NEET छात्रा रेप–मौत केस के 100 दिन:अफसोस बेटी..! बिहार पुलिस–CBI तुम्हें न्याय नहीं दिला पाई, आवाज उठाने वाले भी चुप; जांच पर 6 सवाल

‘ऐसा लगता है कि CBI ने आदेश के बावजूद जानबूझकर चार्जशीट फाइल नहीं की। 10 अप्रैल को समय सीमा के अंदर जांच पूरी करने या स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया था, जिसका पालन नहीं हुआ। यह कोर्ट के आदेश का खुला उल्लंघन है।’ कोर्ट ने यह टिप्पणी NEET छात्रा मामले में करते हुए आरोपी मनीष रंजन को जमानत दे दी। जमानत की खबर मिलते ही छात्रा की मां की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें PMCH में भर्ती कराया गया। यह हाल है देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी CBI और बिहार पुलिस का…। उस सरकार का जो जंगलराज का खौफ दिखाकर 20 साल से सत्ता में बनी हुई है। आंखों में डॉक्टर बनने का सपना लेकर जहानाबाद से पटना आई NEET स्टूडेंट को मरे 100 दिन हो गए। उसकी पोस्टमॉर्टम और FSL रिपोर्ट चीख-चीखकर बोल रही है कि ये क्रूर रेप और मर्डर है। पूरी बॉडी पर चोटें, प्राइवेट पार्ट्स पर गंभीर इंजरी, फटे कपड़े, खून के छींटे, अंडरगारमेंट पर 18-21 साल के दरिंदे का स्पर्म… मिला। पर बिहार पुलिस अपनी ही थ्योरी पर अड़ी रही। पहले दिन से सुसाइड का ढोंग रचा। स्लीपिंग पिल्स और टाइफाइड का बहाना बनाया। परिवार को धमकाया। सुसाइड मानने को मजबूर किया। पुलिस और SIT 20 दिन तक सबूत मिटाती और छिपाती रही। CCTV गायब कर दिए। कपड़े देर से FSL को भेजे। परिवार ने DGP से रो-रोकर न्याय मांगा तो सुसाइड मानने की सलाह और धमकी दी गई। परिजन चीख-चीखकर बोल रहे हैं कि पुलिस ‘सुसाइड एंगल’ मान लेने का दबाव बना रही है। अगर यह आरोप सच हैं, तो ये सिर्फ लापरवाही नहीं… जांच की दिशा मोड़ने की कोशिश है। सवाल सीधा है- पुलिस का काम सच ढूंढना है या थ्योरी तय करके उसे साबित करना? अब तो हद ही हो गई है। सारे सबूत मिटाने के बाद मामले को CBI को ट्रांसफर कर दिया गया और CBI जांच की तो पूछिए ही मत। वह तारीख दर तारीख कोर्ट में डांट खाती रही, लेकिन मजाल की कोई ठीक से जांच कर दे। CBI ने जांच में क्या-क्या ग्राफिक के जरिए समझिए… दरअसल, लोग भूल गए थे कि बिहार में CBI ने क्या कमाल किया है? याद तो है ना… नवरुणा हत्याकांड: मुजफ्फरपुर में 14 वर्षीय लड़की का अपहरण-हत्या। CBI ने केस 2014 में टेक ओवर किया। कुछ गिरफ्तारियां कीं। 6 साल जांच के बाद 2020 में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। सबूत न मिलने का हवाला दिया। किसी को कोई सजा नहीं मिली। यानी नवरुणा को किसी ने नहीं मारा। ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांडः 2012 में ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या गोली मारकर कर दी गई। पुलिस ने जांच की। फिर मामला CBI को ट्रांसफर कर दिया गया। जांच लंबी खिंची। 