‘मुआवजा छोड़िए, बिहार सरकार इलाज तक नहीं करा पाई’:नालंदा भगदड़ के घायल बोले- जेब से 30 हजार लगाए, दवाई खा-खाकर पेट में इंफेक्शन हो गया

’31 मार्च को शीतला माता मंदिर में भगदड़ हुई, जिसमें मेरी बेटी घायल हो गई। एक अप्रैल को अधिकारियों के कहने पर मैंने बेटी के अस्पताल का पुर्जा, बैंक अकाउंट, आधार कार्ड दे दिया। घटना के 17 दिन बाद भी अब तक मुआवजा नहीं मिला है। दो बार अधिकारियों के दफ्तर का चक्कर काट चुका हूं। अधिकारियों से पूछे जाने पर उनका कहना है कि हम लोगों ने डिटेल ऊपर भेज दी है। हमें नहीं पता कि कब मुआवजा राशि आएगी।’ नालंदा के मघड़ा शीतला माता मंदिर में हुई भगदड़ में घायल हुई साक्षी के पिता बीरेंद्र कुमार ने दैनिक भास्कर से बातचीत में ये बातें कही है। भगदड़ को 17 दिन गुजर चुके हैं, लेकिन घायलों को अब तक मुआवजा राशि नहीं मिली है। दरअसल, भगदड़ के बाद केंद्र सरकार की ओर से एलान किया गया था कि घायलों के परिजन को 50-50 हजार रुपए मुआवजा राशि दी जाएगी। भगदड़ में कुल 9 लोग घायल हुए थे। भगदड़ के सभी 9 घायलों के परिजन से दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने शुक्रवार को संपर्क किया। तीन घायलों के साथ उनके परिजन सदर अस्पताल में ही मिल गए। परिजन ने घायलों की वर्तमान स्थिति को लेकर क्या बताया? मुआवजा राशि को लेकर क्या कहा? मुआवजा राशि को लेकर एडीएम (आपदा) ने क्या बताया? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले भगदड़ से जुड़ी 3 तस्वीरें देखिए जानिए घायलों के परिजन ने मुआवजा राशि को लेकर क्या बताया? भगदड़ में घायल 17 साल के मोहित की मां सरिता देवी ने बताया कि 31 मार्च को मेरा बेटा मोहित मघड़ा के माता शीतला मंदिर में पूजा करने गया था। भगदड़ के दौरान भीड़ में दब कर घायल हो गया था। घटना वाले दिन मोहित मंदिर में बेहोश हो गया था। जब हम लोगों को सूचना मिली तो हम लोग घटनास्थल पर पहुंचे। मंदिर कैंपस में बेटा नहीं मिला। जानकारी मिली कि बेटे को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है। हम लोग अस्पताल पहुंचे तो बेटा बेड पर बेहोश मिला था। अफसरों को डिटेल दी थी, अब तक मुआवजा नहीं मिला सरिता देवी ने बताया कि घटना के बाद सरकार की ओर से मुआवजे का एलान किया गया था। कहा गया था कि घायलों को 50-50 हजार रुपए दिए जाएंगे, लेकिन घटना के 17 दिन हो चुके हैं, हम लोगों को एक रुपए भी नहीं मिले हैं। अधिकारियों की ओर से मांगे जाने पर तीन से चार दिन पहले ही बेटे का आधार कार्ड, फोटो, बैंक अकाउंट आदि डिटेल दे दिए है। वहीं, मोहित के पिता मिथलेश कुमार ने बताया कि अब तक मुआवजा नहीं मिला है। अधिकारियों की ओर से डिटेल मांगे जाने के बाद ब्लॉक में बेटे मोहित की सारी डिटेल, इलाज का पुर्जा, बैंक अकाउंट, आधार कार्ड की डिटेल दे दिया था। बेटे की तबीयत बार-बार खराब हो जा रही है, इसलिए दोबारा ब्लॉक नहीं जा पाया। अकाउंट में तो पैसा नहीं आया है, बेटे का इलाज कराकर सोमवार को ब्लॉक जाऊंगा। दवाई खाकर पेट में इंफेक्शन हो गया, 30 हजार खर्च हो चुके हैं घायल पंकज कुमार ने बताया कि घटना में मुझे चोट आई थी। मेरा सदर अस्पताल में इलाज चला था। इसके बाद मैंने अपना इलाज प्राइवेट अस्पताल में कराया। अब तक इलाज में 25 से 30 हजार रुपए खर्च हो चुके हैं। इलाज में अभी और खर्च होगा। पेट में इंफेक्शन है। इससे नींद नहीं आती है। रात में इंजेक्शन लेना पड़ता है। पंकज ने बताया कि भगदड़ में मैं लोगों के पैरों से दब गया था, करीब आधे घंटे तक मेरा पेट दबा रहा। हादसे के बाद मुझे सदर अस्पताल लाया गया तो डॉक्टरों ने मेरा इलाज किया। 