मैंने कभी पिस्टल को इतने पास से नहीं देखा था। मैं बेड पर बैठी थी। एक क्रिमिनल आया और कमर से पिस्टल निकालकर मेरे पास रख दी। पहली रात तो डर से मुझे नींद ही नहीं आई। दिमाग से पिस्टल नहीं निकल रही थी। देर रात तक अनजान लोगों का आना-जाना खौफ पैदा कर रहा था। गंदी-बदबूदार जगह। छोटा-सा कमरा, उसमें 20 लड़कियां। खाने के नाम पर चावल और आलू की भुजिया। किसी भी वक्त लोग आते और लड़कियों को लेकर जाते। मैं (महिला रिपोर्टर) इस गैंग को एक्सपोज करने के लिए 5 दिन रेड लाइट एरिया के पैटर्न पर चल रहे ऑर्केस्ट्रा में रही। मैंने गैंग के काम करने के तरीके को समझा। लड़कियों का दर्द भी जाना। 5 दिन बाद मैं अपनी टीम की मदद से इस जगह से बाहर निकल पाई। मैंने और मेरी टीम ने अपना काम पूरा किया। हमने पूरी गैंग को एक्सपोज किया। अब पुलिस-प्रशासन की जिम्मेदारी है कि लड़कियों को वहां से रेस्क्यू करे। मैं वहां से बाहर तो आ गई, लेकिन आज भी उन लड़कियां की बातें मेरे कानों में गूंजती हैं। कसक इतनी ही है कि वो लड़कियां वहां से कब आजाद होंगी। पढ़िए रेड लाइट एरिया के पैटर्न पर चले रहे ऑर्केस्ट्रा में मेरे 5 दिन… मुझे सीवान रेलवे स्टेशन से लगभग 10 किलोमीटर दूर हरदिया कोदई गांव में दीपक के पास जाना था। दोपहर के एक बज रहे थे, तेज धूप से हालत खराब थी। ऑटो लेकर वहां पहुंची, ताकि किसी को शक न हो। एक घंटे में मैं सीवान स्टेशन से हरदिया कोदई गांव पहुंची। ऑटो से उतरी तो कहीं कोई घर नहीं नजर आ रहा था। सड़क से 200 मीटर दूर एक छोटी-सी किराने की दुकान दिखी। वहां पहुंची तो पीछे एक टीन शेड का मकान नजर आया। आसपास कोई घर नहीं था, देखकर ही जगह अजीब सी लग रही थी। मैंने दुकानदार से पूछा- दीपक ऑर्केस्ट्रा जाना है। दुकानदार बोला यही है, बैठो दीपक को बुलाते हैं। दुकान से पानी की एक गंदी सी बोतल मेरी तरफ बढ़ाते हुए दुकानदार बोला- दीपक मेरा बेटा है। तुम हरियाणा से आई हो न, उसने सुबह बताया था। दुकानदार से बातचीत चल ही रही थी कि दीपक आ गया। वह दुकान के पीछे सकरी गली से होकर टीन शेड वाले हॉल में ले गया। लोहे का बड़ा दरवाजा देखकर मैं डर गई, टीन शेड वाले घर में इतने मजबूत दरवाजे का क्या काम? मेरे अंदर आते ही दीपक ने दरवाजा बंद कर दिया। मैं अंदर पहुंची तो अजीब-सी दुर्गंध आ रही थी। टीन शेड में पंखे तो लगे थे, लेकिन धूप से तपते टीन शेड के कारण पंखा भी गर्म हवा फेंक रहा था। इन्हीं पखों के नीचे बैठी लड़कियां मुझे एकटक देखे जा रही थीं। यह किसी कैदखाने से कम नहीं था। मैं घूमकर जगह देखने लगी तो दो लड़कियां मेरे पास आ गईं। बोलीं- बिहार में पहली बार आई हैं क्या? यहां हर जगह ऐसी ही व्यवस्था होती है। बेड पर लेटी 3 लड़कियों ने इशारे से