ऊना में क्षतिग्रस्त पुल को लेकर कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने:पूर्व विधायक रायजादा ने किया निरीक्षण, BJP MLA सत्ती ने बताया कोरी ड्रामेबाजी

हिमाचल के ऊना में क्षतिग्रस्त रामपुर पुल को लेकर कांग्रेस और भाजपा के नेता आमने-सामने आ गए हैं। मंगलवार को पूर्व विधायक सतपाल रायजादा ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों के साथ पुल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान, रायजादा ने PWD अधिकारियों को निर्देश दिए कि नए पुल के लिए जल्द से जल्द विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर प्रदेश सरकार को भेजी जाए। उन्होंने कहा कि बरसात से पहले पुल निर्माण कार्य शुरू करने के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी की जाएं। हाल ही में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के ऊना दौरे के समय, सतपाल रायजादा ने रामपुर के क्षतिग्रस्त पुल का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। इस पर मुख्यमंत्री ने पुल निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपए देने की घोषणा की थी। इसके बाद PWD अधिकारियों ने नए पुल के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। दो साल पहले बारिश में क्षतिग्रस्त हुआ थ पुल यह पुल लगभग दो साल पहले भारी बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हो गया था। तब से यातायात को सुचारू रखने के लिए एक अस्थायी बेली ब्रिज का निर्माण किया गया था, जिसकी हाल ही में फिर से मरम्मत की गई है। PWD डिवीजन ऊना के अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) कुलदीप सिंह ने बताया कि रामपुर पुल की डीपीआर जल्द तैयार की जाएगी। इसके बाद इसे अनुमोदन के लिए प्रदेश सरकार को भेजा जाएगा। भाजपा विधायक ने बताया कोरी ड्रामेबाजी दूसरी ओर, ऊना के विधायक और हिमाचल भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सतपाल सत्ती ने पूर्व विधायक सतपाल रायजादा के पुल निरीक्षण को ‘कोरी ड्रामेबाजी’ करार दिया है। सत्ती ने कहा कि यह पुल रायजादा के घर से मात्र 3 किलोमीटर दूर है, लेकिन उन्हें यहां तक पहुंचने में 3 साल लग गए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पुल क्षतिग्रस्त हुआ था, तब रायजादा को इसकी याद नहीं आई और अब चुनाव नजदीक आने पर उन्हें वोटों की चिंता सता रही है। सत्ती ने कहा कि यदि रायजादा को जनता की चिंता होती, तो पुल क्षतिग्रस्त होने के समय ही पुनर्निर्माण या मरम्मत की प्रक्रिया शुरू की जा सकती थी। 2023 से लगातार विधानसभा में उठा रहा हूं मुद्दा : सतपाल सत्ती उन्होंने कहा कि 2023 की प्राकृतिक आपदा के बाद से लेकर आज दिन तक विधानसभा का कोई ऐसा सत्र नहीं होगा, जिसमें उन्होंने इस पुल की मरम्मत या फिर पुल के पुनर्निर्माण की मांग सरकार के समक्ष न उठाई हो। लेकिन मौजूदा सरकार को कभी इस तरफ आने जाने वाले लोगों का दर्द दिखाई नहीं दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा इस पुल के लिए 10 करोड रुपए की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि अब पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव और उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनाव की चिंता में ही सही मुख्यमंत्री को कम से कम इस टूटे हुए पल की याद तो आई।

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