चंडीगढ़ की सुखना लेक के प्रदूषित होने का खतरा:सीवरेज की गंदगी स्टॉर्म लाइनों में डाली; पार्षद जसविंदर कौर ने कमिश्नर को फोटो भेजी

चंडीगढ़ के सुखना लेक के प्रदूषित होने का खतरा पैदा हो गया है। यह आरोप चंडीगढ़ के वार्ड नंबर-1 की पार्षद जसविंदर कौर ने लगाए हैं। उन्होंने इस मामले को लेकर नगर निगम कमिश्नर को पत्र लिखकर तुरंत कार्रवाई की मांग की है। पार्षद ने आरोप लगाया कि सुखना लेक तक जाने वाली स्टॉर्म वॉटर नाली में लगातार अवैध रूप से सीवेज डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि खुड्डा अली शेर के आसपास के इलाकों, जैसे शिवालिक विहार, कंसल और नया गांव में सीवरेज की उचित व्यवस्था नहीं है। अब 2 प्वाइंटों में जानिए पार्षद ने पत्र में क्या लिखा है – सीवरेज की गंदगी स्टॉर्म लाइनों में डाली पत्र में कहा गया है कि निजी सफाईकर्मी, जो सेप्टिक टैंक और टॉयलेट गड्ढों की सफाई करते हैं, वे खुलेआम सीवेज और गंदगी को सीधे उस स्टॉर्म वॉटर लाइन में डाल रहे हैं, जो खुड्डा अली शेर से होकर सुखना लेक तक जाती है। उन्होंने चेतावनी दी कि जैसे ही यह गंदा पानी इन लाइनों में पहुंचता है, वह सीधे सुखना लेक में चला जाता है। इससे झील में प्रदूषण फैल रहा है और चंडीगढ़ की पहचान मानी जाने वाली इस खूबसूरत झील को नुकसान पहुंच रहा है। तुरंत इलाके में छापेमारी की जाए पार्षद ने निगम प्रशासन से मांग की है कि संबंधित विभागों को निर्देश दिए जाएं कि वे बताए गए इलाकों में, खासकर खुड्डा अली शेर से सुखना लेक की ओर जाने वाली स्टॉर्म वॉटर नाली के आसपास निरीक्षण और छापेमारी करें। साथ ही निजी टैंकरों और सफाईकर्मियों को स्टॉर्म वॉटर लाइन में सीवेज डालने से सख्ती से रोका जाए। उन्होंने अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है। पार्षद ने कहा कि वह निरीक्षण के दौरान प्रशासन को हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने इस संबंधी फोटो व जानकारी दी है। 20 सालों में सुखना लेक खत्म होने का डर सुखना लेक एक मानव निर्मित झील है, जिसका निर्माण 1958 में शिवालिक पहाड़ियों से आने वाली एक मौसमी धारा (सुखना चो) पर बांध बनाकर किया गया था। इस झील को योजना योजनाकार ली कोर्बुजिए और मुख्य अधिकारी पी.एल. वर्मा ने की थी, ताकि शहरवासियों को प्रकृति के करीब एक शांत वातावरण मिल सके। लगभग 3 वर्ग किलोमीटर में फैली यह झील आज चंडीगढ़ की सबसे महत्वपूर्ण पहचान और ‘राष्ट्रीय आर्द्रभूमि’ है, हालांकि वर्तमान में यह गाद जमा होने और गिरते जलस्तर जैसी गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों से जूझ रही है। चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी भी सुखना लेक की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले 20 वर्षों में यह प्रमुख पर्यटन स्थल पूरी तरह समाप्त हो सकता है। उन्होंने संसद में यह मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार से तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की। 68 वर्षों में सुखना लेक का करीब 56 प्रतिशत क्षेत्रफल खत्म सांसद तिवारी ने बताया कि पिछले 68 वर्षों में सुखना लेक का करीब 56 प्रतिशत क्षेत्रफल खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि लगातार सिल्ट जमने और उचित संरक्षण न होने के कारण झील सिकुड़ती जा रही है। उन्होंने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यह केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि चंडीगढ़ की पहचान से भी जुड़ा विषय है। इसके बावजूद संबंधित एजेंसियां प्रभावी कदम उठाने में विफल रही हैं।

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