नारनौल में अभय यादव के बयान से सियासी हलचल तेज:इशारों में राव इंद्रजीत पर साधा निशाना, बोले- बैल दो तरह के होते हैं

हरियाणा के नारनौल में शनिवार को पूर्व मंत्री डा. अभय सिंह यादव ने केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह पर इशारों ही इशारों में जुबानी हमला किया। अभय सिंह यादव आज गांव मंडलाना में शहीद ओमप्रकाश यादव की प्रतिमा का अनावरण करने पहुंचे थे। इस मौके पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बैल दो तरह के होते हैं। एक किसान का बैल होता है, जो पूरा दिन खेत में मेहनत करता है। जिसके बाद शाम के समय किसान उसे प्यार से सहलाता है। वहीं, दूसरा बैल गोशाला का होता है, जो पूरा दिन कुछ नहीं करता। किसान का बैल काम करता है तो उसकी तारीफ भी होती है। इसलिए लोगों को ऐसे बैलों की कदर करनी चाहिए। वहीं, गोशाला का बैल कुछ काम ही नहीं करता तो उसकी तारीफ भी नहीं बनती। खुद को बताया किसान वाला बैल उन्होंने इशारों ही इशारों में खुद को काम करने वाला खेत का बैल और राव इंद्रजीत सिंह को गोशाला का बैल बताया। इसके बाद पत्रकारों से बात करते हुए डा. अभय सिंह ने कहा कि उन्होंने यह किसी के लिए नहीं कहा। केवल एक उदाहरण दिया था। पत्रकार इसके कोई भी मायने लगा लें। राव ने 3 माह पहले किया प्रतिमा का अनावरण केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने इसी साल 29 जनवरी को नारनौल के गांव मंडलाना में अमर शहीद नायब सूबेदार जगमाल सिंह की प्रतिमा का अनावरण किया था। इस मौके पर उन्होंने भी इशारों ही इशारों में डा. अभय सिंह यादव पर निशाना साधा था। आज का कार्यक्रम उसी का जवाब माना जा रहा है। आरती राव के बयान पर पलटवार कुछ दिन पहले स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के उनके आने से पेट में दर्द होता है के बयान पर यादव ने पलटवार करते हुए कहा कि उनका पेट तो सही है पता नहीं किस के पेट में दर्द होता है। इसके अलावा आरती राव के लकीर बड़ी होने के बयान बोले, अभी लकीर खिंचने का समय नहीं आया है। उन्होंने कहा कि नांगल चौधरी के अलावा अटेली, नारनौल व महेंद्रगढ़ विस के लोग उनको चाय पर बुलाते हैं, मगर वे किसी के पास नहीं जाते, क्योंकि अभी ऐसा कोई समय नहीं आया है। मंडलाना शहीदों की नर्सरी इससे पूर्व शहीद ओमप्रकाश की मूर्ति का अनावरण करते हुए उन्होंने कहा कि मंडलाना गांव शहीदों का गांव हैं। यहां पर तीन शहीदों की प्रतिमाएं लगी हुई हैं। उन्होंने कहा कि देश के लिए अपने प्राणों की आहूति देने से बड़ा बलिदान कोई नहीं है। 1980 में हुए थे शहीद उन्होंने कहा कि शहीद ओमप्रकाश 1980 में शहीद हुए थे। 18 अप्रैल को उनको शहीद का दर्जा मिला था। इसके बाद उसके पुत्र ने 46 साल बाद उनकी प्रतिमा लगाकर इस समय की युवा पीढ़ी को देश सेवा का एक संदेश दिया है, जो बड़ा सराहनीय है। इस मौके पर ब्रिगेडियर मोहन सिंह शेखावत व शहीद परिवार कल्याण फाउंडेशन के अध्यक्ष टीसी राव सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

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