कानपुर में मोबाइल एप के जरिए IPL मैच में सट्टा लगवाने वाले 5 आरोपी पकड़े गए हैं। पुलिस ने इनके पास से 3.91 करोड़ रुपए बरामद किए हैं। सटोरियों ने नोट गिनने के लिए दिल्ली से 35-35 हजार की 3 मशीनें और एक करेंसी चेकिंग मशीन मंगवाई थी। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से 500 की 146, 200 की 21 और 100 की 11 गडि्डयां बरामद हुईं। 6 पुलिसकर्मियों ने 3 मशीनों से करीब 2 घंटे में रुपए गिने। दो आरोपी कार्तिक लखवानी और राजकुमार अवैध बेटिंग एप में रकम लगवाते थे। कल्पेश, रवि नाई और विष्णु कैश लाने ले जाने का काम करते थे। वहीं, गिरोह का सरगना मनीष उर्फ प्रोफेसर अभी फरार है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। पुलिस ने आरोपियों को फजलगंज थाना क्षेत्र में मंगलवार देर रात गिरफ्तार किया था। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बुधवार को इसका खुलासा किया। अब पूरा मामला विस्तार से… गोविंदपुरी पुल के नीचे से पकड़े गए पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि शहर में बड़े पैमाने पर IPL मैच में सट्टा लगाने की शिकायतें मिल रही थीं। इस पर सर्विलांस और स्वाट टीमों को एक्टिव किया गया। मंगलवार देर रात मुखबिर से सूचना मिली कि गोविंदपुरी पुल के नीचे सफेद रंग की सोनेट कार खड़ी है। इस कार में बैठे दो युवक मोबाइल फोन के जरिए IPL मैचों पर ऑनलाइन सट्टा संचालित कर रहे हैं। सूचना मिलते ही टीम ने घेराबंदी की। कार में कौशलपुरी के रहने वाले कार्तिक लखवानी और फजलगंज के रहने वाले राजकुमार बैठे थे। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के मोबाइल से BETHUB 24.COM इलीगल बैटिंग एप, विभिन्न एप्लिकेशन, वाट्सएप चैट और लेनदेन का डेटा मिला। किराए के मकान में चल रही थी सट्टेबाजी आरोपियों ने पुलिस को बताया कि मेरे साथी किदवई नगर स्थित किराए के मकान से सट्टेबाजी का काम करते हैं। इसके बाद पुलिस ने किदवई नगर स्थित मकान में छापेमारी की। यहां से गुजरात के मेहसाणा जिले के उन्जा के रहने वाले कल्पेश, रवि नाई और विष्णु को गिरफ्तार किया। छापेमारी के दौरान पुलिस को मकान से 3 करोड़ 91 लाख 50 हजार कैश, मोबाइल फोन, 3 करेंसी काउंटिंग मशीनें बरामद हुईं। एक करेंसी चेकिंग मशीन, 2 कैलकुलेटर, सोनेट कार (UP 78 GP 4757) बरामद की। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि आरोपी ऑनलाइन एप्लिकेशन और वेबसाइट के जरिए सट्टेबाजी करते थे। ये एप में आईडी बनाकर ग्राहकों को देते थे। अब ठगी का तरीका समझिए.. आरोपियों ने बताया कि यूजर्स सोशल मीडिया पर वेबसाइट का लिंक ओपन कर एप डाउनलोड करते हैं। इसके बाद उसमें अपनी आईडी बनाते हैं। फिर इस पर रुपए लगाते हैं। सट्टे में 1 लाख तक की रकम जीतने वालों को ऑनलाइन रुपए का ट्रांजेक्शन किया जाता था। हम लोग इस पूरे एप को हैंडल करते थे। एक लाख से बड़ी रकम ऑफलाइन दी जाती थी। जब कोई ज्यादा रुपए लगाता था, तो उसे हम हरा देते थे। सट्टेबाजी से मिले रुपए को किदवई नगर स्थित हायर सेंटर में रखा जाता था। सरगना ने कार्तिक और राजकुमार को दी थी आईडी पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के मुताबिक, कार्तिक की बटर पेपर की फैक्ट्री है। कार्तिक और राजकुमार ने फर्जी बेटिंग एप की मास्टर आईडी जबलपुर के रहने वाले मनीष उर्फ प्रोफेसर से ली थी। दोनों आरोपी लोगों से सट्टा लगवाते थे, जबकि कल्पेश, रवि नाई और विष्णु कैश लाने ले जाने का काम करते थे। कल्पेश, रवि नाई और विष्णु को मनीष हर महीने 13 से 20 हजार की सैलरी देता था। पुलिस मनीष की तलाश में है। उसकी लास्ट लोकेशन पुणे में मिली है। आरोपियों से बरामद राशि की जानकारी इनकम टैक्स को दी गई है। रकम को जल्द ही इनकम टैक्स के सुपुर्द किया जाएगा। —————————— ये खबर भी पढ़िए… नवजात बच्चे को 2 घंटे पकड़कर बैठा रहा बंदर:मां चिल्लाती रही, लेकिन छोड़ा नहीं, मुजफ्फरनगर में पड़ोसियों को काटने दौड़ा यूपी के मुजफ्फरनगर में एक बंदर घर के अंदर 3 महीने के बच्चे को 2 घंटे तक पकड़कर बैठा रहा। बच्चा कमरे के अंदर बेड पर लेटा था। परिवार वाले अपने-अपने काम बिजी थे। इस दौरान एक बंदर दबे पांव कमरे में आया और बच्चे के पास जाकर बैठ गया। पढ़ें पूरी खबर…