पंजाब में ग्रंथी से खालिस्तानी बनकर देश के खिलाफ विदेश में बैठकर आतंकी साजिश रचने वाले बिक्रमजीत सिंह उर्फ बिक्कर पंजवड को अभी जेल में रहना पड़ेगा। उसे 2019 बम धमाके के मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने उसे जमानत देने से साफ मना कर दिया है। अदालत ने यूएपीए और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धाराओं को देखते हुए उसे जमानत का हकदार नहीं माना। अदालत का कहना है कि आरोपी आतंकी गिरोह का मुख्या साजिशकर्ता है। अदालत ने आरोपी को ‘फ्लाइट रिस्क’ करार दिया। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि वह पहले गिरफ्तारी से बचने के लिए भारत से भाग गया था और उसे 8 दिसंबर 2022 को बड़ी मुश्किल से ऑस्ट्रिया से प्रत्यर्पित कर वापस लाया गया। वहीं, अदालत ने माना कि यदि आरोपी को जमानत दी जाती है, तो “पूरी संभावना है कि उसे मुकदमे में शामिल होने के लिए पेश करना बहुत मुश्किल होगा।” ट्रायल में तेजी लाने के आदेश दिए गए हैं। वह 2022 से जेल में है। आरोपी पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ भी साजिश कर चुका है।
ऐसे हुआ था बम धमाका तरनतारन के पंडोरी गोला गांव में 4 सितंबर 2019 को बम धमाके हुए थे। बिक्रमजीत सिंह उर्फ बिक्कर पंजवड़ के नेतृत्व वाले इस खालिस्तानी गिरोह ने मुरादपुरा कैंप में हमला करने की योजना बनाई थी। इस हमले को अंतिम रूप देने के लिए गिरोह के सदस्य तरनतारन के ‘पिज्जा प्लस’ नामक स्थान पर मिले थे और उन्होंने बाकायदा लक्षित क्षेत्र (मुरादपुरा कैंप) की रेकी भी की थी। हमले के लिए हरजीत सिंह, गुरजंत सिंह और बिक्कर सिंह उर्फ विक्की ने मिलकर 4-5 क्रूड बम तैयार किए थे। इन बमों को बनाने के लिए पोटेशियम, सल्फर और छर्रों का इस्तेमाल किया गया था। पकड़े जाने के डर से उन्होंने इन बमों को पंडोरी गोला गांव में हरजीत के घर के पास एक खाली खेत में जमीन में दबा दिया था। जिस दिन हमले को अंजाम दिया जाना था, गिरोह के सदस्य उन छिपाए गए बमों को निकालने के लिए खेत में पहुंचे। जब वे विस्फोटकों को बाहर निकालने के लिए गड्ढा खोद रहे थे, तभी अचानक एक आकस्मिक धमाका हो गया। यह धमाका इतना शक्तिशाली था कि मौके पर ही गिरोह के दो सदस्य, बिक्कर सिंह उर्फ विक्की और हरप्रीत सिंह उर्फ हैप्पी की मौत हो गई। एक अन्य सदस्य, गुरजंत सिंह, इस विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हो गया। इस आकस्मिक विस्फोट ने पूरी साजिश की पोल खोल दी। पहले मामले की जांच पंजाब पुलिस ने शुरू की। इसके बाद एनआईए (NIA) की जांच में पता चला कि इस पूरी घटना का मास्टरमाइंड बिक्रमजीत सिंह था, जो उस समय विदेश (ऑस्ट्रिया) में बैठकर इस गिरोह का संचालन कर रहा था।
तीन प्वाइंटों में जानिए आरोपी कैसे तेयार करता था नेटवर्क 1. धार्मिक पहचान की आड़ में कट्टरपंथ बिक्रमजीत सिंह उर्फ बिक्कर पंजवड़ अमृतसर के श्री हरमंदिर साहिब में एक ग्रंथी के रूप में कार्यरत था। इस धार्मिक पद पर रहते हुए वह अंदर ही अंदर स्वतंत्र सिख राष्ट्र ‘खालिस्तान’ की कट्टर विचारधारा का समर्थक था। उसका मुख्य उद्देश्य पंजाब को भारत से अलग करना और सांप्रदायिक विभाजन पैदा करके आतंक फैलाना था। 2. बरगाड़ी कांड का फायदा और युवाओं का ब्रेनवॉश जांच के अनुसार, 2015-16 में हुई बरगाड़ी बेअदबी की घटनाओं ने बिक्रमजीत सिंह और मस्सा सिंह को युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का एक “आदर्श अवसर” प्रदान किया। उसने श्री हरमंदिर साहिब में सेवा के दौरान सह-आरोपियों से मुलाकात की और भोले-भाले युवाओं को गुमराह करके उन्हें एक आतंकवादी गिरोह में शामिल कर लिया। 