जासूसी के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर जसबीर सिंह की जमानत याचिका को हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज ने कहा कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड पर कोई ठोस और स्वतंत्र साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी ने देश की सुरक्षा से जुड़ी कोई गोपनीय जानकारी साझा की। अदालत के अनुसार याची करीब 10 माह से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में था। आरोप था कि उसने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के संपर्क में रहकर भारतीय सेना की गतिविधियों जैसी संवेदनशील जानकारियां साझा कीं। सुनवाई के दौरान सरकार यह स्पष्ट नहीं कर सकी कि आरोपी के मोबाइल से किसी भी प्रकार की चैट, संदेश या विदेशी संपर्क का ठोस प्रमाण मिला हो। हाईकोर्ट ने कहा कि अभी तक रिकॉर्ड पर ऐसा कोई पुख्ता डिजिटल साक्ष्य सामने नहीं आया है, जो आरोपों की पुष्टि करे। कोर्ट ने कहा कि जिन वीडियो को आधार बनाकर मामला दर्ज किया गया, वे भाखड़ा डैम और मोहाली एयरपोर्ट जैसी सार्वजनिक जगहों से संबंधित थे, वहां आम लोगों की पहुंच है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ न आर्थिक लाभ का प्रमाण है और न ही किसी विदेशी एजेंसी के साथ साजिश का ठोस संकेत।