फ्लोर टेस्ट पर डोप टेस्ट का हल्ला

पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने फ्लोर टेस्ट पास कर लिया। वहीं विपक्ष ने डोप टेस्ट करवाने की मांग करते हुए हंगामा किया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सीएम भगवंत मान सदन में शराब पीकर आए हैं। मुख्यमंत्री मान ने शुक्रवार को सदन में विश्वास प्रस्ताव पेश किया। यह सर्वसम्मति से पारित हो गया। आप के 94 में से 88 विधायकों ने समर्थन दिया। वहीं चार विधायक गैरहाजिर रहे। दो विधायक लालजीत सिंह भुल्लर और हरमीत सिंह पठानमाजरा जेल में बंद हैं। प्रस्ताव पारित होने के दौरान विपक्ष सदन में नहीं था। इसी के साथ आप में टूट की अटकलों पर विराम लग गया है। इससे पहले सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने पर कांग्रेस विधायक सुखपाल खैहरा ने सीएम के व्यवहार पर आपत्तिजनक सवाल उठाए। वहीं, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने स्पीकर को पत्र देकर सीएम और सभी विधायकों का डोप टेस्ट कराने की मांग की। बाजवा ने कहा कि दरवाजे बंद करो, सबका एल्कोमीटर टेस्ट कराओ। हालांकि स्पीकर ने इस मांग को ठुकरा दिया। इस पर हंगामा शुरू हो गया। कांग्रेस विधायक वेल में पहुंच गए। इस पर सीएम भगवंत मान वहां से उठकर चले गए। उनके बाहर जाने के बाद भी विरोध जारी रहा। बाद में कांग्रेस के विधायकों ने वॉकआउट कर दिया। ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट हो जाए तो फ्लोर टेस्ट की जरूरत नहीं: जाखड़ पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने सदन के बाहर कहा कि अगर विधानसभा में मौजूद सभी विधायकों का ब्रीथ एनालाइजर (अल्कोहल) टेस्ट कर लिया जाए, तो फ्लोर टेस्ट की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। विधानसभा लोकतंत्र का मंदिर है। अगर कोई नशे की हालत में यहां आता है तो यह संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान है। ऐसे में सभी नेताओं का ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट होना चाहिए। कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैहरा ने भी मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी हालत सदन की गरिमा के खिलाफ थी। वहीं, आम आदमी पार्टी के नेता बलतेज पन्नू ने बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा कि जिनके पास विधायक ही नहीं हैं, वे विधानसभा में क्या करेंगे। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताया। मुझे निशाना बनाया जा रहा, मैं फोन पर बिल पढ़ रहा था: खैहरा भगवंत मान के आरोपों पर सुखपाल खैहरा ने कहा कि उन्हें बिना वजह निशाना बनाया जा रहा है। वह सिर्फ अपने फोन पर बिल पढ़ रहे थे। वहीं स्पीकर ने कांग्रेस विधायक से सदन में अनुशासन बनाए रखने और प्रस्ताव को ध्यानपूर्वक सुनने को कहा। मान ने इसके बाद खैरा से पूछा कि अगर आप को लगता है कि फोन बेहद जरूरी है तो आप बाहर जाकर मोबाइल फोन का इस्तेमाल क्यों नहीं करते? खैहरा फोन पर बिजी, मेरी बेटी के बारे में भी बोलता है: सीएम मुख्यमंत्री ने कांग्रेस विधायक सुखपाल खैहरा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वह मजदूरों के मुद्दे पर चर्चा सुनने की बजाय फोन में व्यस्त है। उन्होंने खैहरा के पैर पर पैर रखकर बैठने के तरीके पर भी आपत्ति जताई। मान ने भावुक होकर कहा कि खैहरा तो मेरी बेटी के बारे में भी बोलता रहता है। मैं पंजाबी पढ़ाऊंगा। यह बकवास करता है। इसका विधानसभा के खर्च पर इलाज करवाओ जी। पंजाब में न्यूनतम वेतन बढ़ने का नोटिफिकेशन जारी पंजाब के श्रम विभाग ने सभी कर्मचारियों और मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन में संशोधन करते हुए नया नोटिफिकेशन जारी किया है। नई वेतन दरें 1 मई 2026 से लागू होंगी। इसमें विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन तय किया गया है। अनस्किल्ड श्रमिकों का न्यूनतम वेतन 13,486 रुपये प्रतिमाह तय किया गया है, जबकि सेमी-स्किल्ड के लिए 14,383 रुपये और स्किल्ड कर्मचारियों के लिए 15,414 रुपये प्रति माह निर्धारित किए गए हैं। हाईली स्किल्ड कर्मचारियों के लिए यह राशि 16,601 रुपये प्रतिमाह तय की गई है। सीएम मान बोले- विश्वास प्रस्ताव की कॉपी राष्ट्रपति के पास लेकर जाऊंगा सदन में विश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए सीएम मान ने कहा कि आप के खत्म होने और विधायकों के टूटने की अफवाहें फैलाई जा रही हैं। इनका कोई आधार नहीं है। सीएम ने कहा कि इस विश्वास प्रस्ताव की कॉपी राष्ट्रपति के पास लेकर जाऊंगा। 117 सदस्यीय पंजाब विधानसभा में आप के पास 94 विधायकों के साथ स्पष्ट बहुमत है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब हाल ही में आप के सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर भाजपा में विलय कर लिया है। सीएम भगवंत मान ने पंजाब में न्यूनतम मजदूरी में 15 फीसदी इजाफे की घोषणा की है। यह बढ़ोतरी सरकारी और गैर सरकारी दोनों सेक्टर के लिए लागू होगी। इसके अलावा जेल एवं सुधार सेवाएं बिल 2026 भी पास किया गया। इसमें जेल प्रणाली को आधुनिक बनाएगा। इसमें कैदियों की शिक्षा, कौशल विकास पर विशेष जोर दिया है। कैदियों का वर्गीकरण होगा। इसके अलावा सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन (पंजाब संशोधन) विधेयक-2026 को पारित कर दिया। नए प्रावधानों के तहत सभी पंजीकृत सोसाइटियां आरटीआई के दायरे में होंगी। हर 5 साल में पंजीकरण नवीनीकरण अनिवार्य होगा। रजिस्ट्रार को रिकॉर्ड जांचने के अधिकार दिए गए हैं। बिना अनुमति कोई सोसाइटी संपत्ति बेच या ट्रांसफर नहीं कर सकेगी।

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