बिहार में लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की टीम छापेमारी कर रही है। इसी बीच बुधवार यानी 6 मई को EOU की टीम ने सुपौल के सब रजिस्ट्रार अमरेंद्र कुमार के 5 ठिकानों पर रेड मारा। इस दौरान इनके पास से करीब 10 करोड़ रुपए से अधिक की चल-अचल संपत्ति होने का अनुमान लगाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह आंकड़ा प्रारंभिक है। आगे की जांच में इसमें वृद्धि हो सकती है। जांच एजेंसी के अनुसार, उन्होंने अपने इनकम से करीब 1 करोड़ 10 लाख 64 हजार रुपए अधिक की संपत्ति अर्जित की है। यह आंकड़ा उनकी इनकम से लगभग 65.08% ज्यादा है। पटना, सुपौल और छपरा समेत 5 ठिकानों पर चले छापेमारी के बाद डीएसपी सुनील कुमार ने बताया, सारण के जवईनियां गांव में अमरेंद्र कुमार के पैतृक घर से कोई विशेष बरामदगी नहीं हुई है। यह आवास अमरेंद्र कुमार के दिवंगत पिता रघुनाथ राम का बताया गया है। घर पर जब टीम पहुंची तो वह बंद मिला और परिवार का कोई सदस्य वहां मौजूद नहीं था। छापेमारी से जुड़ी तस्वीरें देखिए… इन 5 ठिकानों पर चली छापेमारी EOU की टीम ने एक साथ जिन पांच स्थानों पर तलाशी ली, उनमें सुपौल स्थित सरकारी कार्यालय, गौरवगढ़ (सुपौल) स्थित किराए का आवास, पटना के आशियाना दीघा रोड स्थित राज अपार्टमेंट (फ्लैट नं-305), पटना के बोरिंग रोड स्थित अक्षय अपार्टमेंट, सारण जिले के मढ़ौरा थाना क्षेत्र का पैतृक गांव जवइनिया…इन सभी जगहों से भारी मात्रा में दस्तावेज, निवेश से जुड़े कागजात और संपत्ति के साक्ष्य बरामद किए गए। सिलीगुड़ी में पत्नी के नाम 4 करोड़ की जमीन छापेमारी के दौरान सबसे बड़ा खुलासा पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में खरीदी गई जमीन को लेकर हुआ। यह जमीन आरोपी की पत्नी नीता कुमारी के नाम पर है, जो हाउस वाइफ हैं। जांच में पाया गया कि करीब 41.76 डिसमिल (लगभग 25 कट्ठा) जमीन 15 लाख रुपए प्रति कट्ठा की दर से खरीदी गई। इसकी कुल कीमत करीब 4 करोड़ रुपए बैठती है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस जमीन की खरीद में बड़े पैमाने पर नकद भुगतान किया गया है। इसके अलावा जमीन की बाउंड्री कराने में भी करीब 25 लाख रुपए खर्च होने के साक्ष्य मिले हैं। पटना में आलीशान फ्लैट और करोड़ों का इंटीरियर पटना के आशियाना दीघा रोड स्थित राज अपार्टमेंट में साल 2021 में खरीदे गए फ्लैट की कीमत करीब 65 लाख रुपए बताई गई है। लेकिन जांच के दौरान यह सामने आया कि इस फ्लैट का इंटीरियर और साज-सज्जा बेहद भव्य तरीके से किया गया है। इलेक्ट्रॉनिक सामानों और अन्य लग्जरी सामान पर करीब 1.5 करोड़ रुपए खर्च किए जाने का अनुमान है। अब इस खर्च का मूल्यांकन विशेषज्ञों से कराया जाएगा, ताकि वास्तविक लागत का पता चल सके। सास और अन्य रिश्तेदारों के नाम पर संपत्ति तलाशी के दौरान आरोपी की सास गायत्री देवी के नाम पर सोनपुर (सारण) में करीब 3 कट्ठा जमीन के दस्तावेज बरामद किए गए। यह जमीन साल 2016 में करीब 4.5 लाख रुपए में खरीदी गई थी। जांच एजेंसी को शक है कि आरोपी ने अपनी संपत्ति छिपाने के लिए परिवार के अन्य सदस्यों के नाम का इस्तेमाल किया है। दो स्कॉर्पियो, महंगी स्कूटी और अन्य खर्च छापेमारी के दौरान दो महिंद्रा स्कॉर्पियो (2023 और 2024 मॉडल) के खरीद से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। इन वाहनों की खरीद में करीब 42 लाख रुपए नकद खर्च किए गए। इसके अलावा करीब 2 लाख रुपए की एक स्कूटी खरीदने के भी साक्ष्य मिले हैं। बीमा, बैंक खाते और निवेश का जाल जांच में यह भी सामने आया कि अमरेंद्र कुमार, उनकी पत्नी और बच्चों के नाम पर कुल 11 बीमा पॉलिसियां ली गई हैं, जिनमें 12 लाख रुपए से अधिक का निवेश किया गया है। इसके अलावा HDFC बैंक में 4 खाते, SBI में 2 खाते, यूको बैंक में 1 खाता है। इन खातों में कुल 4.5 लाख रुपए जमा पाए गए हैं, जबकि SBI के PPF खाते में 20 लाख रुपए से अधिक की राशि मिली है। इसके साथ ही करीब 3 लाख रुपए के म्यूचुअल फंड निवेश के दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। 1.18 करोड़ के गहने और भारी मात्रा में बिल तलाशी के दौरान 1 करोड़ 18 लाख 45 हजार रुपए मूल्य के आभूषण बरामद किए गए हैं। इनके साथ बड़ी संख्या में ज्वेलरी खरीद के बिल (इनवॉइस) भी मिले हैं, जिनमें तनिष्क समेत कई प्रतिष्ठित दुकानों के बिल शामिल हैं। जांच एजेंसी को कई संदिग्ध लेन-देन के साक्ष्य भी मिले हैं। एक मामले में आरोपी द्वारा उमेश प्रसाद साहा के केनरा बैंक खाते में 4 लाख रुपए नकद जमा कराए जाने के प्रमाण मिले हैं। यह राशि 4 और 5 मई 2026 को जमा कराई गई थी। इसके अलावा क्लब रिसोर्टो वेकेशंस प्राइवेट लिमिटेड को 2.81 लाख रुपए के भुगतान के दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। 15 साल की नौकरी में इतनी संपत्ति पर सवाल अब तक की जांच में आरोपी के पास करीब 10 करोड़ रुपए से अधिक की चल-अचल संपत्ति होने का अनुमान लगाया गया है। अमरेंद्र कुमार साल 2010 में बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयनित हुए थे। पिछले 15 सालों से सरकारी सेवा में हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, इस अवधि में अर्जित संपत्ति उनके वेतन, बैंक ऋण और अन्य वैध आय स्रोतों से कहीं अधिक है, जिससे भ्रष्टाचार की आशंका मजबूत होती है। बेनामी संपत्ति की जांच तेज तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों से यह भी संकेत मिला है कि आरोपी ने कई संपत्तियां अन्य लोगों के नाम पर खरीदी हैं। अब इन सभी मामलों में विस्तृत जांच की जाएगी और संबंधित लोगों से पूछताछ की जाएगी। आर्थिक अपराध इकाई द्वारा जब्त किए गए दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और संपत्तियों के स्रोत की जांच की जा रही है। यह कार्रवाई राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख का संकेत देती है, जिससे प्रशासनिक महकमे में भी हलचल तेज हो गई है। यह कार्रवाई पुलिस उपाधीक्षक (DSP) स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में गठित विशेष टीम द्वारा की गई, जिससे पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया।