बिहार में पहली बार अपना CM बनाने के बाद अब भाजपा संगठन से लेकर सरकार तक में बड़े बदलाव करने की तैयारी कर रही है। मई के पहले से दूसरे सप्ताह के भीतर सरकार और संगठन दोनों में नई घोषणाएं संभव हैं। CM सम्राट चौधरी अपनी पहली कैबिनेट का विस्तार करेंगे। वहीं, प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी 5 महीने बाद संगठन विस्तार कर सकते हैं। भास्कर की खास रिपोर्ट में समझिए क्या है भाजपा के भविष्य की प्लानिंग… बीजेपी ने बिहार में तैयार की अपनी नई त्रिमूर्ति बीजेपी के बारे में बोला जाता है कि वो कभी भी किसी एक नेता को पावरफुल नहीं बनाती है। पार्टी एक साथ कई लीडरशिप तैयार कर रही होती है। बिहार में भाजपा के शुरुआती समय को देखें तो कैलाशपति मिश्र को राज्य में BJP का भिष्म पितामह कहा जाता है। उन्होंने 1980 से 95 तक पार्टी को घर-घर तक पहुंचाया। उन्हें गंगा प्रसाद चौरसिया और सीपी ठाकुर समेत अलग-अलग नेताओं का सपोर्ट मिला। साल 2000 के बाद पार्टी राज्य में नए नेता को लेकर आई। नाम था सुशील कुमार मोदी। उनके नेतृत्व में पार्टी सरकार का हिस्सा बनी। इनके साथ अश्विनी कुमार चौबे और प्रेम कुमार जैसे नेताओं को भी पार्टी ने आगे बढ़ाया। अब जब बिहार में BJP सत्ता के शिखर पर है तो तीन युवा नेताओं के हाथ में पार्टी के विस्तार की कमान दी है। नितिन नवीन राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। बिहार के साथ देश भर में पार्टी के विस्तार की जवाबदेही निभा रहे हैं। सम्राट चौधरी CM और संजय सरावगी प्रदेश अध्यक्ष हैं। टास्क समझिए, 16 जिलों में पार्टी कमजोर, MLA 0 या 1 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने प्लानिंग की थी कि हर जिलें में कम से कम एक विधायक हों। नतीजे आए तो 8 ऐसे जिले मिले जहां बीजेपी के एक भी विधायक नहीं हैं। 8 ऐसे जिले हैं, जहां बीजेपी के मात्र 1 विधायक हैं। गठबंधन की सियासत के कारण बीजेपी अभी तक पूरे बिहार की पार्टी नहीं बन पाई है। कई ऐसे जिले हैं, जहां बीजेपी संगठन के तौर पर बहुत मजबूत है, लेकिन सीटें गठबंधन के लिए छोड़नी पड़ जाती हैं, जबकि कई जिले ऐसे हैं जहां चुनाव नहीं लड़ने के कारण पार्टी संगठन नहीं खड़ा कर पा रही है। हालात ये हैं कि विश्व की सबसे बड़ी पार्टी का दावा करने वाली बीजेपी राज्य की सभी विधानसभा सीटों पर अपने दम पर कैंडिडेट उतारने की स्थिति में नहीं है। अब इस तिकड़ी पर पार्टी की समस्या के समाधान की जिम्मेदारी होगी। अब दो पॉइंट में सरकार और संगठन के समीकरण को समझिए 1- सम्राट कैबिनेट में BJP कोटे से 30% चेहरे बदल सकते हैं पांच राज्यों के चुनाव परिणाम के बाद बिहार कैबिनेट में विस्तार होगा। सूत्रों की मानें तो BJP कोटे के मंत्रियों में 30% चेहरे बदल सकते हैं। पार्टी की तरफ से नवंबर में सरकार गठन के दौरान नए चेहरे को मौका दे दिया गया था। सूत्रों की मानें तो BJP के मौजूदा मंत्रियों की लिस्ट में 3-4 चेहरे को बदलकर नए चेहरे को मौका मिल सकता है। इसमें सम्राट चौधरी CM तो नितिन नवीन राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं तो उनका कोटा खाली है। इनके अलावा दो-तीन नन परफॉर्मिंग नेताओं को रिप्लेस किया जा सकता है। अगर BJP कोटे के मौजूदा मंत्रियों की लिस्ट देखें तो इनकी औसत आयु 53 साल है। लखेंद्र पासवान, श्रेयसी सिंह, संजय टाइगर और रमा निषाद जैसी युवा और नए चेहरे को पार्टी पहले ही कैबिनेट में शामिल कर चुकी हैं। महामंत्री से प्रदेश उपाध्यक्ष तक बदले जाएंगे भाजपा संगठन में बड़े बदलाव करने की तैयारी में है। प्रदेश अध्यक्ष के बाद सबसे महत्वपूर्ण पद महामंत्री का होता है। अभी चार महामंत्री (राधामोहन शर्मा, राजेश वर्मा, लाजवंती झा और शिवेश कुमार) हैं। शिवेश राज्यसभा सदस्य बने हैं। पार्टी इन्हें बदलने की तैयारी में है। इनकी जगह पूरी तरह नए चेहरे को मौका मिल सकता है। प्रदेश उपाध्यक्ष पद से भी 6-7 पुराने चेहरों की छुट्टी तय मानी जा रही है। इनमें राज्यसभा सांसद धर्मशीला गुप्ता और विधायक संजय गुप्ता जैसे नाम शामिल हैं। वहीं, 2-3 उपाध्यक्ष को प्रमोशन मिल सकता है। 11 महीने पहले जब दिलीप जायसवाल ने बतौर प्रदेश अध्यक्ष संगठन का विस्तार किया था तब उन्होंने 40 फीसदी नए चेहरों को मौका दिया था। 60 फीसदी पुराने नेताओं को रिपीट किया गया था। अब संजय सरावगी की टीम में 60 फीसदी से ज्यादा नए चेहरों के एंट्री की तैयारी चल रही है। सूत्रों की मानें तो नए संगठन विस्तार में तीन बातों का ध्यान रखा जाएगा युवा, महिला और फील्ड में एक्टिव। इसके साथ ही पिछड़े वर्ग की हिस्सेदारी संगठन में भी बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल बीजेपी के प्रदेश कार्यसमिति में 35 लोगों की टीम है। इनमें 15 सवर्ण, 9 EBC, 7 0BC और 4 दलित हैं।