मुझे बुलाया। बोलीं- कहां से आई हैं? रात में हम लोग प्रोग्राम में थे, इसलिए थक गए हैं। यहां शाम से अपना काम शुरू होता है। मैंने हर लड़की के हाथ में महंगा स्मार्ट फोन देखा। रहने के लिए तो जगह टीन शेड वाली थी, लेकिन वह लग्जरी लाइफ जी रही थीं। सोशल मीडिया पर सभी की रील्स ऐसी कि देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा पाएगा कि लड़कियां किस हाल में रह रही हैं। मैंने देखा जितने भी ऑर्केस्ट्रा चल रहे थे, शहर से दूर थे। आसपास कोई घर नहीं होता, न यहां कोई बड़ा बोर्ड लगाया जाता है। घर ऐसे होते हैं जिसे देखकर बाहर से कोई अंदाजा भी नहीं लगा सके कि यहां लड़कियां रह रही हैं। शाम को चावल और आलू की भुजिया दी गई। मैंने पूछा यहां खाना ऐसे ही मिलता है क्या? पूजा ने बताया मालिक के ऊपर है कब क्या खिलाएगा। बाहर कोई दुकान भी नहीं जहां से लड़कियां कुछ खा पी सकें। लड़कियों को निगरानी में रखा जाता है, जिससे वह वहां से निकल भी नहीं सकतीं। दीपक की दुकान भी लड़कियों से चलती थी, वहां जो भी खाना पीना हो, पैसे देने पड़ते थे। एजेंट कमीशन पर सामान लाकर लड़कियों को देते थे। बाहर से कुछ भी मंगाना हो, एजेंट पैसे लेकर लाते थे। सिगरेट से लेकर दारु तक की व्यवस्था हो रही थी। यहां लड़कियों की अलग ही जिंदगी दिखी। अधिकतर लड़कियां दिन में सोती थीं। उठने पर भी फोन पर लगी रहतीं, उनमें से ज्यादातर के बॉयफ्रेंड थे। लड़कियां सिगरेट के कश ऐसे लगातीं, मानो इसके धुएं के साथ अपने दर्द को भी उड़ा देना चाहती हों। एजेंट्स के लिए ये लड़कियां किसी सामान की तरह हैं। उन्हें किसी के दर्द-मजबूरी से कोई लेना-देना नहीं है। उनका बस एक एजेंडा है, जो कस्टमर आए वो खुश होकर जाए। भले ही लड़कियों की तबीयत खराब हो या वो पीरियड्स में हों..एजेंट्स को कोई फर्क नहीं पड़ता। वो दिनभर लड़कियों पर किसी न किसी तरह नजर रखते, जरा भी गड़बड़ी हुई तो लड़कियों को पीटने, गाली-गलौज करने में जरा भी नहीं हिचकते। ऐसा बर्ताव तो कोई जानवर के साथ भी नहीं करता, जैसा इन एजेंट्स को मैंने लड़कियों के साथ करते देखा। दिन में 12 बजे सोकर उठते ही लड़कियां तैयार हो जाती थीं। दोपहर 3 बजे के बाद यहां का माहौल बदलने लगा, लड़कों का आना-जाना शुरू हो गया। कुछ लड़के तो आए, रात यहीं गुजारी और सुबह होते ही निकल गए। किसी को किसी की कोई परवाह नहीं होती। लड़कियां खूब सारा मेकअप लगाकर तैयार होने के बाद लड़कों से फोन पर बात करती थीं। लड़के भी आते तो वह उनके साथ अलग रूम में चली जाती थीं। शाम को अधिकतर लड़कियां वहां से निकल जाती थीं। कभी ग्रुप में जातीं तो कभी अलग-अलग निकलती थींं। लेकिन एजेंट को सब पता होता था, कौन कहां जा रही है। कुछ लड़कियां बड़ी