बाबा बागेश्वर धाम से आई, बेटे ने घर से निकाला:बस से पुल पर मां को छोड़कर चला गया, वृद्धाश्रम में रह रही; कहा- बेटे-बहू के साथ रहना

बिहार राज्य महिला आयोग में एक मामला सामने आया है जिसमें एक बूढी मां बाबा बागेश्वर धाम दर्शन के लिए गई थी। जब वापस आई तो उसके सर से आशियाना ही छिन गया। जिस किराए के मकान पर वह अपने बहू और बेटे के साथ रह रही थी, वे लोग उस घर को छोड़कर कहीं चले गए हैं। अब महिला अपने बेटे और बहू को ढूंढ रही है और उनके साथ ही रहना चाहती है। मामला नालंदा के बिहारशरीफ का है और आवेदिका दानापुर के एक वृद्ध आश्रम में रह रही थी। 14 साल की उम्र में हुई थी शादी, 19 साल में हुई विधवा महिला की शादी 14 साल की उम्र में ही हुई थी। जब वह 19 साल की थी तब उसके पति का देहांत हो गया। उस वक्त एक बेटा गर्भ में था। विधवा होने के बाद आवेदिका अपने मायके में ही रह रही थी। बिहारशरीफ में आवेदिका के पिता काम करते थे तो बच्चा वहीं पला बढ़ा है। आवेदिका का बेटा आज भी उसे घर का किराया दे रहा है और अपनी मां को वहीं रहने के लिए कहता है लेकिन आवेदिका वहां अकेले नहीं रहना चाहती है। आवेदिका का बेटा एक बैटरी कंपनी में काम करता है।
बाबा बागेश्वर धाम गई थी महिला महिला ने कहा कि अपने पति के मृत्यु के बाद में पूरी तरह से अपने इकलौते बेटे पर निर्भर हूं। एक दिन जब मैं बागेश्वर धाम से घर वापस आई, तो मेरे घर में कोई नहीं था। किसी को नहीं पता था कि मेरा बेटा-बहू कहां गया है। इसके बाद मैंने डीएम को भी पत्र लिखा, जिसमें मुझे आश्वस्त किया गया कि मेरे पत्र पर करवाई होगी। तब तक मुझे दानापुर स्थित वृद्ध आश्रम में रहने को कहा गया था। जब मैं वहां 10 बजे रात में पहुंची तो वहां से हटकर मुझे शांति कुटीर भेज दिया गया। वहां मेरे साथ काफी अभद्र व्यवहार किया गया। उसके बाद मेरा बेटा आया और मुझे वहां से लेकर गया। 8 दिन अपने पास रखने के बाद और मुझे असहाय हाजीपुर पुल के पास छोड़कर कहीं चला गया। तब से मैं बिना ठिकाने घूम रही हूं। कई दिनों तक मैं स्टेशन पर भी रही। दूसरी ओर बेटे से संपर्क किया जा रहा है मगर वह फोन नहीं उठा रहा है। महिला को उसका आशियाना दिलाने की आयोग कर रही कोशिश बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष प्रो.अप्सरा ने कहा कि हमने आयोग में ऐसा पहला मामला देखा है जिसमें एक मां आई है और कह रही है की उन्हें उनके बेटे के पास रखवाया जाए। वह महिला बाबा बागेश्वर से मिलने गई हुई थी और जब उनके शिविर से वापस पटना लौटी तो जिस घर में वह लोग पहले रह रहे थे वहां से उनका बेटा चला गया था। महिला के पास अपने बेटे की कोई जानकारी या एड्रेस नहीं है, बस एक फोन नंबर है। हमने उस नंबर पर लगातार कॉल किया है, लेकिन महिला का बेटा फोन नहीं उठा रहा है। आयोग चाह रही है कि एक मां को उसका आशियाना मिल जाए।

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