पंजाब की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर सामने आया है। अकाली दल के वरिष्ठ नेता सुरजीत सिंह रखड़ा ने आज आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया। बताया जा रहा है कि सीएम भगवंत मान ने उन्हें पार्टी में शामिल करवाया। इससे पहले जालंधर-फगवाड़ा हाईवे पर स्थित एक निजी होटल में आज हुई ‘शिरोमणि अकाली दल पुनर सुरजीत’ की बैठक में रखड़ा को प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया था। उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे थे। बैठक में अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह और बीबी जगीर कौर जैसे दिग्गज नेता भी शामिल हुए। बैठक के दौरान बेअदबी कानून, 2027 के चुनाव और पंजाब की सुरक्षा व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा की गई। बेअदबी कानून पर टकराव टालने की सलाह
बैठक के दौरान बेअदबी कानून को लेकर चल रहे विवाद पर पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने कानून लागू करने से पहले शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) को प्रस्ताव भेजा था और अब विरोध हो रहा है, तो यह निंदनीय है। उनका मानना है कि सरकार और धार्मिक जत्थेबंदियों को आमने-सामने आने के बजाय बातचीत का रास्ता चुनना चाहिए। पूर्व जत्थेदार ने सुझाव दिया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के मामले में एसजीपीसी, अकाल तख्त के दिग्गज और कानून विशेषज्ञों को एक साथ बैठकर समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसे संवाद के जरिए हल न किया जा सके। टकराव की स्थिति पंथ और पंजाब दोनों के लिए ठीक नहीं है। 2027 के चुनाव और SIR पर चिंता
आगामी 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों को लेकर भी बैठक में मंथन हुआ। पूर्व जत्थेदार ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए ‘SIR’ (वोटर लिस्ट में बदलाव/समीक्षा) को लेकर आशंका जताई। उन्होंने कहा कि यदि जायज वोट काटे जाते हैं, तो जनता को सचेत रहने की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध वोटों को हटाना सही है, लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए किसी का लोकतांत्रिक अधिकार छीनना गलत है। दबाव की राजनीति की निंदा
ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने नेताओं को ‘डंडे के जोर’ पर अपनी पार्टी में शामिल करने की प्रथा की जमकर निंदा की। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए एक खतरनाक संकेत बताया। चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वे सिद्धांतों के आधार पर चुनाव लड़ेंगे और यदि कोई पार्टी उनके सिद्धांतों से सहमत होती है, तो वे समर्थन पर विचार कर सकते हैं। उन्होंने पंथक एकजुटता पर जोर देते हुए बताया कि अमृतपाल सिंह की पार्टी सहित अन्य दलों के साथ उनकी बातचीत चल रही है। साथ ही, पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्य में हो रहे बम धमाकों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार को घेरा।