बेअदबी कानून को अकाल तख्त ने किया नामंजूर:जत्थेदार गड़गज बोले-पंथ की इजाजत के बिना कैसे बना कानून; स्पीकर 8 मई को तलब

अमृतसर स्थित श्री अकाल तख्त साहिब पर आज एक महत्वपूर्ण पंथक बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न सिख जत्थेबंदियों, विद्वानों और वकीलों ने भाग लिया। इस बैठक में पंजाब सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए नए कानून और पंथ से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चा की गई। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने घोषणा की कि पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां को 8 तारीख को सुबह 11 बजे श्री अकाल तख्त साहिब पर तलब किया गया है, ताकि वे अपने पक्ष को स्पष्ट कर सकें। जत्थेदार ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की सेवा, सुरक्षा और मर्यादा से जुड़े किसी भी निर्णय में पंथ की सलाह अनिवार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कथित रूप से ‘जागत जोत एक्ट’ में संशोधन करते समय न तो श्री अकाल तख्त साहिब और न ही शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को विश्वास में लिया। उन्होंने यह भी कहा कि पंथ बेमुद्दत से जारी बेअदबी मामलों के दोषियों को सख्त सजा देने के पक्ष में है, लेकिन धार्मिक मर्यादा से जुड़े संवेदनशील मामलों को बिना विचार-विमर्श के लागू करना स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने कुछ प्रावधानों, जैसे धार्मिक जानकारी को सार्वजनिक वेबसाइटों पर डालने, को श्रद्धालुओं की सुरक्षा और निजता के लिए खतरा बताया। बैठक में 2015 से चल रहे बेअदबी मामलों और न्याय में देरी पर भी चिंता व्यक्त की गई। जत्थेदार ने कहा कि कई सरकारें बदलने के बावजूद मुख्य दोषियों तक पहुंच नहीं बन पाई है। उन्होंने मोड़ बम कांड का उल्लेख करते हुए पीड़ित परिवारों को न्याय न मिलने पर भी सवाल उठाए। बैठक में बंदी सिंहों की रिहाई का मुद्दा भी प्रमुख रहा। अंत में उन्होंने कहा कि समस्त पंथिक संगठनों ने एकजुटता दिखाई है और स्पष्ट किया है कि गुरु साहिब से जुड़े मामलों में बिना पंथ की सहमति कोई निर्णय स्वीकार नहीं किया जाएगा। 8 तारीख की पेशी पर अब सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। सजा पूरी कर चुके बंदी सिखों की रिहाई का मुद्दा उठा इसके अलावा भाई बलवंत सिंह राजोआना के मामले पर भी विशेष चर्चा की गई। बताया गया कि उनकी याचिका लंबे समय से लंबित है और अभी तक उस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। साथ ही उन बंदी सिखों के मुद्दे पर भी विचार किया गया, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है, लेकिन अभी तक रिहा नहीं किए गए हैं। जत्थेदार ने कहा कि बेअदबी मामलों की जड़ तक पहुंचना आवश्यक है और सरकारों को सच्चाई जनता के सामने लानी चाहिए। बैठक में सभी पक्षों ने गहन विचार-विमर्श किया और आगे की कार्रवाई पर निर्णय बाद में लेने की बात कही गई।

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