पंजाब के बरनाला जिले के संधू कलां गांव में एक हजार टन से अधिक वजनी दो मंजिला कोठी को सफलतापूर्वक 250 फुट पीछे खिसका दिया गया है। किसान जगराज सिंह की यह कोठी लुधियाना-बठिंडा भारत माला प्रोजेक्ट के रास्ते में आ रही थी। ठेकेदार गुरमेल सिंह की जैक तकनीक का उपयोग कर इस इमारत को बिना तोड़े शनिवार को अपने नए स्थान पर पहुंचाया गया। जगराज सिंह ने यह घर 2017 में बनवाया था। भारत माला प्रोजेक्ट के तहत हाईवे निर्माण के लिए इस कोठी को हटाना अनिवार्य हो गया था, जिसके कारण पिछले डेढ़ साल से हाईवे का काम रुका हुआ था। कोठी को गिराने से लाखों रुपये का नुकसान होता, इसलिए किसान और ठेकेदार ने इसे स्थानांतरित करने का विकल्प चुना। इंजीनियरिंग को ‘अंगूठा छाप’ तजुर्बे की चुनौती
इस पूरे मिशन की कमान संभाली थी लुधियाना के गांव चक्कर के रहने वाले गुरमेल सिंह ने। खुद को अनपढ़ और अंगूठा छाप कहने वाले गुरमेल सिंह ने अपने काम से बड़ी-बड़ी डिग्रियों वाले इंजीनियरों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। जानिए कैसे किया— अब मुआवजे की बारी, प्रशासन पर टिकी निगाहें
जहाँ एक तरफ कोठी शिफ्ट होने से हाईवे प्रोजेक्ट की बाधा दूर हुई है, वहीं किसान परिवार अब आर्थिक मदद की आस में है। किसान का कहना है कि प्रशासन और विभाग ने वादा किया था कि कोठी हटाने में आने वाला खर्च सरकार देगी।