भिवानी जिले के बवानीखेड़ा में मकान टूटने के बाद राजनीति गतिविधियां तेज हो गई हैं। बवानी खेड़ा में चल रहे धरने पर कांग्रेस के कई बड़े नेता पहुंचे, इधर, मामले को देखते हुए डीसी साहिल गुप्ता ने बवानीखेड़ा में धारा 163 लागू कर दी है, ताकि माहौल शांत बना रहे। भिवानी जिलाधीश एवं जिला नगर आयुक्त साहिल गुप्ता ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत बवानी खेड़ा नगरपालिका क्षेत्र में कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त आदेश जारी किए हैं। जारी आदेशों के अनुसार नगरपालिका बवानीखेड़ा सीमा क्षेत्र के खेडी रोड स्थित वार्ड नंबर 7 में नगरपालिका भूमि पर किए गए अतिक्रमण को प्रशासन द्वारा ड्यूटी मजिस्ट्रेट एवं पुलिस बल की सहायता से हटाया गया। शांति व्यवस्था भंग होने की आशंका अतिक्रमण हटाने के बाद कुछ लोगों द्वारा मौके पर धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। जिससे असामाजिक तत्वों द्वारा शांति व्यवस्था भंग होने की आशंका जताई गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधीश ने खेडी रोड वार्ड नंबर 7 के धरना स्थल के 200 मीटर क्षेत्र में पांच या उससे अधिक व्यक्तियों के एकत्रित होने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही धरना स्थल के आसपास दो कि.मी. की परिधि में किसी भी व्यक्ति द्वारा लाठी, डंडा, तलवार, जेली, आग्नेयास्त्र या अन्य घातक हथियार तथा खुले पेट्रोल-डीजल के कंटेनर लेकर चलने पर भी रोक लगा दी गई है। दीपेंद्र हुड्डा भाजपा पर हमलावर सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डालते हुए लिखा कि “बवानीखेड़ा में धरनारत पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचकर उनकी मांगों का समर्थन किया। बीजेपी सरकार गरीब अमीर देखकर कानून का पाठ पढ़ा रही है। बीजेपी सरकार को 50 सालों से बसे परिवारों को उजाड़ने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। सरकार का काम गरीबों का घर बसाना है उजाड़ना नहीं। हमारी मांग है कि सरकार इन परिवारों को मुआवजा दे और प्रदेश के लोगों से माफी मांगे। बीजेपी सरकार इन्हें अकेला न समझे, जब तक इन परिवारों को न्याय नहीं मिलेगा तब तक विधानसभा से लेकर संसद तक हर लड़ाई लड़ेंगे। कांग्रेस सरकार के समय SC, BC वर्ग के करीब 4 लाख परिवारों को 100-100 गज के प्लॉट मिले, साथ ही बिजली, पानी के मुफ्त कनेक्शन भी दिए। लेकिन बीजेपी सरकार ने 12 साल में किसी गरीब को एक इंच जमीन भी नहीं दी। बार-बार दिया नोटिस बवानीखेड़ा के विधायक कपूर वाल्मीकि ने कहा कि 4 मकान तोड़े गए हैं। वहां 14 एकड़ जमीन लंबे समय से स्टेडियम के लिए प्रस्तावित है। बच्चे वहां खेलते हैं और सुविधाएं नहीं होने के कारण परेशानी होती है। सिटी पार्क भी बनना था वहां, जो लंबे समय से अटका हुआ था। विधानसभा में यह मुद्दा उठाने के बाद सिरे चढ़ा। इसके बाद नगर पालिका ने हाई वोल्टेज तारों को हटाने के लिए साढ़े 27 लाख रुपए भरी। वहां रह रहे लोगों को बार-बार नोटिस देकर भी आगाह किया गया था कि यहां से मकान हटा लें, अन्यथा तोड़ दिए जाएंगे। विपक्ष के हत्थे चढ़े विधायक कपूर वाल्मीकि ने कहा कि लोग कह रहे थे कि 40 साल पहले मकान बने हुए थे। ऐसा नहीं हैं, 4 में से 3 मकान तो दो-तीन साल पहले बने थे। एक मकान 10-15 साल पहले बना था। उनको नगर पालिका ने नियमानुसार हटाया है, इसमें मेरा कोई रोल नहीं। उनको आर्थिक मदद का आश्वासन भी दिया था, लेकिन वे विपक्ष के हत्थे चढ़ चुके हैं। विपक्ष को कोई काम नहीं है, वे तो ऐसे बैटरी लेकर ढूंढते फिरते हैं। इन चारों घरों के परिवार वालों को षड्यंत्र के तहत रोड पर लाने का काम किया है। दीपेंद्र व अन्य विधायकों का यहां आने का क्या स्टेटस विधायक कपूर वाल्मीकि ने कहा कि दीपेंद्र हुड्डा व उनके साथ विधायक भी धरने पर पहुंचे। प्रजातंत्र में सबको बोलने का अधिकार है। राजनीति ऐसे नहीं चमकती, जनता के काम करो और सुख-दुख में शामिल रहो। तब जाकर सरकार बनती है। दीपेंद्र हुड्डा का यहां आने का क्या स्टेटस था, बाहर के विधायकों का क्या स्टेटस था। पूरे प्रदेश में अगर कोर्ट आदेश करती है या जो नाजायाज कब्जा होता है, उसे प्रशासन हटाने का काम करता है। उसमें राजनीतिक व्यवक्ति का कोई लेना-देना नहीं होता।