मजदूर दिवस के अवसर पर सांझा मोर्चा पंजाब और विभिन्न बेरोजगार यूनियनों ने संगरूर में मुख्यमंत्री भगवंत मान के आवास के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान बेरोजगार युवाओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शनकारी रोजगार देने, भर्ती कैलेंडर जारी करने और अपनी लंबित मांगों को तुरंत पूरा करने की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि चुनावों से पहले और मजदूर दिवस पर सरकार ने युवाओं को रोजगार देने के बड़े-बड़े दावे किए थे। हालांकि, जमीनी स्तर पर पढ़े-लिखे युवा आज भी बेरोजगारी से जूझ रहे हैं और मजदूरी करने को मजबूर हैं। सीएम ने मांगों को पूरा करने का दिया था आश्वासन सांझा मोर्चा पंजाब के नेता रमन कुमार मलोट ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पहले बेरोजगार युवाओं को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने का भरोसा दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि हजारों योग्य नौजवान नौकरी के इंतजार में उम्र सीमा पार कर चुके हैं। सीएम आवास के बाहर तैनात रही पुलिस जब प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने लगे, तो पहले से तैनात भारी पुलिस बल ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस हुई, जिसके बाद धक्का-मुक्की शुरू हो गई। हंगामे के दौरान कई युवाओं की पगड़ियां उतर गईं और मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। भर्ती कैलेंडर जारी करने का वादा नहीं हुआ पूरा मलोट ने आरोप लगाया कि भर्ती कैलेंडर जारी करने का वादा करने वाली सरकार ने पिछले चार वर्षों में शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में कोई बड़ी भर्ती नहीं निकाली है। उन्होंने नर्सरी टीचर, ईटीटी, मास्टर कैडर, लेक्चरर, असिस्टेंट प्रोफेसर, आर्ट एंड क्राफ्ट तथा मल्टी पर्पस हेल्थ वर्कर (पुरुष) जैसे पदों पर भर्ती न होने का जिक्र किया। साथ ही, मास्टर कैडर भर्ती में 55 प्रतिशत अनिवार्य अंकों की शर्त को भी युवाओं के साथ अन्याय बताया। मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप नेताओं ने कहा कि सरकार युवाओं को रोजगार देने के बजाय उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है। हाल ही में शिक्षा सचिव द्वारा भी बेरोजगारों की मांगों को ठुकरा दिया गया, जिससे युवाओं में भारी रोष है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द मांगें नहीं मानीं तो पूरे पंजाब में संघर्ष तेज किया जाएगा।