सोनीपत के गांव ककरोई में एक दर्दनाक हादसे में एक किसान की जान चली गई। गेहूं की कटाई के बाद खेत में बचे फसल अवशेष (फांस) में लगी आग को बुझाने के प्रयास में वह खुद आग की चपेट में आ गया। तेज हवा के कारण आग तेजी से फैल रही थी और आसपास के खेतों को बचाने की कोशिश में किसान अपनी जान गंवा बैठा। वहीं समय पर फायर बिग्रेड की हड़ताल के कारण भी समय पर गाड़ी नहीं पहुंच पाई। मामले में पुलिस जांच कर रही है। तेज हवा से भड़की आग, फैलता रहा धुआं
गांव ककरोई के रहने वाले 65 वर्षीय किसान उमेद बुधवार को करीबन 12 बजे घर से खाना खाकर निकला था। जहां किसी ने जानकारी दी कि उसके खेतों के फांस में आग लगी है। वह खेत में पहुंचा तो खेतों में फसल अवशेष में लगी आग तेज हवा के कारण लगातार फैल रही थी। पूरे क्षेत्र में घना धुआं फैल गया था, जिससे स्थिति और भी खतरनाक हो गई। आसपास के खेतों में गेहूं की फसल खड़ी थी, जिसे बचाने के लिए किसान उमेद मौके पर पहुंचा। आग और धुएं के बीच फंसा किसान
आग बुझाने के दौरान अचानक उमेद के कपड़ों में आग लग गई। एक ओर जहां वह आग की लपटों में घिर गया, वहीं दूसरी तरफ धुएं के कारण उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी। उसने खुद को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन हालात तेजी से बिगड़ते चले गए। बचने की कोशिश में खेतों की ओर भागता रहा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कपड़ों में आग लगने के बाद उमेद खुद को बचाने के लिए खेतों से गांव भदाना की सीमा की ओर भागता रहा। वह लगातार आग बुझाने की कोशिश करता रहा, लेकिन जब तक आसपास के किसान और मजदूर मौके पर पहुंचे, तब तक वह गंभीर रूप से झुलस चुका था और मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई। फायर ब्रिगेड की देरी और रास्ते में अड़चन
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने फायर ब्रिगेड को बुलाया। पहले सोनीपत सेक्टर 23 फायर स्टेशन से गाड़ी रवाना हुई तो वह खेतों में नहर की पटरी के पास गाड़ी फंस गई, जिससे देरी हो गई। जब तक फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंचती, तब तक उमेद की मौत हो चुकी थी। वहीं बाद में खरखौदा की टीम ने मौके पर पहुंच कर खेतों की आग पर काबू पाया। खेती कर परिवार का कर रहा था पालन-पोषण
जानकारी के अनुसार, उमेद करीब 3-4 एकड़ जमीन पर खेती करता था। करीब 10 दिन पहले ही उसने अपने खेत में गेहूं की कटाई करवाई थी। दिन में उसे खेत में आग लगने की सूचना मिली, जिसके बाद वह दोपहर करीब 12 बजे आग बुझाने के लिए पहुंचा था। परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
उमेद अपने पीछे पत्नी और दो बेटियां छोड़ गया है, जिनकी शादी पहले ही हो चुकी है। उसके तीन भाई हैं, जो अलग-अलग अपने परिवार के साथ रहते हैं। इस हादसे के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। घटना के बाद ग्रामीणों ने उमेद का अंतिम संस्कार कर दिया। वहीं, पुलिस को सूचना देर से मिली, जिसके बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।