मानसा की एक अदालत ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पूर्व विधायक नाजर सिंह मानशाहिया द्वारा दायर मानहानि मामले में 1 मई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। अदालत ने चेतावनी दी है कि अनुपस्थित रहने की स्थिति में उनकी जमानत रद्द की जा सकती है। यह मामला मुख्यमंत्री मान द्वारा वर्ष 2019 में नाजर मानशाहिया पर लगाए गए आरोपों से संबंधित है। मुख्यमंत्री ने उन पर कांग्रेस में शामिल होने के लिए 10 करोड़ रुपये लेने और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का चेयरमैन बनने जैसे आरोप लगाए थे। कोर्ट ने बार-बार सुनवाई से गैरहाजिर रहने पर नाराजगी जताते हुए फटकार लगाई। सोशल मीडिया पर झूठे आरोप लगाकर पहुंचाई प्रतिष्ठा को ठेस नाजर सिंह मानशाहिया ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया पर उन पर झूठे आरोप लगाकर उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई। मानशाहिया के अनुसार, उन्होंने तीन महीने तक मुख्यमंत्री के माफी मांगने का इंतजार किया, लेकिन ऐसा न होने पर उन्होंने अदालत का सहारा लिया। उन्होंने न्यायपालिका पर पूरा भरोसा जताया और कहा कि उन्हें न्याय अवश्य मिलेगा। मामले की सुनवाई करते हुए, मानसा अदालत ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को आगामी 1 मई को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।