हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा स्थित बकलोह सैन्य छावनी के स्पेशल फोर्सेस ट्रेनिंग स्कूल में प्रशिक्षण के दौरान शहीद हुए 26 साल के भारतीय सेना के जवान मोहित का फरीदाबाद जिले के उनके पैतृक गांव साहूपुरा में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। मोहित के बड़े भाई ने उसकी चिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान भारी संख्या में लोग जवान की अंतिम यात्रा में शामिल हुए। बाक्सिंग का अभ्यास कर रहा था 18 अप्रैल को गांव साहूपुरा निवासी मोहित चंबा स्थित बकलोह सैन्य छावनी के स्पेशल फोर्सेस ट्रेनिंग स्कूल में बाक्सिंग का अभ्यास कर रहा था। इस दौरान उसको कान के पास सर में चोट लग गई। जिसके बाद उनको इलाज के लिए बकलोह स्थित सैन्य अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया। इलाज के दौरान उनकी हालत बिगड़ गई और रविवार को मौत हो गई। मोहित के अंतिम यात्रा में केन्द्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, बल्लभगढ़ विधायक मूलचंद शर्मा सहित कई राजनितिक दलों के लोग पहुंचे। सभी से मोहित के परिवार को सांत्वना दी। 8 साल पहले हुआ था भर्ती मोहित भारतीय सेना की 29 पैरा इकाई से जुड़ा हुआ था, इस समय वह आगरा में तैनात था। मोहित भारतीय सेना में 8 साल पहले भर्ती हुआ था। उसकी पोस्टिंग आगर में थी। 40 दिन पहले ही वह हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में स्थित बकलोह सैन्य छावनी के स्पेशल फोर्सेस ट्रेनिंग स्कूल में ट्रेनिंग के लिए गया था। 5 अप्रैल को मोहित यहां पर ट्रेनिंग के गया था। करीब 3 महीने पहले हुई शादी मोहित की शादी इसी साल फरवरी में हुई थी, वह तीन भाइयों में सबसे छोटा था। मोहित का बड़ा भाई सरकारी अफसर है और बीच वाला भाई प्राइवेट जॉब करता था। मोहित अपने परिवार का सबसे छोटा बेटा था। देश की सेवा करना चाहता था मोहित का शव पहले उनके त्रिखा कालोनी निवास पर ले जाया गया। जहां से उसकी अंतिम यात्रा निकाली गई और उनके पैतृक गांव साहूपुरा के शमशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। मोहित के परिवार के लोगों ने बताया कि वह शुरू से ही सेना में रहकर देश की सेवा करना चाहता था। इसके लिए उसने सेना की तैयारी की और पहली ही बार में सेना में सिपाही के पद पर भर्ती हो गया, उनको मोहित की शहादत पर गर्व है।