15 दिन से घर पर हूं, छुट्टी भी खत्म हो चुकी है पंकज ने बताया कि घटना के अगले दिन ही मुझे डिस्चार्ज कर दिया गया। मैं घर आ गया, लेकिन बदन, पेट और सीने में दर्द अब भी है। मैं वापस दूसरे दिन सदर अस्पताल पहुंचा। यहां डॉक्टरों ने बताया कि आप एक महीने तक दवा खाते रहिए, अभी आपको दवा खाना ही पड़ेगा। मैं 15 दिन से घर पर ही हूं, जहां जॉब करता हूं, वहां मेरी छुट्टी भी खत्म हो चुकी है। बिहार सरकार ने कहा था कि घायलों का मुफ्त में इलाज कराया जाएगा, मुआवजा तो छोड़िए, सरकार इलाज तक नहीं करा पा रही है। 50 हजार मुआवजा देने की बात कही गई थी, एक रुपए भी नहीं मिला है। 12 से 15 दिन पहले ही ब्लॉक के अधिकारियों ने मुझसे डॉक्यूमेंट्स मांगे थें। मैंने अपनी डिटेल और अस्पताल का बिल वगैरह दे दिया था, लेकिन आज तक मुआवजा नहीं मिल पाया है। अफसर कहते हैं- हमें नहीं पता कि मुआवजा कब तक मिलेगा हादसे में घायल साक्षी के पिता बीरेंद्र कुमार ने बताया कि बेटी को 24 घंटे बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी। एक दिन बेटी ठीक रही, लेकिन फिर उसके शरीर में दर्द होने लगा। इसके बाद बेटी को प्राइवेट अस्पताल में दिखाया। एमआईआर, सीटी स्कैन कराया। शरीर पर कई जगह चोट आई थी। बीरेंद्र कुमार ने बताया कि बेटी मघड़ा मंदिर में पूजा करने गई थी। भगदड़ की सूचना मिली तो हम लोग मंदिर गए। यहां बेटी नहीं मिली। काफी तलाश के बाद पता चला कि घायलों को अस्पताल ले जाया गया है। इसके बाद सदर अस्पताल में बेटी का इलाज चला। एक अप्रैल को ही अधिकारियों ने बेटी के डॉक्यूमेंट्स लिए गए थे। अब तक मुआवजा नहीं मिला है। जब अधिकारियों के पास जाते हैं तो वे ये कहकर हमें वापस भेज देते हैं कि हमें कुछ पता नहीं है। मैं अक्सर बैंक अकाउंट चेक करता हूं, लेकिन अब तक मुआवजा नहीं मिला। अंदरूनी चोटों के कारण आज भी बेड पर हूं राजगीर की नेकपुर की रहने वाली अनुष्का सिन्हा ने बताया कि हादसे के बाद मुझे अस्पताल ले जाया गया था। मैं 8 से 9 घंटे तक ऑक्सीजन सपोर्ट पर थी। मुझे इलाज के लिए सदर अस्पताल से पावापुरी अस्पताल रेफर किया गया था। इलाज के बाद मुझे छुट्टी दे दी गई थी, लेकिन आज भी अंदरुनी चोटों की वजह से बिस्तर पर हूं। करीब दस दिन पहले राजगीर प्रखंड कार्यालय में आधार कार्ड, पति का विवरण और बैंक पासबुक की फोटोकॉपी जमा की थी, लेकिन अब तक एक रुपया भी खाते में नहीं आया है। घायलों में शामिल नवादा के वारसलीगंज की रहने वाली आशा देवी, गीता देवी के परिजन ने बताया कि घर से ब्लॉक की दूरी और घायल की देखभाल की वजह से हम लोग बार-बार सरकारी दफ्तर के चक्कर नहीं काट सकते। अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। वहीं, हादसे में मारी गई मालो देवी के पति जोगेंद्र गोप ने बताया कि उन्हें 6 लाख का मुख्य मुआवजा तो मिल गया, लेकिन अन्य योजनाओं के तहत मिलने वाली 20 हजार रुपए की अतिरिक्त सहायता राशि के लिए उन्हें आज भी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *