सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के 22 दिन बाद गुरुवार को उनके कैबिनेट का विस्तार हुआ। बिहार में पहली बार बीजेपी के CM बनने के बाद 35 मंत्रियों का कैबिनेट तैयार किया गया है। इसमें सबसे बड़ा फेरबदल विभागों के बंटवारे में हुआ है। सीएम सम्राट चौधरी ने पैसा और पावर दोनों अपने पास रखा है। सम्राट न केवल अपने पसंद के नेताओं को मंत्री बनाने में कामयाब हुए हैं, बल्कि कैबिनेट में उनके इलाके अंग की उपस्थिति भी बढ़ी है। इसके अलावा शाहाबाद की जगह तिरहुत को ज्यादा तवज्जो दी गई है। भास्कर एनालिसिस में पढ़िए विभागों के बंटवारे में सम्राट चौधरी के कैबिनेट में किस मंत्री का कद बढ़ा और किनका घटा है। मिथिलांचल और अंग को सबसे ज्यादा तवज्जों क्यों दी गई है। सम्राट कैबिनेट में मिथिलांचल, अंग और तिरहुत का दबदबा CM बदलते ही सरकार में इलाकों का दबदबा भी बदल गया है। 6 महीने पहले बनी नीतीश सरकार में जहां मगध और शाहाबाद का जलवा था। अब सम्राट सरकार में मिथिलांचल, अंग और तिरहुत का दबदबा है। इस बार सबसे ज्यादा 7 मंत्री मिथिलांचल से बनाए गए हैं। इसके बाद तिरहुत और अंग से 6-6 मंत्री बने हैं। वहीं, मगध से 5 और शाहाबाद से 2 मंत्री बनाए गए हैं। कारण जानिए- मिथिलांचल की 87% और अंग की 99% सीटों पर NDA का कब्जा 2025 के चुनाव में मिथिलांचल में बीजेपी को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है। यहां के 6 जिलों की 87% सीटों पर NDA का कब्जा है। 46 में से 40 सीटें NDA ने जीती है। यह 2020 की तुलना में 10 ज्यादा है। तिरहुत की बात करें तो यहां की 6 जिलों की 64 सीटों में से 55 (लगभग 86%) NDA के खाते में आई हैं। ये 2020 के विधानसभा चुनाव से 19 सीटें ज्यादा है। वहीं, अंग की बात करें तो यहां के 6 जिलों की 99% सीटों पर NDA का कब्जा है। 25 में से 24 सीटों पर NDA के विधायक हैं। 2020 की तुलना में 7 सीटें ज्यादा मिली हैं। सम्राट कैबिनेट में इन 13 जिलों से 1 भी मंत्री नहीं सारण, शेखपुरा, अरवल, औरंगाबाद, रोहतास, बक्सर, सीवान, बांका, खगड़िया, कटिहार, अररिया, सीतामढ़ी और पूर्वी चंपारण । सम्राट कैबिनेट में 70% दलित और पिछड़े मंत्री CM सम्राट चौधरी के साथ डिप्टी CM विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव समेत कुल 35 मंत्री बनाए गए हैं। नई कैबिनेट में सभी वर्गों को साधने की कोशिश की गई है। 70% से ज्यादा मंत्री पिछड़े और दलित वर्ग से हैं। 9 सवर्ण और एकमात्र अल्पसंख्यक को सम्राट कैबिनेट में जगह मिली है। OBC-11, EBC-7 और SC वर्ग से 7 मंत्री बने हैं। BJP और JDU दोनों ने अपने कोटे से एक-एक यादव को मंत्री बनाया है। सम्राट कैबिनेट में एकमात्र मुस्लिम जदयू के जमा खान हैं। सवर्ण की बात करें तो भाजपा ने 2 और जदयू ने 1 भूमिहार को मंत्री बनाया है। सबसे ज्यादा 4 राजपूत को कैबिनेट में जगह मिली है। बीजेपी ने 2, जदयू ने 1 और चिराग के LJPR ने एक राजपूत नेता को मंत्री बनाया है। ब्राह्मण में बीजेपी की तरफ से मात्र दो चेहरे को जगह दी गई है। बिहार विधानसभा में जाति के आधार पर विधायकों की हिस्सेदारी को समझें तो इस बार सबसे ज्यादा 83 विधायक OBC कैटेगरी से हैं। EBC के 37, SC-ST के 40 और सवर्ण के 72 विधायक चुनाव जीते हैं। इस लिहाज से देखें तो सम्राट चौधरी ने अपनी कैबिनेट में जातियों को उनकी संख्या के आधार हिस्सेदारी के आधार पर बैलेंस बनाने की कोशिश की है। बिहार सरकार के कैबिनेट में पहली बार 5 महिलाओं को जगह दी गई है। जाति से नई लीडरशिप तैयार करने का मैसेज अगर सम्राट सरकार की कैबिनेट को देखें तो हर जाति से नया लीडर तैयार करने का मैसेज दिया गया है। बीजेपी ने राजपूत से संजय टाइगर, श्रेयसी सिंह, भूमिहार से इंजीनियर शैलेंद्र, दलित से लखींद्र पासवान और नंद किशोर राम तो मल्लाह से रमा निषाद जैसी नई लीडरशिप को आगे की है। वहीं, जदयू में निशांत काल का आरंभ हुआ है। उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे को पावर शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू की है। पावर और पैसा सब BJP के पास- समाज कल्याण जदयू करेगी इस बार मंत्रियों के बीच विभागों के बंटवारे पर नजर डालें तो सत्ता ट्रांसफर के साथ ही पैसा और पावर दोनों बीजेपी के पास शिफ्ट हो गया है। भाजपा के नेताओं के पास 26 तो जदयू के नेताओं के पास 20 विभाग हैं। सरकार का जो पावर पहले नीतीश कुमार अपने पास रखते थे वो अब सम्राट चौधरी के पास शिफ्ट हो गया है। पैसे के मामले में सबसे ज्यादा बजट वाला शिक्षा विभाग जदयू से ट्रांसफर होकर बीजेपी के पास आ गया है। इंडस्ट्री लगाने और रोजगार का जिम्मा भी बीजेपी ने अपने पास रखा है। बिहार के बजट 2026-27 के मुताबिक, पैसे के लिहाज से टॉप-5 विभागों की बात करें तो इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, गृह, नगर विकास, ऊर्जा और ग्रामीण विकास विभाग हैं। इनमें स्वास्थ्य, ग्रामीण कार्य, ऊर्जा और ग्रामीण विकास विभाग जदयू के पास है। शिक्षा, नगर विकास और पथ निर्माण विभाग बीजेपी ने अपने पास रखा है। पावर की बात करें तो ये जदयू के नीतीश कुमार से बीजेपी के सम्राट के पास शिफ्ट हो गया है। पहले सम्राट ने गृह मंत्रालय अपने पास लिया था। अब IAS-IPS के ट्रांसफर पोस्टिंग का पावर भी उनके पास रहेगा। इसके अलावा मंत्रिमंडल सचिवालय से लेकर सिविल विमानन भी CM ने अपने पास रखा है। फर्स्ट टाइमर के हाथ में बिहार के शिक्षा और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी अगर मंत्रियों के जिम्मेदारी की बात करें तो बिहार के दो सबसे बड़े और अहम विभाग फर्स्ट टाइमर को दिए गए हैं। पहली बार मंत्री बने निशांत कुमार को स्वास्थ्य तो मिथिलेश तिवारी को शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। श्रेयसी सिंह पर भरोसा जताते हुए उन्हें उद्योग जैसा बड़ा विभाग दिया गया है। पथ निर्माण जैसे अहम विभाग भी जिम्मेदारी पहली बार मंत्री बने इंजीनियर शैलेंद्र को दी गई है।
विजय सिन्हा और रामकृपाल यादव के विभाग बदले गए हैं। दोनों को पहले की तुलना में कम बजट और पावर वाला विभाग मिला है। विजय सिन्हा को कृषि तो रामकृपाल को सहकारिता विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। जदयू के कोटे में भी बड़ा फेरबदल किया गया है। नीतीश कुमार के करीबी रहे अशोक चौधरी को खाद्य उपभोक्ता विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। लेसी सिंह को भवन निर्माण विभाग का जिम्मा मिला है। सुनील सिंह को शिक्षा के बदले ग्रामीण कार्य जैसा बड़ा विभाग मिला है।