भारतीय किसान यूनियन (क्रांतिकारी) ने बिजली कटौती के विरोध में आज बाघापुराना स्थित एक्सियन कार्यालय के सामने धरना दिया। यह धरना प्रदेश कमेटी के आह्वान पर आयोजित किया गया था, जिसमें इलाके के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। ब्लॉक नेता अमना वैरोके और हरजिंदर सिंह रोडे ने मीडिया को बताया कि लगातार बढ़ रही बिजली कटौती ने किसानों और मजदूर वर्ग के जीवन को बेहद मुश्किल बना दिया है। गुरदीप सिंह बोले- मच्छरों की समस्या बढ़ी धरने को संबोधित करते हुए प्रदेश उपाध्यक्ष गुरदीप सिंह वैरोके सहित अन्य नेताओं ने बिजली कटौती के गंभीर परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बिजली न होने के कारण लोग गर्मी में रात को ठीक से सो नहीं पा रहे हैं, जिससे मच्छरों की समस्या और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। नेताओं ने यह भी बताया कि खेतों में बोई गई फसलें पानी की कमी के कारण सूख रही हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। इसके अतिरिक्त, विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है, जिससे मेहनतकश लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। किसान नेता बोले- समस्या के लिए सरकारी नीतियां जिम्मेदार किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि पंजाब में लगभग 12 हजार मेगावाट बिजली की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान उपलब्धता केवल 4700 मेगावाट है। उन्होंने इस भारी कमी के लिए सरकारी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया, जिसमें सरकारी थर्मल प्लांटों को बंद करना और निजी प्लांटों पर निर्भरता बढ़ाना शामिल है। नेताओं ने सरकार को कई सुझाव भी दिए। उन्होंने नहरों पर छोटे बिजली प्रोजेक्ट लगाने, सौर तथा पवन ऊर्जा को बढ़ावा देने और लोगों को सोलर सिस्टम लगाने के लिए सब्सिडी प्रदान करने की मांग की। अंत में, किसान नेताओं ने केंद्र सरकार से केंद्रीय पूल से अतिरिक्त बिजली उपलब्ध करवाने की मांग की। धरने के समापन पर एक्सियन बाघापुराना को एक मांग पत्र सौंपा गया और सरकार विरोधी नारेबाजी के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ।