खट्टर ने फिर दी हुड्‌डा को सियासी संन्यास की सलाह:करनाल में बोले-भूपेंद्र की उम्र में मैं ले लूंगा; पूर्व सीएम कह चुके-मनोहर खुद लें

करनाल सांसद एवं केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्‌टर ने एक बार फिर पूर्व सीएम एवं कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा को संन्यास लेने की सलाह दी है। खट्टर रविवार को करनाल में थे। इस दौरान कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए खट्टर ने कहा-भूपेंद्र हुड्डा जिस उम्र में आज हैं, उस उम्र में पहुंचकर मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगा, क्योंकि हुड्डा उम्र में मेरे से बड़े हैं। उल्लेखनीय है कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा 78 साल के हैं, जबकि खट्टर 72 साल के हैं। इस बार केंद्रीय मंत्री का काफिला भी चर्चा का विषय बना। आमतौर पर 6 से 7 गाड़ियों के साथ चलने वाले खट्टर के काफिले में सिर्फ 3 गाड़ियां रहीं। उन्होंने करनाल मेयर रेणु बाला गुप्ता के घर जाकर उनकी जेठानी के निधन पर शोक जताया। बाद में पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान में शामिल हुए। जनसंपर्क ही सबसे बड़ी ताकत मीडिया से बातचीत में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि संगठन की मजबूती कार्यकर्ताओं के निरंतर प्रशिक्षण और जनता के बीच सक्रिय संवाद से आती है। चुनाव के समय कार्यकर्ता ही सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने का सबसे बड़ा माध्यम बनते हैं। जनसंपर्क ही सबसे पड़ी ताकत है।
दोषियों को नहीं बख्शा जाएगा NEET विवाद पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऐसी घटनाएं बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने विद्यार्थियों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि इस घिनौने खेल में शामिल किसी भी व्यक्ति को छोड़ा नहीं जाएगा। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। जनसंख्या अभिशाप नहीं, भारत की सबसे बड़ी पूंजी जनसंख्या को लेकर पूछे गए सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की जनसंख्या देश की ताकत है, कमजोरी नहीं। पहले की सरकारों के समय जनसंख्या को अभिशाप कहा जाता था, लेकिन आज यही युवा शक्ति भारत के विकास की सबसे बड़ी ऊर्जा बन रही है। वर्क फ्रॉम होम से बचेगा ईंधन देशहित में जरूरी कदम मनोहर लाल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण गैस और पेट्रोलियम पदार्थों के आयात पर असर पड़ा है, जिससे कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। जहां संभव हो वहां “वर्क फ्रॉम होम” अपनाना समझदारी और जिम्मेदारी दोनों हैं। कोविड काल में देश ने तकनीक की ताकत को महसूस किया और वर्चुअल कार्य प्रणाली को सफलतापूर्वक अपनाया। जो काम ऑन साइट जरूरी हैं, उन्हें बाहर जाकर ही करना होगा।

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