अंबाला में नेशनल हाईवे-44 और रिंग रोड के जंक्शन पर दो संदिग्ध कैमरे मिलने से सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। इन कैमरों का खुलासा तब हुआ, जब थाना सेक्टर-9 के एएसआई रविश कुमार गांव देवी नगर के पास एक पुराने हादसे की जांच कर रहे थे। उन्होंने नेशनल हाईवे-152 के ओवरब्रिज पर ये कैमरे देखे। बता दें कि सैन्य सुरक्षा के हिसाब से अंबाला बेहद ही संवेदनशील क्षेत्र है। इनसे जासूसी का शक है। एएसआई रविश कुमार ने जब इन कैमरों के बारे में संबंधित विभागों से पूछताछ की, तो किसी ने भी इनकी जिम्मेदारी नहीं ली। सैनी माजरा टोल प्लाजा के मैनेजर, ट्रैफिक थाना मोहड़ा के एसएचओ और एनएचएआई अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ये कैमरे उनके द्वारा नहीं लगाए गए हैं। रिंग रोड का काम कर रही निर्माण कंपनी और पुलिस विभाग की तकनीकी शाखाओं (SIS, कंप्यूटर ब्रांच) ने भी इनसे संबंध होने से इनकार कर दिया। लकड़ी के तख्ते के सहारे चल रहा था कई हफ्तों की छानबीन के बाद भी जब कैमरों का कोई मालिक नहीं मिला, तो उच्चाधिकारियों के निर्देश पर इन्हें उतारकर थाने में सुरक्षित रख लिया गया। इन हाई-टेक कैमरों की जांच में सामने आया कि एक कैमरा लकड़ी के तख्ते और सोलर प्लेट के सहारे चल रहा था, जिसमें वीआई (VI) कंपनी का एक सिम कार्ड भी लगा था। देश की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कैमरों के लावारिस और संदिग्ध पाए जाने के बाद एएसआई रविश कुमार ने आशंका जताई है कि इन उपकरणों का उपयोग देश की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने या महत्वपूर्ण जानकारी जुटाने के लिए किया जा रहा था। यह कार्य किसी खुफिया एजेंसी या देशद्रोही तत्वों द्वारा किया जा सकता है। किसी भी विभाग ने नहीं ली जिम्मेदारी – ASI रविश कुमार ने इन कैमरों के मालिक का पता लगाने के लिए कई विभागों के दरवाजे खटखटाए। – टोल मैनेजर विनोद कुमार ने साफ किया कि उनके कैमरे सिर्फ टोल प्लाजा तक सीमित हैं। – ट्रैफिक थाना मोहड़ा के SHO जोगिंद्र सिंह ने पुष्टि की कि हाईवे पर पुलिस का कोई कैमरा नहीं लगा है। – नेशनल हाईवे अथॉरिटी के अधिकारी ललित कुमार ने भी इन कैमरों को अपना होने से इनकार कर दिया। – रिंग रोड प्रोजेक्ट पर काम कर रहे अधिकारियों (SPM तेजेन्द्र पाण्डे) ने भी कैमरों की जानकारी होने से मना कर दिया। मामले की जांच में जुटी पुलिस इसी आधार पर थाना सदर अंबाला में 16 अप्रैल 2026 को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 और 61 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस प्रशासन और साइबर टीम अब इस बात की गहन जांच कर रही है कि सिम कार्ड किसके नाम पर है और इन कैमरों के जरिए डेटा कहां भेजा जा रहा था।