कर्मचारी का अंतिम नियोक्ता ही देगा पूरा बकाया, पेंशन हक है मेहरबानी नहीं:कोर्ट

पंजाब के सरकारी और नगर निकायों के रिटायर कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले सभी लाभों का भुगतान सुनिश्चित करना अंतिम नियोक्ता की जिम्मेदारी होगी। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने इस संबंध में कई याचिकाओं का निपटारा करते हुए निर्देश दिया कि विभागों के बीच तालमेल की कमी या प्रशासनिक देरी का खामियाजा कर्मचारियों को नहीं भुगतना पड़ेगा। लंबित रिटायर बकाया जैसे संशोधित पेंशन, ग्रेच्युटी, लीव इनकैशमेंट और एरियर दो महीने के भीतर जारी किए जाएं। यदि तय समय सीमा से अधिक देरी होती है, तो कर्मचारियों को 6% वार्षिक ब्याज भी देना होगा। कोर्ट ने फैसले में दो टूक कहा कि रिटायरमेंट लाभ कोई दया या मेहरबानी नहीं बल्कि कर्मचारियों का कानूनी अधिकार है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विभागों के बीच किसी प्रकार का विवाद या योगदान से जुड़ी प्रक्रिया कर्मचारी के अधिकारों में बाधा नहीं बन सकती। प्रशासनिक लापरवाही और उदासीनता : राज्य सरकार ने देरी के पीछे प्रशासनिक प्रक्रियाओं और औपचारिकताओं का हवाला दिया जिसे अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे सामान्य कारण कर्मचारियों के वैध अधिकारों को रोकने का आधार नहीं बन सकते। फैसले में यह भी सामने आया कि कई मामलों में लाभ अभी तक जारी नहीं किए गए और विभाग कोई ठोस समय सीमा भी नहीं बता पाए। अदालत ने इसे प्रशासनिक लापरवाही और उदासीनता का स्पष्ट उदाहरण बताया। कोर्ट ने दोहराया कि अंतिम नियोक्ता की जिम्मेदारी है कि वह पूर्व नियोक्ताओं के साथ समन्वय कर समय पर भुगतान सुनिश्चित करे। किसी भी चूक का बोझ कर्मचारियों पर नहीं डाला जा सकता। मालवा में 35% सैंपल में तय सीमा से ज्यादा यूरेनियम मामले की शुरुआत 2010 में मोहाली निवासी बीएस लुंबा की जनहित याचिका से हुई थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर ने बठिंडा, फिरोजपुर, फरीदकोट और मानसा जिलों से 1500 पानी के नमूने लिए थे। जांच में 35% नमूनों में यूरेनियम तय मानकों से अधिक पाया गया। बठिंडा जिला सबसे ज्यादा प्रभावित सामने आया। एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड के अनुसार पीने के पानी में यूरेनियम की अधिकतम सीमा 60 पीपीबी तय है लेकिन बठिंडा में यह स्तर 684 पीपीबी तक पाया गया जो तय सीमा से 10 गुना से भी अधिक है। पूरे पंजाब में भी खतरे के संकेत: सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने बताया कि राज्यभर से लिए गए 4406 नमूनों में से 108 में यूरेनियम की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई है। 14 साल से लंबित मामला: हाईकोर्ट इस 14 साल पुराने मामले की सुनवाई कर रहा है और पहले भी मुख्य सचिव को पूरे प्रदेश के भूजल की दोबारा जांच कराने के निर्देश दे चुका है। अब अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को ताजा स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि जनस्वास्थ्य से जुड़े गंभीर मुद्दे पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 2016–2021 के बीच रिटायर कर्मचारियों का है मामला सुनवाई के दौरान बताया गया कि याचिकाकर्ता विभिन्न नगर निकायों में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर कार्यरत थे और 2016 से 2021 के बीच सेवानिवृत्त हुए थे। उन्हें छठे वेतन आयोग के तहत संशोधित पेंशन, बढ़ी हुई ग्रेच्युटी और अन्य लाभ मिलने थे लेकिन भुगतान में देरी हुई या ब्याज नहीं दिया गया। भूजल में यूरेनियम पर पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ स्टेटस रिपोर्ट दें: हाईकोर्ट पंजाब के मालवा क्षेत्र के भूजल में यूरेनियम और उससे बढ़ते कैंसर के मामलों पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्रीय भूजल बोर्ड, पंजाब व हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन से ताजा स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने कहा कि लंबे समय से इस मामले में कोई रिपोर्ट पेश नहीं की गई। ऐसे में वर्तमान स्थिति जाने बिना आगे आदेश देना संभव नहीं है। हाईकोर्ट ने पहले ही पंजाब में हालात गंभीर देखते हुए हरियाणा और चंडीगढ़ के भूजल की भी जांच के निर्देश दिए थे। अब अदालत ने सभी पक्षों से मौजूदा स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

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