चंडीगढ़ में तेज रफ्तार कार ने छीनी जान:43.88 लाख मुआवजा देने के आदेश, टक्कर के बाद दोनों सड़क पर गिरे, बीमा कंपनी भी जिम्मेदार

चंडीगढ़ में सड़क हादसे के दौरान एक व्यक्ति की मौत के मामले में चंडीगढ़ डिस्ट्रिक कोर्ट ने पीड़ित परिवार को राहत दी है। अदालत ने माना कि हादसा चालक की लापरवाही से हुआ और परिवार को 43.88 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है, जिस पर 7.5% सालाना ब्याज भी दिया जाएगा, जब तक पूरी रकम अदा नहीं हो जाती। मामला 20 अक्टूबर 2022 का है, जब महेश चंद एक्टिवा पर सवार होकर घर लौट रहे थे। सेक्टर-31/32 लाइट प्वाइंट के पास तेज रफ्तार इनोवा कार ने उनके स्कूटर को टक्कर मार दी। हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं और अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। टक्कर के बाद दोनों सड़क पर गिरे
कोर्ट में गवाह ने बताया कि हादसे वाले दिन मृतक स्कूटर पर सवार होकर घर जा रहा था। तभी एक तेज रफ्तार कार आई और लापरवाही से चलाते हुए स्कूटर को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों सड़क पर गिर गए और कार उन्हें काफी दूर तक घसीटते हुए ले गई। गवाह के अनुसार, हादसा पूरी तरह कार चालक की तेज रफ्तार और लापरवाही की वजह से हुआ। कोर्ट ने चालक को माना दोषी
कोर्ट ने चालक को दोषी इसलिए माना क्योंकि गवाह के बयान और रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों से साफ हुआ कि हादसा उसकी लापरवाही से हुआ। अदालत ने माना कि कार चालक तेज रफ्तार में गाड़ी चला रहा था, उसने सावधानी नहीं बरती और बिना हॉर्न दिए स्कूटर को टक्कर मार दी। गवाह के बयान को चुनौती नहीं दी गई और चालक खुद कोर्ट में आकर अपनी सफाई भी नहीं दे सका। इसके अलावा हादसे की एफआईआर भी चालक के खिलाफ दर्ज थी, जिसे कोर्ट ने अहम सबूत माना। इन सभी कारणों के आधार पर कोर्ट ने चालक को दुर्घटना का जिम्मेदार ठहराया। बीमा कंपनी भी जिम्मेदार
बीमा कंपनी को जिम्मेदार इसलिए ठहराया गया क्योंकि हादसे के समय कार का बीमा उसी कंपनी के पास था। कोर्ट में यह साबित नहीं हो पाया कि चालक ने बीमा पॉलिसी की किसी शर्त का उल्लंघन किया था। चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस भी था और यह भी साबित नहीं हुआ कि वह शराब के नशे में था। इसी वजह से अदालत ने माना कि बीमा कंपनी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती और उसे वाहन मालिक की ओर से मुआवजा राशि चुकानी होगी। कोर्ट ने माना चालक की गलती नहीं
अदालत ने कहा कि हादसा पूरी तरह चालक की लापरवाही और तेज रफ्तार के कारण हुआ। गवाह के बयान, एफआईआर और अन्य सबूतों से यह साफ साबित हुआ कि दुर्घटना में मृतक की कोई गलती नहीं थी। कोर्ट ने यह भी माना कि मृतक अपने परिवार का कमाने वाला सदस्य था, इसलिए उसकी मौत से परिवार को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। इसी आधार पर अदालत ने आय, उम्र और परिवार की निर्भरता को देखते हुए मुआवजे की राशि तय की। साथ ही अदालत ने कहा कि वाहन बीमित होने के कारण बीमा कंपनी को ही यह मुआवजा देना होगा, ताकि पीड़ित परिवार को आर्थिक सहारा मिल सके। ऐसे होगा राशि का बंटवारा
अदालत ने मुआवजे की राशि का बंटवारा भी तय कर दिया है। आदेश के मुताबिक मृतक की पत्नी सजना को कुल राशि का 60 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा, जबकि दोनों बच्चों जैश्री और राहुल को 15-15 प्रतिशत दिया जाएगा। वहीं मृतक के पिता फूल चंद को 10 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि यह पूरी राशि सभी के बैंक खातों में जमा करवाई जाए, ताकि उन्हें सीधे भुगतान मिल सके।

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