनियों में भेज दिया गया। रिकवरी: राहत की बात यह है कि बैंक ने मुख्य राशि ब्याज सहित हरियाणा सरकार को वापस लौटा दी है। सरकारी विभागों के खातों से निकाली गई थी राशि CBI के मुताबिक, यह मामला हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के बैंक खातों से करीब 504 करोड़ रुपए की राशि निकालने से जुड़ा है। आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने संबंधित विभागों में तैनात सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर इस फंड का दुरुपयोग किया। जांच में हरियाणा पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड, विकास एवं पंचायत विभाग और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के कर्मचारियों की भूमिका सामने आई है। पहले विजिलेंस कर रही थी जांच यह मामला पहले हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पास दर्ज था। बाद में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं को देखते हुए जांच CBI को सौंप दी गई थी। CBI ने बताया कि 15 आरोपियों के खिलाफ जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल कर दी गई है, जबकि अन्य आरोपियों और अन्य विभागों में हुए संभावित गबन की जांच अभी जारी है। एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही अतिरिक्त चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *