पटना की NEET छात्रा से रेप और मौत मामले के 5 महीने हो चुके हैं, लेकिन न तो पुलिस और ना ही CBI किसी नतीजे पर पहुंच पाई है। अब मामले में विशेष पॉक्सो कोर्ट ने CBI की धीमी कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ कहा कि बच्चों से जुड़े अपराधों में जांच में देरी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही पीड़िता के परिवार को 2.5 लाख रुपए का अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि CBI को केस ट्रांसफर हुए 110 दिन से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन अब तक जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। अदालत ने इसे बेहद गंभीर माना और एजेंसी की कार्यशैली पर सवाल उठाए। अगली सुनवाई 15 मई को अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी की स्वतंत्रता का मतलब मनमानी नहीं है। “जांच चल रही है” जैसे सामान्य जवाब अब स्वीकार नहीं किए जाएंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हर हाल में ठोस प्रगति दिखानी होगी। इस मामले की अगली सुनवाई 15 मई 2026 को तय की गई है, जहां कोर्ट जांच की प्रगति की समीक्षा करेगा। आरोपी मनीष रंजन को मिली जमानत ‘ऐसा लगता है कि CBI ने आदेश के बावजूद जानबूझकर चार्जशीट फाइल नहीं की। 10 अप्रैल को समय सीमा के अंदर जांच पूरी करने या स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया था, जिसका पालन नहीं हुआ। यह कोर्ट के आदेश का खुला उल्लंघन है।’ कोर्ट ने यह टिप्पणी NEET छात्रा मामले में करते हुए आरोपी मनीष रंजन को जमानत दे दी थी। जमानत की खबर मिलते ही छात्रा की मां की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें PMCH में भर्ती कराया गया। यह हाल है देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी CBI और बिहार पुलिस का…। उस सरकार का जो जंगलराज का खौफ दिखाकर 20 साल से सत्ता में बनी हुई है। क्या है पूरा मामला? आंखों में डॉक्टर बनने का सपना लेकर जहानाबाद से पटना आई 17 वर्षीय NEET स्टूडेंट 6 जनवरी 2026 को अपने हॉस्टल में बेहोशी की हालत में मिली थी। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। शुरुआती जांच में यौन उत्पीड़न के संकेत मिलने के बाद बिहार पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। पोस्टमॉर्टम और FSL रिपोर्ट में पूरी बॉडी पर चोटें, प्राइवेट पार्ट्स पर गंभीर इंजरी, फटे कपड़े, खून के छींटे, अंडरगारमेंट पर स्पर्म मिलने की बात सामने आई। बावजूद इसके बिहार पुलिस और SIT अपनी सुसाइड वाली ही थ्योरी पर अड़ी रही। पुलिस और SIT पर सबूत मिटाने और छिपाने, CCTV गायब करने, कपड़े देर से FSL को भेजने के आरोप लगे। 12 फरवरी 2026 को केस CBI को सौंप दिया गया। CBI जांच की तो पूछिए ही मत। वह तारीख दर तारीख कोर्ट में डांट खाती रही, लेकिन कोई ठीक से जांच रिपोर्ट कोर्ट को नहीं दे सकी। अब छात्रा की मौत के 110 दिन बीत जाने के बाद भी उसकी मौत की वजह स्पष्ट नहीं है। CBI ने जांच में क्या-क्या ग्राफिक के जरिए समझिए… दरअसल, लोग भूल गए थे कि बिहार में CBI ने क्या कमाल किया है? याद तो है ना… नवरुणा हत्याकांड: मुजफ्फरपुर में 14 वर्षीय लड़की का अपहरण-हत्या। CBI ने केस 2014 में टेक ओवर किया। कुछ गिरफ्तारियां कीं। 6 साल जांच के बाद 2020 में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। सबूत न मिलने का हवाला दिया। किसी को कोई सजा नहीं मिली। यानी नवरुणा को किसी ने नहीं मारा। ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांडः 2012 में ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या गोली मारकर कर दी गई। पुलिस ने जांच की। फिर मामला CBI को ट्रांसफर कर दिया गया। जांच लंबी खिंची। 