क्या पत्नी-बेटियों को सांसद बनाने के लिए परेशान हैं नेता:महिला रिजर्वेशन से आम महिलाओं को कितना फायदा, बिल 3 साल पहले पास तो फिर हंगामा क्यों

लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान (131 वां संशोधन) बिल पास नहीं हो सका। बिल में लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने और महिलाओं को 33% आरक्षण देने का प्रस्ताव था। बिल के पास नहीं होने पर भाजपा विपक्ष को घेरने में जुट गई है। प्रधानमंत्री से लेकर भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री तक कांग्रेस और RJD पर महिलाओं का हक हड़पने का आरोप लगा रहे हैं। क्या बिल पास नहीं होने से महिलाओं को रिजर्वेशन नहीं मिलेगा? सरकार के पास क्या ऑप्शन हैं? बिल पास होने से आम बिहारी महिलाओं को कितना फायदा होता? जानेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। सवाल-1ः सरकार के 3 बिल लोकसभा में पास क्यों नहीं हो सके? जवाब: महिला आरक्षण कानून को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू करने के लिए केंद्र सरकार 3 काम करना चाहती थी।
1- लोकसभा सीटें बढ़ाकर 850 करना
2-देश का नया चुनावी नक्शा खींचना, यानी परिसीमन
3- महिला आरक्षण कानून को असल में लागू करना इसके लिए सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर महिला आरक्षण और परिसीमन लागू करने के लिए लोकसभा में 3 बिल लाई… परिसीमन और केंद्र शासित कानून (संशोधन) विधेयक सामान्य बहुमत से पास होने वाले बिल थे, यानी इसके लिए वोटिंग करने वाले सांसदों का आधे से एक ज्यादा समर्थन चाहिए था। सवाल-2ः लोकसभा में बिल गिर गया तो क्या अब महिला रिजर्वेशन नहीं मिलेगा? जवाबः ऐसा बिल्कुल नहीं है। महिला रिजर्वेशन बिल 2023 में ही पारित हो चुका है। वह जरूर लागू होगा, लेकिन 2029 में नहीं, 2034 लोकसभा चुनाव में। इसे ऐसे समझिए… सवाल-3ः बिल गिर गया, अब सरकार के पास क्या विकल्प हैं? जवाब: सरकार के पास अभी भी 3 ऑप्शन हैं… सरकार बिल में कुछ बदलाव कर सकती है। जैसे- दक्षिणी राज्यों की सीटों की हिस्सेदारी बढ़ाने या फ्रीज रखने का प्रावधान, 2011 की बजाय 2027 की जनगणना का आधार। इसके बाद नए सिरे से बिल पेश कर सकती है। सरकार विपक्ष के साथ आम सहमति बना सकती है। उसके कहे बदलावों को शामिल कर सकती है। इसके बाद विपक्ष के समर्थन से बिल पास करा सकती है। सरकार सामान्य तरीके से 2027 की जनगणना पूरी होने के बाद परिसीमन करवा सकती है। फिर इसी परिसीमन के हिसाब से महिला आरक्षण लागू कर सकती है। सवाल-4ः अगर बिल पास हो जाता तो लोकसभा और बिहार में क्या बदल जाता? जवाबः 16 अप्रैल को लोकसभा में चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था, ‘मान लीजिए 100 सीटें हैं और 33% महिलाओं के लिए आरक्षण देना है। यदि कुल सीटों में 50% वृद्धि कर दी जाए, तो यह 150 हो जाती हैं। और जब 150 का 33% आरक्षण लागू होता है, तो यह लगभग 100 सीटों के बराबर हो जाता है।’ ‘अभी लोकसभा में 543 सदस्य हैं। परिसीमन के बाद सीटों में 50% वृद्धि की जाएगी और कुल संख्या 816 हो जाएगी। इसमें से 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। 850 एक राउंड फिगर है, वास्तविक संख्या 816 होगी।’ शाह के बयानों का मतलब था कि मोदी सरकार मौजूदा सीटों में 50% बढ़ोत्तरी का फॉर्मूला लागू कर रही थी। इस तरह… सवाल-5ः महिला रिजर्वेशन लागू होगा तो आम बिहारी महिलाओं को कितना फायदा होगा? जवाबः पक्के तौर पर कुछ कहा नहीं जा सकता। लेकिन पिछले ट्रेंड को देखने से लगता है कि इस बिल से आम महिलाओं से ज्यादा नेताओं की पत्नी और बेटियों-बहुओं को ज्यादा फायदा होगा। इसे ऐसे समझिए… बिहार की 40 लोकसभा सांसदों में से 5 महिला सांसद हैं। पांचों नेताओं की बेटी-पत्नी हैं। पूर्व सांसद आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद, लालू यादव की बेटी मीसा भारती, अशोक चौधरी की बेटी शांभवी चौधरी, पूर्व विधायक रमेश सिंह कुशवाहा की पत्नी विजय लक्ष्मी कुशवाहा, MLC दिनेश सिंह की पत्नी वीणा देवी। बिहार के 243 विधायकों में से 29 महिलाएं हैं। इसमें से 20 से ज्यादा का संबंध राजनीतिक घराने से है।

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