लुधियाना में बुधवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब ED की टीम ने फिरोजपुर रोड स्थित ग्रीन सिटी इलाके में एक कारोबारी के ठिकानों पर दबिश दी। हालांकि शुरूआत में पता नहीं चल सका था कि रेड किस टीम ने की है। सूत्रों के मुताबिक रेड ED द्वारा की गई है। ED टीम कारोबारी के रिकॉर्ड, दस्तावेज, बैंक खातों और प्रॉपर्टी से जुड़ी जानकारी खंगाल रही है। चर्चा है कि मामला बेटिंग एप घोटाले से जुड़ा हुआ है और जांच एजेंसी को कारोबारी के लिंक इस मामले में मिले हैं। हालांकि अभी तक ED की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। कारोबारी हीरा सचदेवा से पूछताछ सूत्रों के अनुसार कारोबारी हीरा सचदेवा के ठिकानों पर सुबह-सुबह टीमें पहुंचीं। अधिकारियों ने घर और अन्य परिसरों में जांच शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि टीम कारोबारी से दस्तावेजों और कारोबारी लेनदेन को लेकर पूछताछ कर रही है। कई अन्य ठिकानों पर भी दबिश जानकारी के मुताबिक केंद्रीय एजेंसी ने शहर में कारोबारी के अन्य ठिकानों पर भी एक साथ दबिश दी है। कार्रवाई के दौरान टीम ने कई दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अपने कब्जे में लिए हैं। सुबह अचानक केंद्रीय एजेंसी की गाड़ियों के पहुंचने से ग्रीन सिटी इलाके में हड़कंप मच गया। एजेंसी ने अधिकारिक बयान नहीं किया जारी फिलहाल एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही कार्रवाई को लेकर स्थिति साफ हो पाएगी। 25 दिन पहले संजीव अरोड़ा के घर हुई थी ईडी के रेड iगौरतलब है कि 25 दिन पहले महादेव बेटिंग एप मामले में ED ने जालंधर के कारोबारी चंद्र शेखर अग्रवाल, हेमंत सूद और फिर 17 अप्रैल को संजीव अरोड़ा के ठिकानों पर भी रेड की थी। अब जांच के दौरान कुछ कारोबारी लिंक हीरा सचदेवा तक पहुंचने की बात सामने आ रही है। सूत्रों का कहना है कि हीरा सचदेवा पहले जनपथ एस्टेट में रहते थे, लेकिन बाद में उन्होंने कोठी बेच दी। टीम पहले वहां पहुंची, लेकिन जानकारी गलत होने के कारण बिना कार्रवाई लौटना पड़ा । इसके बाद अन्य ठिकानों पर दबिश दी गई। बेटिंग एप से जुड़े नेटवर्क की जांच तेज बताया जा रहा है कि ED ने बेटिंग एप से जुड़े नेटवर्क की जांच तेज कर दी है और आने वाले दिनों में शहर के कई अन्य बड़े नाम भी जांच के घेरे में आ सकते हैं। वहीं संजीव अरोड़ा पर मनी लॉन्ड्रिंग का ईडी को शक था। अरोड़ा की कंपनियां कई फर्जी निर्यात बिल बुक करने, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से फंड की राउंड-ट्रिपिंग करने और नॉन-एग्जिस्टेंट जीएसटी संस्थाओं से फर्जी खरीदारी दिखाने के मामले में अभी भी जांच के दायरे में हैं।