सीचेवाल मॉडल के तहत किए गए काम ने भी सिस्टम की पोल खोल दी है। हैबोवाल में बनाए गए तालाबों से 105 टन गोबर निकाला गया, जबकि डोर-टू-डोर गोबर कलेक्शन सिर्फ 15 टन रहा। ताजपुर में भी 88 टन गोबर तालाबों से निकला, जबकि तय स्थानों से केवल 28 टन ही इकट्ठा हुआ। यानी ज्यादातर गोबर सीधे सिस्टम में जाने के बाद ही पकड़ा जा रहा है। निगम अधिकारियों के अनुसार हैबोवाल और ताजपुर क्षेत्रों से कुल 426 टन गोबर इकट्ठा किया गया, लेकिन इसके बावजूद 224 टन गोबर अभी भी बुड्ढे दरिया और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों में पहुंच रहा है। हैबोवाल ईटीपी प्लांट की छह मोटरें बंद होने का मामला भी इसी लापरवाही की मिसाल बनकर सामने आया। मोटरें बंद होते ही गोबर युक्त पानी डेयरी कॉम्प्लेक्स की गलियों में फैल गया और लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। सीचेवाल टीम की रिपोर्ट के बाद प्रशासन हरकत में आया और मोटरों को चालू करवाया गया। संत सीचेवाल ने साफ कहा कि रंगला पंजाब का सपना तभी साकार होगा, जब दरिया पूरी तरह साफ होंगे। उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि पंजाब की पहचान उसके दरियाओं से है और इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दरिया की सफाई में सुधार के बावजूद असली लड़ाई अब सिस्टम को ठीक करने की है। क्योंकि गंदगी अब भी वहीं से आ रही है, जहां से उसे रुकना चाहिए था। भास्कर न्यूज | लुधियाना बुड्ढे दरिया की सफाई को लेकर चल रही मुहिम से पानी की गुणवत्ता में सुधार तो हुआ है, लेकिन सिस्टम की खामियां अब भी सामने आ रही हैं। राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल की अगुवाई में दरिया का टीडीएस स्तर 3500 से घटकर 675 तक पहुंच गया है। इसके बावजूद गोबर और गंदे पानी की सप्लाई पूरी तरह बंद नहीं हो पाई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब 426 टन गोबर इकट्ठा किया जा चुका है, तो 224 टन गोबर अब भी दरिया और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों तक कैसे पहुंच रहा है। आंकड़े बताते हैं कि नगर निगम और डेयरी सिस्टम की कार्यप्रणाली में जमीनी स्तर पर गंभीर खामियां बनी हुई हैं। दरिया में गंदगी से भरे बोरे फेंकने का चलन भी बढ़ रहा है, जो सफाई अभियान के लिए नई चुनौती बन गया है। निरीक्षण के दौरान लाडोवाल बाईपास के पास जैनपुर, तलवाड़ा और बारनहाड़े की सीवरेज लाइनों में भी कई खामियां सामने आईं। इसके अलावा बल्लोकी पुल के पास बाड़ेवाल ड्रेन के जरिए डेयरियों का गंदा पानी सीधे दरिया में गिरता पाया गया।