3. सीक्रेट ट्रेनिंग कैंप और बम निर्माण बिक्रमजीत सिंह ने केवल विचारधारा ही नहीं फैलाई, बल्कि वह इस गिरोह का मुख्य मास्टरमाइंड था, जिसने बाकायदा ट्रेनिंग कैंप आयोजित किए। ट्रेनिंग देने के लिए वह 2016 के अंत में अमृतसर से तरनतारन के गांव बछड़े में शिफ्ट हो गया था। वहां उसने क्रूड बम बनाने की ट्रेनिंग दी। वह विस्फोटक सामग्रियों के विभिन्न संयोजनों और अलग-अलग तरह की जमीन पर उनके प्रभाव का ‘लाइव डेमो’ या प्रदर्शन भी देता था। वह युवाओं को उकसाने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लेता था। वह सोशल मीडिया पर खालिस्तान और ‘रेफरेंडम 2020’ से संबंधित भड़काऊ फोटो और वीडियो पोस्ट करता था, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को अपने देशविरोधी मिशन से जोड़ सके। बादलों पर हमले समेत पांच साजिशों में था शामिल प्रो. दर्शन सिंह पर हमला यह समूह 7 मार्च 2016 को प्रो. दर्शन सिंह पर बमों से हमला किया, जब वे तरनतारन में अपना संबोधन देने के बाद लुधियाना जा रहे थे। वे सुरक्षित बच गए, लेकिन उनके इनोवा वाहन को काफी नुकसान पहुंचा। गिरोह के सदस्य ‘दशम ग्रंथ’ पर उनके विचारों के विरोधी थे और उन्होंने अकाल उपमा जत्था द्वारा आयोजित सेमिनार के बाद उनके काफिले पर हमला किया था। बादलों पर हमले की साजिश गिरोह के सदस्य तत्कालीन राज्य सरकार को 2015-16 की बेअदबी की घटनाओं के लिए जिम्मेदार मानते थे। बिक्रमजीत सिंह और मलकीत सिंह ने 28 अक्टूबर 2016 को गुरु श्री रामदास जी के प्रकाश पर्व पर श्री हरमंदिर साहिब आने वाले प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर सिंह बादल पर हमले की योजना बनाई थी। वे स्टील के छोटे कंटेनरों में दो बम लेकर वहां पहुंचे थे, लेकिन भारी सुरक्षा और भीड़ के कारण योजना को अंजाम नहीं दे सके। सरपंच भगवान सिंह पर हमला जनवरी 2019 में पंचायत चुनाव के दौरान गुरजंत सिंह ने विपक्षी उम्मीदवार सरपंच भगवान सिंह उर्फ भाना पर हमले की योजना बनाई थी। 2 जनवरी 2019 को आरोपियों ने भगवान सिंह के घर पर बम फेंके और कई राउंड गोलियां चलाईं, जिसके संबंध में तरनतारन सिटी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। ‘ललकार रैली’ को निशाना बनाने का प्रयास हिंदू संगठनों ने 25 से 30 मई 2016 के बीच एक राज्य स्तरीय ‘ललकार रैली’ आयोजित की थी। इस गिरोह के सदस्य विस्फोटक लेकर रैया ब्यास में रैली को निशाना बनाने के लिए एकत्र हुए थे। चूंकि हिंदू कार्यकर्ता घोषित कार्यक्रम के अनुसार ब्यास नहीं पहुंचे, इसलिए टकराव टल गया। सुधीर सूरी को निशाना बनाने की योजना गिरोह ने शिवसेना नेता सुधीर सूरी को उनके बयानों का बदला लेने के लिए निशाना बनाने की योजना बनाई थी। आरोपी गुरजंत सिंह (A-3) ने घोषणा की थी कि जो कोई भी सूरी की हत्या करेगा, उसे 10 लाख रुपये या एक प्लॉट दिया जाएगा। विदेश भागने से भारत वापस लाने की लड़ाई
भारत से पलायन (जुलाई 2018): जांच में यह सामने आया है कि बिक्रमजीत सिंह इस खालिस्तानी गिरोह का नेतृत्व कर रहा था और वह जुलाई 2018 में गुप्त रूप से भारत छोड़कर भाग गया। वह अपनी गिरफ्तारी से बच रहा था और भागकर ऑस्ट्रिया चला गया था। वह ऑस्ट्रिया के लिंज़ में छिपकर रह रहा था। वहां बैठकर भी वह व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के माध्यम से अपने आतंकवादी गिरोह की लगातार निगरानी करता रहा और उन्हें आतंकवादी हमलों के लिए निर्देश देता, उकसाता और सलाह देता रहा। जैसे ही एनआईए को इस बारे में पता चला, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के प्रयासों और लंबी कानूनी कार्यवाही के बाद, ऑस्ट्रिया की सक्षम अदालत, लिंज़ क्षेत्रीय अदालत ने बिक्रमजीत सिंह को भारत प्रत्यर्पित करने का आदेश जारी किया। उसे 8 दिसंबर 2022 को ऑस्ट्रिया से भारत प्रत्यर्पित (Extradite) किया गया, जिसके तुरंत बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इस बारे में केस की जांच चल रही है।