ऋषिकेश से रवाना हुआ हेमकुंड साहिब यात्रा का पहला जत्था:23 मई को खुलेंगे कपाट, पंच प्यारों के साथ 19 KM का ट्रैक करेंगे श्रद्धालु

सिखों के पवित्र धाम श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा बुधवार से शुरू हो गई। ऋषिकेश स्थित गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब से पहला जत्था पंच प्यारों की अगुवाई में रवाना हुआ। दिल्ली के उप राज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने श्रद्धालुओं को रवाना किया। संगत ने ‘जो बोले सो निहाल’ के जयकारों के बीच यात्रा शुरू की। इस बार हेमकुंड साहिब के कपाट 23 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। यानी पहला जत्था तीन दिन की यात्रा के बाद धाम तक पहुंचेगा। यात्रा के दौरान संगत सड़क मार्ग से गोविंदघाट पहुंचेगी और वहां से घांघरिया होते हुए करीब 19 किलोमीटर की कठिन पैदल चढ़ाई पूरी कर हेमकुंड साहिब पहुंचेगी। कार्यक्रम में पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भी शामिल होना था, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी के अंतिम संस्कार के कारण वे कार्यक्रम में नहीं पहुंच सके। यात्रा शुरू होने के साथ ही उत्तराखंड में सिख श्रद्धालुओं की आवाजाही भी तेज हो गई है। 3 तस्वीरें… ऋषिकेश से गोविंदघाट, फिर पैदल शुरू होता है सफर हेमकुंड साहिब यात्रा सीधे धाम तक नहीं होती। श्रद्धालु पहले ऋषिकेश और हरिद्वार से सड़क मार्ग के जरिए चमोली जिले के गोविंदघाट पहुंचते हैं। इसके बाद यहां से घांघरिया तक करीब 13 किलोमीटर का ट्रेक किया जाता है। घांघरिया से हेमकुंड साहिब तक करीब 6 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई है, जिसे श्रद्धालु पैदल, घोड़े या पिट्ठू की मदद से पूरा करते हैं। पहला जत्था भी इसी पारंपरिक मार्ग से धाम तक पहुंचेगा। पंच प्यारों की अगुवाई में संगत धीरे-धीरे पड़ावों से गुजरते हुए 23 मई तक हेमकुंड साहिब पहुंचेगी, जहां अरदास और शबद कीर्तन के बाद कपाट खोले जाएंगे। सेना ने हटाई बर्फ, रास्ता किया तैयार यात्रा शुरू होने से पहले भारतीय सेना और प्रशासन की टीमों ने ऊंचाई वाले इलाकों में जमी बर्फ हटाने का काम पूरा किया। हेमकुंड साहिब करीब 4,300 मीटर से ज्यादा ऊंचाई पर स्थित है, जहां मई महीने में भी कई जगहों पर बर्फ जमी रहती है। प्रशासन के मुताबिक यात्रा मार्ग पर सुरक्षा, स्वास्थ्य जांच, ठहरने और आपदा प्रबंधन के इंतजाम किए गए हैं। ऑक्सीजन की कमी और ठंड को देखते हुए मेडिकल टीमें भी तैनात की गई हैं। श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य जांच के बाद ही आगे जाने की अनुमति दी जा रही है। हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं धाम हेमकुंड साहिब यात्रा के लिए हर साल देश और विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं। पिछले सीजन में करीब 2.7 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे। यह संख्या पिछले वर्षों के मुकाबले काफी ज्यादा रही थी। हालांकि ऊंचाई और कठिन ट्रेक के कारण यह यात्रा चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। ऑक्सीजन की कमी, मौसम में अचानक बदलाव और बर्फबारी यहां सबसे बड़ी चुनौती रहती है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं में यात्रा को लेकर खास उत्साह बना रहता है। श्रद्धालुओं से अनुशासन और सावधानी की अपील उप राज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने उत्तराखंड पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए सुरक्षित और अनुशासित यात्रा की अपील की। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु मौसम और स्वास्थ्य संबंधी निर्देशों का पालन करें। गुरुद्वारा प्रबंधन समिति ने भी श्रद्धालुओं से तय मार्ग पर ही चलने और शॉर्टकट से बचने को कहा है। पिछले वर्षों में खराब मौसम और फिसलन के कारण कई हादसे सामने आ चुके हैं। —————— ये खबर भी पढ़ें…. बद्रीनाथ से लौट रहे हेलिकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग:टिहरी में हवा में डगमगाया, महिला पायलट ने नीचे उतारा तो बिजली के तार से टकराया बद्रीनाथ धाम से देहरादून लौट रहे श्रद्धालुओं के हेलिकॉप्टर की बुधवार को टिहरी गढ़वाल में तकनीकी खराबी के कारण इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। उड़ान के दौरान हेलिकॉप्टर अनबैलेंस होने लगा था, जिसके बाद महिला पायलट ने खेत में उतारने का फैसला लिया था। (पढ़ें पूरी खबर)

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