बोरवेल में गिरा 3 साल का बच्चा:होशियारपुर में घर के पास खेल रहा था, 4 जेसीबी मशीन से खुदाई करवाई जा रही

होशियारपुर में 3 साल का एक बच्चा खेलते समय बोरवेल में गिर गया। घटना का पता चलते ही गांव के लोग मौके पर जुट गए और बच्चे को बचाने की कोशिश शुरू कर दी गई। सूचना मिलने पर पुलिस और रेस्क्यू टीमें भी मौके पर पहुंच गईं। प्रशासन ने खुदाई के लिए 4 जेसीबी मशीन को लगाया है। एसएसपी संदीप कुमार मलिक मौके पर पहुंच गए हैं। डॉक्टरों की टीम, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड की टीम, एसडीआरएफ की टीम पहुंची। प्रशासन ने एनडीआरएफ की टीम को मौके पर बुलाया है। गांव वालों ने बताया कि बच्चा सीधे नीचे गिरा है और अंदर से उसकी हलचल महसूस हो रही है। इसी वजह से उम्मीद है कि उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा। समाजसेवी संस्था बाबा दीप सिंह सेवा दल के प्रमुख भाई मनजोत सिंह तलवंडी की टीम भी प्रशासन के साथ मिलकर बच्चे को बाहर निकालने में जुटी हुई है। फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। एचएचओ बोले- बच्चा अंदर हलचल कर रहा एचएचओ किरण सिंह ने बताया कि बच्चे का नाम वंश है। बच्चा सीधे पाइप के अंदर नहीं गिरा है। परिवार ने वहां करीब 15 दिन पहले पानी निकालने के लिए बोर करवाया था, जिसमें करीब 15 इंच का पाइप डाला गया था। बाद में पानी निकलने के बाद पाइप को ऊपर से बंद कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि बोरिंग और पाइप डालने के लिए आसपास गड्ढा खोदा गया था, लेकिन पाइप लगाने के बाद उस गड्ढे को पूरी तरह भरा नहीं गया। इसी दौरान बच्चा खेलते हुए वहां पहुंच गया। जगह रेतीली होने के कारण उसका पैर फिसल गया और वह पाइप के साथ बनी खाली जगह में फंस गया। किरण सिंह के मुताबिक, फिलहाल मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। कैमरे की मदद से बच्चे को देखा गया है और वह अंदर हलचल करता नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने की पूरी कोशिश की जा रही है और उम्मीद है कि अगले करीब 2 घंटे में रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा कर लिया जाएगा। घर के बाहर खेतों में खेल रहा था बच्चा जानकारी के अनुसार, गांव भेखोवाल में शुक्रवार शाम करीब 4 बजे 3 साल का वंश घर के बाहर खेतों में खेल रहा था, तभी अचानक उसका पैर फिसला और वह बोरवेल के गड्ढे में जा गिरा। घटना का पता चलते ही परिवार और गांव में हड़कंप मच गया। शोर सुनकर गांव के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और बच्चे को बचाने की कोशिश शुरू कर दी। लोगों ने बताया कि राहत की बात यह है कि बच्चा सीधे नीचे गिरा है और अंदर से उसकी हलचल महसूस हो रही है। इसी वजह से सभी को उम्मीद है कि उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा। एसएसपी खुद घटनास्थल पर पहुंचे घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। एसएसपी संदीप कुमार मलिक खुद घटनास्थल पर पहुंचे और पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की कमान संभाली। इसके साथ ही डॉक्टरों की टीम, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, एसडीआरएफ और अन्य रेस्क्यू टीमें भी मौके पर पहुंच गईं। बच्चे को बाहर निकालने के लिए प्रशासन ने मौके पर 4 जेसीबी मशीनें लगाईं। अंधेरा होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में कोई परेशानी न आए, इसके लिए लाइट और अन्य जरूरी इंतजाम भी किए गए। एसडीएम समेत कई अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद हैं और हालात पर नजर बनाए हुए हैं। खेतों में घर बनाकर वहीं रहता था परिवार जानकारी के मुताबिक बच्चा एक पंजाबी परिवार से संबंध रखता है, जो खेतों में घर बनाकर वहीं रह रहा है। घटना के बाद जिला प्रशासन के साथ समाजसेवी संस्थाएं भी बचाव अभियान में जुट गई हैं। बाबा दीप सिंह सेवा दल के प्रमुख भाई मनजोत सिंह तलवंडी की टीम भी प्रशासन के साथ मिलकर बच्चे को बाहर निकालने की कोशिश कर रही है। पंजाब में बोरवेल में गिरने के 3 मामले फतेहवीर सिंह केस (संगरूर, 2019): संगरूर जिले के भगवानपुरा गांव में जून 2019 में 2 साल का मासूम फतेहवीर अपने घर के पास खेलते समय 150 फीट गहरे और मात्र 7 इंच चौड़े बोरवेल में गिर गया था। यह बोरवेल पिछले 28 सालों से बंद था, लेकिन इसे केवल एक कपड़े की बोरी से ढका गया था। उसे बचाने के लिए NDRF और सेना ने 109 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। तकनीकी खामियों और समानांतर गड्ढे की खुदाई में हुई देरी के कारण प्रशासन को भारी आलोचना झेलनी पड़ी। जब उसे बाहर निकाला गया, तो दम घुटने और अंगों के खराब होने के कारण उसकी जान जा चुकी थी। ऋतिक/हृदयेश्वर केस (होशियारपुर, 2022) मई 2022 में होशियारपुर के गढदीवाला इलाके के बैरमपुर गांव में 6 साल का मासूम ऋतिक, जो एक प्रवासी मजदूर का बेटा था, खेत में खेल रहा था। इसी दौरान एक आवारा कुत्ते ने उसका पीछा किया, जिससे बचने के लिए वह भागा और अनजाने में 95 फीट गहरे खुले बोरवेल में जा गिरा। वह बच्चा करीब 70 फीट की गहराई पर फंस गया था। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सेना और NDRF को बुलाया और कैमरों के जरिए उस पर नजर रखी गई। करीब 8-9 घंटे के सघन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उसे बाहर तो निकाल लिया गया, लेकिन अस्पताल ले जाते समय उसने दम तोड़ दिया। इस घटना ने साबित किया कि फतेहवीर मामले के बाद भी लोग लापरवाही बरत रहे थे और अपने बोरवेलों को असुरक्षित छोड़ रहे थे। फाजिल्का का सफल रेस्क्यू (2024) साल 2024 में फाजिल्का में एक छोटा बच्चा अपने घर के पास बने बोरवेल के गड्ढे में अचानक गिर गया था। हालांकि, पिछले कड़वे अनुभवों से सीख लेते हुए स्थानीय प्रशासन और गांव के लोग तुरंत सक्रिय हो गए। सूचना मिलते ही मशीनों और राहत कर्मियों को तैनात किया गया। गनीमत यह रही कि बच्चा बहुत अधिक गहराई पर नहीं फंसा था और ऑक्सीजन की कमी नहीं होने दी गई। ग्रामीणों की सूझबूझ और प्रशासन की तत्परता से बच्चे को कुछ ही घंटों के भीतर सुरक्षित और जीवित बाहर निकाल लिया गया।

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