2023 में पूर्व MLC हुलास पांडे सहित अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई, लेकिन बुलेट्स और खोखा में मिसमैच है। अभी मामला पेंडिंग ही चल रहा है। शिल्पी-गौतम मर्डरः शिल्पी जैन और गौतम सिंह के नग्न शव गैरेज में खड़ी कार में मिले। पोस्टमॉर्टम में जहर, मल्टीपल रेप के संकेत मिले। कपड़े पर कई लोगों के स्पर्म मिले। NEET छात्रा केस की तरह पुलिस ने पहले सुसाइड की थ्योरी रची, फिर सेक्स के दौरान दम घुटने से मौत बताया। अंत में मामला CBI ने 1999 में टेकओवर किया, लेकिन 2003 में डबल सुसाइड बताकर क्लोज कर दिया गया। मंत्री ने मानी हत्या, पुलिस ने क्यों नहीं? तत्कालीन गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने 31 जनवरी को X पर पोस्ट लिखकर कहा था- ‘NEET स्टूडेंट की हत्या मामले को CBI को ट्रांसफर कर दिया गया है।’ वहीं, पुलिस सुसाइड मानने की बातें कह रही है। मामले की जांच के लिए IG जितेंद्र राणा की निगरानी में SIT बनी। मतलब IG लेवल के अफसर भी फेल हो गए हैं। ये सिर्फ एक केस नहीं है। यह बिहार के हर उस मां-बाप का डर है जो अपने बच्चे को पढ़ने के लिए घर से दूर भेजते हैं। उन्हें कानून पर भरोसा चाहिए… कहानी नहीं। जांच चाहिए… बहाना नहीं। न्याय चाहिए…सिस्टम की ढाल नहीं। अब निगाहें CBI पर हैं, लेकिन उससे भी बड़ा सवाल है- क्या न्याय सबूतों से तय होगा… या सिस्टम की सुविधा से? भास्कर के CBI और सरकार से 6 सवाल… बिहार पुलिस और CBI असफल क्यों रही। SIT 20 दिनों में सिर्फ एक आरोपी को पकड़ पाई। सत्ता में बैठा कौन व्यक्ति है, जो आरोपियों को बचा रहा है? DNA सैंपल्स लिए गए तो बीच में जांच रोककर CBI को केस क्यों ट्रांसफर किया गया? पुलिस ने किसके कहने पर जानबूझकर जांच को धीमा किया या लीपापोती करती रही? 17 घंटे का CCTV फुटेज कहां है? हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर सरकार-प्रशासन की जिम्मेदारी क्यों नहीं तय की गई? DGP और पुलिस अधिकारियों के शुरुआती बयानों में विरोधाभास क्यों थे? परिवार को डराने-धमकाने के आरोपों पर सरकार ने क्या कार्रवाई की? SIT अब तक एम्स की स्पेशल टीम को सारे दस्तावेज क्यों नहीं उपलब्ध करा पाई, जिस पर पूरी जांच टिकी थी। बेटी को न्याय दिलाने की पुकार लगाते-लगाते मां ने खो दिया मानसिक संतुलन छात्रा की मां बेटी को न्याय दिलाने की पुकार लगाते-लगाते अपना मानसिक संतुलन खो चुकी हैं। उनकी सेहत भी ठीक नहीं। 16 अप्रैल को मनीष रंजन को जमानत दिए जाने की खबर सुनकर वह बेहोश हो गईं। परिजनों ने उन्हें PMCH में एडमिट कराया। डॉक्टरों ने जांच की तो पता चला कि ब्लड प्रेशर हाई है। हेल्थ से जुड़ी दूसरी परेशानियां भी हैं। उन्हें ICU में रखना पड़ा। 17 अप्रैल की सुबह छुट्टी दी गई। इसके बाद परिजन उन्हें दिमागी इलाज के लिए एक निजी क्लिनिक में ले गए। न्याय दिलाने की बातें कहने वाले खामोश हुए नीट छात्रा रेप-मर्डर केस सामने आने के बाद पटना में जमकर विरोध प्रदर्शन हुए। सड़क पर लोग उतरे। न्याय दिलाने की मांग की गई, लेकिन अब वे शांत नजर आ रहे हैं। इनमें प्रमुख हैं.. पप्पू यादव: सांसद पप्पू यादव ने छात्रा के परिजनों को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। एक नर्स के साथ बातचीत का ऑडियो जारी कर बड़े-बड़े दावे किए। इलाज करने वाले डॉक्टर्स पर गंभीर आरोप लगाए। सड़क पर उतरे। दिल्ली के जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी की। इस बीच पुलिस ने दूसरे केस में गिरफ्तार कर लिया। जेल से बाहर आने के बाद शांत हो गए। NGO और छात्र संगठनों के लोग: छात्रा की मौत के बाद उसे न्याय दिलाने के लिए कई NGO और छात्र संगठनों के लोग सड़कों पर उतरे। धरना-प्रदर्शन किया। नारे लगाए। लेकिन वक्त बीतने के साथ वे भी शांत पड़ते दिख रहे हैं। समाज के लोग: छात्रा के साथ जब ये घटना हुई तो सोशल मीडिया पर मानो गुस्से का उबाल सा आ गया। पूरे मामले को जातीय चश्मे से देखा जाने लगा। बेटी की जाति के लोग उग्र हुए सरकार को पूरी तरह घेरने लगे। लेकिन अब पता नहीं क्या हुआ कि वो भी शांत बैठ गए। सोशल मीडिया पर युद्ध भी कमजोर हो गया।