लखनऊ विश्वविद्यालय में LURN शुल्क नहीं देना होगा:छात्रों के प्रदर्शन से मिली राहत, सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रमों की फीस बढ़ी

लखनऊ विश्वविद्यालय में सेल्फ फाइनेंस कोर्स की फीस में बड़ा इजाफा किया गया है। कई कोर्सों में फीस लगभग दोगुनी तक बढ़ गई है, जिससे छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। अहम बात यह है कि यह बढ़ोतरी तब की गई, जब प्रवेश के लिए आवेदन पहले ही हो चुके थे। हालांकि, सोमवार को लखनऊ विश्वविद्यालय ने LURN रजिस्ट्रेशन के लिए 100 रुपए का शुल्क नहीं लेने का ऐलान किया। अभी तक प्रवेश के लिए आवेदन फॉर्म भरने से पहले अभ्यर्थियों को LURN पंजीकरण के लिए 100 रुपए देना होता था। मगर, अब बिना शुल्क दिए पंजीकरण प्रक्रिया पूर्ण हो सकेगी। साथ ही पुस्तकालय की समय सीमा भी बढ़ा दी गई है। अब यह प्रतिदिन सुबह सात से रात आठ बजे तक खुलेगी। छुट्टियों के दिन सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक खुली रहेगी। ये निर्णय सोमवार कुलपति प्रोफेसर जेपी सैनी ने कई छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ फीस वृद्धि से जुड़े विषयों पर वार्ता कर लिया। बीकॉम फीस 25 हजार से बढ़कर 40 हजार रुपए की नई व्यवस्था का असर खासतौर पर बीएससी, बीबीए, बीकॉम जैसे लोकप्रिय पाठ्यक्रमों पर साफ दिख रहा है। बीएससी में जहां पहले करीब 13 हजार फीस थी, अब उसे बढ़ाकर लगभग 26 हजार रुपए कर दिया गया है। वहीं, बीकॉम में फीस 25 हजार से बढ़कर करीब 40 हजार रुपए हो गई है। बीबीए में फीस छह हजार से सीधे 13 हजार कर दी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि बढ़ते खर्च और संसाधनों की जरूरत को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। राज्य सरकार से मिलने वाली आर्थिक सहायता कम हुई LU प्रशासन के मुताबिक, राज्य सरकार से मिलने वाली सहायता कम हो रही है, जबकि विश्वविद्यालय में खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसी कारण सेल्फ फाइनेंस कोर्स की फीस में वृद्धि करनी पड़ी है। हालांकि, नियमित (रेगुलर) कोर्स की फीस में कोई बदलाव नहीं किया गया है। फीस बढ़ोतरी के साथ कुछ कोर्स में सीटें भी बढ़ाई गई हैं, ताकि ज्यादा छात्रों को मौका मिल सके, लेकिन बढ़ी हुई फीस को लेकर छात्रों में नाराजगी बनी हुई है। फीस बढ़ाने के पीछे दिया ये तर्क LU शिक्षक संघ से जुड़े पदाधिकारी ने बताया कि साल 1991 से प्रदेश सरकार ने LU को दी जाने वाले ग्रांट में बढ़ोतरी नहीं की है, जबकि खर्च लगातार बढ़ रहा है। फीस बढ़ाने के पीछे मुख्य कारण आर्थिक दबाव है। वहीं, LU प्रशासन का कहना है कि वेतन और अन्य खर्चों के लिए मिलने वाली राशि पर्याप्त नहीं है। ऐसे में खर्च और आय के अंतर को पूरा करने के लिए फीस बढ़ाने का फैसला लिया गया है। बेस्ट एजुकेशन इन मिनिमम फीस पर फोकस कुलपति प्रोफेसर जेपी सैनी ने बताया कि विश्वविद्यालय न्यूनतम शुल्क में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने पर फोकस कर रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन नहीं बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व और पारदर्शिता भी है। विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए सदैव तत्पर रहेगा।

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