बीजेपी नेता विजय पाल को धमकी का मामला निकला फर्जी:रिकॉर्डिंग करवाकर रची साजिश, पुलिस सुरक्षा लेने को विदेशी नंबर से कॉल की प्लानिंग

पूर्व डिप्टी स्पीकर चौधरी वेद पाल के बेटे और भाजपा के वरिष्ठ नेता एडवोकेट चौधरी विजय पाल को मिली जान से मारने की धमकी का मामला जांच में फर्जी निकला है। पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि इस पूरे घटनाक्रम की साजिश खुद विजय पाल द्वारा रची गई थी। बताया जा रहा है कि पुलिस सुरक्षा हासिल करने के उद्देश्य से विदेशी नंबर से कॉल करवाई गई और उसकी रिकॉर्डिंग भी पहले से तय योजना के तहत करवाई गई। जिसमें मनोनित पार्षद को गवाह बनाया गया, लेकिन पार्षद ने पुलिस के सामने अपने बयान दर्ज करवाए और पूरे मामले का ही पटाक्षेप हो गया। एमसी विशेष वर्मा के बयान से खुलासा
मामले में उस समय नया मोड़ आया जब मनोनीत पार्षद विशेष वर्मा पुलिस के पास पहुंचे, उन्हें इस मामले में गवाह बनाया गया था। विशेष वर्मा ने बताया कि वह विजय पाल के पास बैठे थे, तभी विजय ने उन्हें कहा कि अभी पाकिस्तान के नंबर से कॉल आएगी और उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग करनी है। कुछ ही देर में कॉल आई और सामने वाले ने धमकी देनी शुरू कर दी। विशेष के अनुसार विजय पाल को पहले से ही कॉल आने की जानकारी थी। उन्होंने कहा कि उन्हें इस साजिश की जानकारी नहीं थी और बाद में उन्हें शक हुआ। उन्होंने पुलिस को अपने बयान दे दिए हैं। शिकायत में क्या लगाए थे आरोप
इससे पहले चौधरी विजय पाल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि 11 मई सोमवार रात उनके पास एक विदेशी नंबर से वॉट्सएप कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने खुद को बरार बताया और धमकी दी कि वह उन्हें और उनके परिवार को नुकसान पहुंचा सकता है। कॉलर ने हैंड ग्रेनेड से पूरे परिवार को उड़ाने की बात कही थी। 50 लाख की फिरौती मांगने का भी आरोप
विजय पाल ने यह भी बताया था कि कॉलर ने उनसे 50 लाख रुपए की फिरौती मांगी। पैसे नहीं देने पर पूरे परिवार को बम से उड़ाने की धमकी दी गई। कॉलर ने बातचीत के दौरान उनके पिता चौधरी वेद पाल का नाम लिया और घर का सही पता भी बताया, जिससे परिवार में डर का माहौल बन गया था। पुलिस ने बढ़ाई थी सुरक्षा
धमकी मिलने के बाद करनाल पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया था। विजय पाल के घर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई थी और आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही थी। सिविल लाइन थाना प्रभारी रामलाल ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। वहीं मॉडल टाउन चौकी इंचार्ज गीता ने भी पुष्टि की थी कि पुलिस तकनीकी आधार पर कॉल की लोकेशन और आरोपी की पहचान में जुटी हुई है। ग्रीन सिग्नल के बाद सामने आई सच्चाई
जांच के दौरान जैसे-जैसे तथ्यों की पुष्टि हुई, मामला संदिग्ध होता गया। विशेष वर्मा के बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया कि कॉल पहले से प्लान की गई थी। इससे यह भी सामने आया कि पुलिस सुरक्षा लेने के लिए इस तरह की साजिश रची गई। सुरक्षा बूथ हटने के बाद बढ़ी थी हलचल
बताया जा रहा है कि 5 मई को करनाल के एनडीआरआई चौक स्थित विजय पाल के घर के बाहर बने पुलिस सुरक्षा बूथ पर एनएचएआई द्वारा बुलडोजर चलाया गया था। यह बूथ एनएचएआई की जमीन पर बना होने के कारण अवैध माना गया। जानकारी के अनुसार विजय पाल ने खुद ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या को लेकर केंद्रीय मंत्री को शिकायत दी थी, जिसके बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई थी। मीडिया के सामने आकर सुनाई थी आपबीती
धमकी मिलने के बाद विजय पाल पहली बार मीडिया के सामने आए थे। उन्होंने बताया था कि कॉलर ने खुद को बरार बताते हुए कहा कि पुलिस से उसका नाम पूछ लेना, सब जानते हैं कि वह कौन है। उन्होंने यह भी कहा था कि कॉलर ने खुली चुनौती दी कि जितना भाग सकते हो भाग लो, पुलिस के पास जाओ या वीडियो बनाओ, उसे कोई फर्क नहीं पड़ता। 1984 में हुआ था बड़ा हमला
विजय पाल के परिवार पर पहले भी हमला हो चुका है। 9 मार्च 1984 को मधुबन के पास चौधरी वेद पाल की गाड़ी पर करीब 80 गोलियां चलाई गई थीं। इस हमले में वे बाल-बाल बच गए थे, लेकिन उनके ड्राइवर की मौत हो गई थी और गनमैन घायल हो गया था। यह घटना उस समय पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी थी। चौधरी वेद पाल का राजनीतिक सफर
चौधरी वेद पाल ने राजनीति की शुरुआत गांव कैड़रौली (यमुनानगर) से पंच के रूप में की थी। इसके बाद 1967-68 में वे मार्केट कमेटी रादौर के चेयरमैन बने और सक्रिय राजनीति में आगे बढ़े। विधायक से डिप्टी स्पीकर तक का सफर
1982 में वे घरौंडा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए और बाद में हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर बने। उन्होंने 24 जून 1982 से 23 जून 1987 तक इस पद पर कार्य किया। उस समय प्रदेश में मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल की सरकार थी। कैबिनेट दर्जा और राष्ट्रीय पहचान
चौधरी वेद पाल हरियाणा मार्केटिंग बोर्ड के चेयरमैन रहे, जहां उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला। वे ऑल इंडिया मार्केटिंग बोर्ड काउंसिल के चेयरमैन भी रहे। उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के हरियाणा प्रदेशाध्यक्ष और राष्ट्रवादी किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी काम किया। इसके अलावा वे डीएवी पीजी कॉलेज करनाल के चार बार प्रधान रहे। देश-विदेश में सक्रिय भूमिका
उन्होंने अपने जीवन में 44 देशों का दौरा किया और भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनके देश के पूर्व राष्ट्रपतियों ज्ञानी जैल सिंह, केआर नारायणन, शंकर दयाल शर्मा, प्रणव मुखर्जी और एपीजे अब्दुल कलाम के साथ करीबी संबंध रहे। 2023 में हुआ निधन
चौधरी वेद पाल का जनवरी 2023 में 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन के बाद भी उनका परिवार राजनीति और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय बना हुआ है।

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