शिद्दत से तैयार होतीं, दूसरी से पूछ-पूछकर मेकअप करती दिखीं, जबकि कुछ की आंखों से दर्द और मजबूरी साफ झलकती थी। उन्हें पता है कि छोटे कपड़े पहनकर, मेकअप के पीछे अगर रोता चेहरा नहीं छिपाया तो एजेंट पीट-पीटकर उनके दर्द को और बढ़ा देगा। दो दिनों तक न खाना मिलेगा न किसी से बात करने दिया जाएगा। मैं वहां हर पल एक डर के साथ जी रही थी। किसी भी आहट पर मन बेचैन हो जाता, पता नहीं कौन होगा, क्या बोलेगा, क्या करेगा…लेकिन वहां रह रही कुछ लड़कियों के लिए अब यही उनकी दुनिया थी। देर रात तक कस्टमर उनके शरीर को नोंचते, फिर जब वो लौटतीं तो थककर सो जातीं, कोई-कोई तो वैसे ही मेकअप और उन्हीं कपड़ों में बेड पर ऐसे गिरती मानो शरीर में जान नहीं। उन लोगों ने इस माहौल में अपने को पूरी तरह ढाल रखा था। मुझसे कहा- यहां के कड़वे सच को जितनी जल्दी मान लोगी, तकलीफ उतनी कम होगी। ऐसी ही एक रात जब माला (डांसर) तैयार हो रही थी तो मैंने देखा, उसकी आंखों में आंसू थे। वो एक बच्चे की मां थी। बच्चे को रातभर ऐसे छोड़कर जाना उसके लिए आसान नहीं था। मैंने बात की तो कहा- मैंने तो इसे अपनी तकदीर मान लिया है, लेकिन अपने बच्चे की चिंता है। मैं चाहती हूं कि वो पढ़े, एक अच्छा आदमी बने, लेकिन कैसे…अच्छा हुआ भगवान ने बेटी नहीं दी। वरना ये लोग उसे भी धंधे पर बिठा देते.. तुम इस लाइन में नई हो। अंदाजा भी नहीं लगा सकती जब कोई गैर मर्द हमारे जिस्म को छूता है, तो कैसा लगता है। खुद से घिन आती है, लगता है उसे मार दूं या खुद मर जाओ, लेकिन क्या करूं बच्चे का मुंह देखकर इस नरक में भी जिंदा हूं। तुम तो पढ़ी-लिखी लगती हो, मेरी मानो तो यहां से भाग जाओ। उसकी बातों से मैं स्तब्ध रह गई। मैं तो ये मान रही थी कि इन लड़कियों को ये जिंदगी रास आने लगी है, लेकिन माला की बातों ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया। कैसे ये लोग मेकअप के पीछे अपना हर दर्द, हर जिल्लत छिपा कर मजबूरी में ये सब कर रही हैं। माला की बातें मुझे अभी भी सोने नहीं देतीं, लेकिन ये इतनी डरी हुई हैं, अपनों से इस कदर धोखा खा चुकी हैं कि इन्हें लगता है, यही रहना सही है। यहां की दिनचर्या में ढल गई हैं, लेकिन कइयों में अब भी आस है कि यहां से निकलेंगी और अपनी जिंदगी को बदलेंगी। यहां मेरी मुलाकात कोलकाता की एक लड़की से भी हुई, जिसने वहां के वीडियो बनाने में मेरी मदद की। वो मुझसे बार-बार बस यही कहती, दीदी तुम निकलोगी तो मुझे भी यहां से जरूर निकालना। मेरी क्या गलती है, मैंने तो बस प्यार किया था…सच्चा प्यार..