इंडस्ट्रियल प्लॉट होल्डर्स को स्टाम्प ड्यूटी में राहत, 30 तक वन टाइम छूट का मौका

पंजाब सरकार ने प्लॉट होल्डर्स को बड़ी राहत देते हुए स्टांप ड्यूटी में छूट देने का अहम फैसला लागू किया है। स्टाम्प एंड रजिस्ट्रेशन शाखा की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक यह एकमुश्त (वन-टाइम) योजना है, जिसके तहत चयनित मामलों में ड्यूटी में रिमिशन दी जाएगी। फैसले का सीधा लाभ उन प्लॉट मालिकों को मिलेगा जो उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की पॉलिसी के तहत अपने प्लॉट का कन्वर्ज़न कराना चाहते हैं। यानी इंडस्ट्रियल, कमर्शियल या अन्य श्रेणियों में उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया कम लागत व सरल शर्तों के साथ पूरी की जा सकेगी। सरकार के इस कदम से राज्य में लंबे समय से लंबित कन्वर्ज़न मामलों को गति मिलने की उम्मीद है। अनुमान है कि इससे एक हजार से अधिक प्लॉट होल्डर्स व सैकड़ों छोटे-बड़े उद्योगपतियों को सीधा लाभ होगा।आदेश भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 की धारा 9 के तहत जारी किया गया है। इसे राज्यपाल की मंजूरी भी प्राप्त हो चुकी है, जिससे यह पूरी तरह लागू और कानूनी रूप से प्रभावी हो गया है। यह छूट सीमित अवधि और विशेष श्रेणी के मामलों तक ही लागू रहेगी, ताकि नीति में पारदर्शिता और नियंत्रण बना रहे। वो सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी Q. किन दस्तावेज़ों पर मिलेगी छूट… राहत का दायरा तीन प्रमुख दस्तावेज़ों तक सीमित रखा गया है लीज डीड, कन्वेयंस डीड और सेल डीड। संपत्ति के स्वामित्व और उपयोग परिवर्तन के लिए ये दस्तावेज़ अनिवार्य होते हैं। इन पर ड्यूटी में छूट मिलने से कन्वर्ज़न प्रक्रिया की कुल लागत घटेगी और आवेदकों को आर्थिक राहत मिलेगी। Q. क्या आवेदन के लिए कोई डेडलाइन है सरकार ने स्पष्ट समयसीमा तय की है। इच्छुक आवेदकों को 30 अप्रैल 2026 तक आवेदन करना होगा। यह डेडलाइन निर्णायक है, क्योंकि इसके बाद योजना स्वतः समाप्त हो जाएगी। Q. क्या कोई शर्तें भी हैं जी, छूट के साथ सख्त शर्तें भी जोड़ी गई हैं। कन्वर्ज़न लेटर जारी होने के बाद प्लॉट धारक को छह महीने के भीतर संबंधित डीड चाहे लीज, कन्वेयंस या सेल को निष्पादित (एक्जीक्यूट) कर पंजीकृत कराना अनिवार्य होगा। तय अवधि में प्रक्रिया पूरी न होने पर छूट का लाभ स्वतः समाप्त हो जाएगा। Q. इस फैसले के पीछे कारण क्या है इस फैसले के पीछे सरकार की बहुस्तरीय रणनीति नजर आती है। एक ओर जहां वर्षों से अटके कन्वर्ज़न मामलों को निपटाने की कोशिश है, वहीं दूसरी ओर उद्योग और निवेश को प्रोत्साहन देने का भी प्रयास है। आसान और कम लागत वाली प्रक्रिया निवेशकों का भरोसा बढ़ा सकती है, जिससे औद्योगिक विकास को नई दिशा मिल सकती है।

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