2023 में पूर्व MLC हुलास पांडे सहित अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई, लेकिन बुलेट्स और खोखा में मिसमैच है। अभी मामला पेंडिंग ही चल रहा है। शिल्पी-गौतम मर्डरः शिल्पी जैन और गौतम सिंह के नग्न शव गैरेज में खड़ी कार में मिले। पोस्टमॉर्टम में जहर, मल्टीपल रेप के संकेत मिले। कपड़े पर कई लोगों के स्पर्म मिले। NEET छात्रा केस की तरह पुलिस ने पहले सुसाइड की थ्योरी रची, फिर सेक्स के दौरान दम घुटने से मौत बताया। अंत में मामला CBI ने 1999 में टेकओवर किया, लेकिन 2003 में डबल सुसाइड बताकर क्लोज कर दिया गया। मंत्री ने मानी हत्या, पुलिस ने क्यों नहीं? तत्कालीन गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने 31 जनवरी को X पर पोस्ट लिखकर कहा था- ‘NEET स्टूडेंट की हत्या मामले को CBI को ट्रांसफर कर दिया गया है।’ वहीं, पुलिस सुसाइड मानने की बातें कह रही है। मामले की जांच के लिए IG जितेंद्र राणा की निगरानी में SIT बनी। मतलब IG लेवल के अफसर भी फेल हो गए हैं। ये सिर्फ एक केस नहीं है। यह बिहार के हर उस मां-बाप का डर है जो अपने बच्चे को पढ़ने के लिए घर से दूर भेजते हैं। उन्हें कानून पर भरोसा चाहिए… कहानी नहीं। जांच चाहिए… बहाना नहीं। न्याय चाहिए…सिस्टम की ढाल नहीं।
अब निगाहें CBI पर हैं, लेकिन उससे भी बड़ा सवाल है- क्या न्याय सबूतों से तय होगा… या सिस्टम की सुविधा से? भास्कर के CBI और सरकार से 6 सवाल… बेटी को न्याय दिलाने की पुकार लगाते-लगाते मां ने खो दिया मानसिक संतुलन छात्रा की मां बेटी को न्याय दिलाने की पुकार लगाते-लगाते अपना मानसिक संतुलन खो चुकी हैं। उनकी सेहत भी ठीक नहीं। 16 अप्रैल को मनीष रंजन को जमानत दिए जाने की खबर सुनकर वह बेहोश हो गईं। परिजनों ने उन्हें PMCH में एडमिट कराया। डॉक्टरों ने जांच की तो पता चला कि ब्लड प्रेशर हाई है। हेल्थ से जुड़ी दूसरी परेशानियां भी हैं। उन्हें ICU में रखना पड़ा। 17 अप्रैल की सुबह छुट्टी दी गई। इसके बाद परिजन उन्हें दिमागी इलाज के लिए एक निजी क्लिनिक में ले गए। न्याय दिलाने की बातें कहने वाले खामोश हुए नीट छात्रा रेप-मर्डर केस सामने आने के बाद पटना में जमकर विरोध प्रदर्शन हुए। सड़क पर लोग उतरे। न्याय दिलाने की मांग की गई, लेकिन अब वे शांत नजर आ रहे हैं। इनमें प्रमुख हैं.. पप्पू यादव: सांसद पप्पू यादव ने छात्रा के परिजनों को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। एक नर्स के साथ बातचीत का ऑडियो जारी कर बड़े-बड़े दावे किए। इलाज करने वाले डॉक्टर्स पर गंभीर आरोप लगाए। सड़क पर उतरे। दिल्ली के जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी की। इस बीच पुलिस ने दूसरे केस में गिरफ्तार कर लिया। जेल से बाहर आने के बाद शांत हो गए। NGO और छात्र संगठनों के लोग: छात्रा की मौत के बाद उसे न्याय दिलाने के लिए कई NGO और छात्र संगठनों के लोग सड़कों पर उतरे। धरना-प्रदर्शन किया। नारे लगाए। लेकिन वक्त बीतने के साथ वे भी शांत पड़ते दिख रहे हैं। समाज के लोग: छात्रा के साथ जब ये घटना हुई तो सोशल मीडिया पर मानो गुस्से का उबाल सा आ गया। पूरे मामले को जातीय चश्मे से देखा जाने लगा। बेटी की जाति के लोग उग्र हुए सरकार को पूरी तरह घेरने लगे। लेकिन अब पता नहीं क्या हुआ कि वो भी शांत बैठ गए। सोशल मीडिया पर युद्ध भी कमजोर हो गया।

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