मुझे क्या पता था, जिसके साथ जीना चाहती हूं, वहीं मेरी जिंदगी को जीते-जी नरक बना देगा, लेकिन मैं हार नहीं मानूंगी…मैं बाहर निकलूंगी और अपनी जिंदगी वैसे ही जिऊंगी, जैसी मैं चाहती थी। रेड लाइट एरिया के पैटर्न पर चल रहे इन ऑर्केस्ट्रा में मैंने एक पल में उम्मीदें बंधती तो दूसरे पल में टूटती देखी…मेरी भी आंखों में एक उम्मीद है, पुलिस-प्रशासन इन लड़कियों की मदद करेगा। सरकार ऐसी लड़कियों के लिए कोई इंतजाम करेगी और इस तरह के ऑर्केस्ट्रा पर कड़ा एक्शन होगा। ——————– ऑपरेशन रेड लाइट तीनों पार्ट भी पढ़िए पार्ट-1: 5 दिन रेड लाइट एरिया में महिला रिपोर्टर:एजेंट्स ने 3 बार बेचा; कैसे लड़कियों का किया जाता है ब्रेनवॉश, साठगांठ एक्सपोज ‘लड़की तो एकदम हॉट है। देखने वाला पागल हो जाएगा। फेस देखकर लोग मुंह मांगी कीमत देने को तैयार हो जाएंगे। हरियाणा वाली है, कस्टमर को खुश कर देगी। बिहार में ऐसी आइटम नहीं मिलेगी। मुझे तो अब तक ऐसी नैन नख्श वाली लड़की नहीं मिली…। कहां से आई हो..। अब तक कहां थी। मार्केट में पहली बार तुम्हें देखा है। यह जगह तुम्हारे लिए सही नहीं है। मेरे साथ चलो, विधायक जी से मिलवा दूंगा। एक बार उन्होंने हाथ रख दिया तो जिंदगी बदल जाएगी। रानी बनाकर रखेंगे। इलाके के लोग भी सलाम ठोकेंगे..।’ पूरी खबर पढ़िए पार्ट-2: इंजेक्शन लगाकर लड़कियों को जवान बना रहे:बॉयफ्रेंड बनकर प्रेग्नेंट करते, 5 लाख में बच्चों का सौदा, डॉक्टर बोला- हॉस्पिटल-कस्टमर सब सेट “अनमैरिड लड़की है। बच्चे को लेकर कोई क्लेम नहीं करेगी। आप लड़की को हॉस्पिटल लाइएगा। यहां अल्ट्रासाउंड करके बच्चे का जेंडर का पता कर लेंगे। लड़का निकला तो मुंह मांगे पैसे मिल जाएंगे, लड़की हुई तो भी अच्छे पैसे बच जाएंगे। पुलिस का कोई टेंशन नहीं है, हमने पहले बहुत बच्चों को एडजेस्ट कराया है।” अनमैरिड लड़कियों के बच्चों को बेचने का ऑफर सीवान के मशहूर नवीन मैटरनिटी एंड चाइल्ड केयर के बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नवीन कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़िए पार्ट-3: ‘रेड लाइट एरिया की दीदी कहती-कस्टमर खुश करो, आगे बढ़ो’:ट्रैप में डॉक्टर की बेटी, बोली- बॉयफ्रेंड बेच गया; रिपोर्टर ने सुना लड़कियों का दर्द ‘तुम सुंदर हो। वायरल हो जाओगी। बोल्ड कपड़े पहनकर खुद को एक्सपोज करो। जो दिखता है, वही बिकता है। बाहरी दुनिया से यहां सब सेफ है। मालिक जो बोलेगा कर देना। वह खुश रहेगा तो गाड़ी, बंगला सब मिल जाएगा। बिहार है, यहां डांसर्स हिट हो जाती हैं। कई वायरल होकर फिल्मी दुनिया में चली गई हैं। तुम भी हिट हो जाओगी, फिल्मों में दिखोगी..।’ रेड लाइट एरिया के पैटर्न पर चल रहे ऑर्केस्ट्रा में लड़कियों का ब्रेनवॉश इसी तरह से किया जाता है। इस काम के लिए वहां पेशेवर महिलाएं रखी जाती हैं। पूरी खबर 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