सत्रिया नृत्य पहले पुरुष करते थे अब महिलाएं ज्यादा आगे आ रहीं हैं

शास्त्रीय नृत्य से आंखों और चेहरे के भाव निखरते हैं, मगर रंगमंच से एक कलाकार को स्टेज मैनेजमेंट पता चलती है। उसकी मूवमेंट कहां बेहतर होगी, स्टेज का कैसे बेहतर इस्तेमाल करना है यह रंगमंच ही सिखाता है। जो संपूर्ण कलाकार बनाने के लिए अहम है। यह बताया सत्रिया नृत्यांगना सेउजप्रिया गोस्वामी ने। वह इन दिनों शहर के विभिन्न सरकारी स्कूलों में सोसायटी फॉर द प्रोमोशन ऑफ इंडियन क्लासिकल म्यूजिक एंड कल्चर अमंग्स्ट यूथ (स्पिक मेके) द्वारा डांस वर्कशॉप कंडक्ट करने पहुंची थीं। सेउजप्रिया ने कहा – चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों का इन्फ्रास्ट्रक्चर कई राज्यों के स्कूलों से बेहतर है। मैंने अपनी प्रस्तुति में रामायण, भगवान कृष्ण से जुड़े दृश्यों को दिखाया क्योंकि बच्चों को ये दृश्य निरंतर दिखते हैं, ऐसे में वह नृत्य के भाव से जल्दी जुड़ जाते हैं। आपने इस नृत्य की शुरुआत कैसे की? बोलीं- बचपन से ही सत्रिया से जुड़ गई थी। मां शास्त्रीय नृत्य पसंद करती थी, उन्होंने मुझे भी भरतनाट्यम और फिर सत्रिया सिखाना शुरू किया। मां ने कई गुरुओं के शिक्षा दिलाई। इसी का फल मिला कि गुरु जतिन गोस्वामी (पद्म श्री से सम्मानित) से न केवल शिक्षा मिली, बल्कि उनके घर की बहू भी बनी। पति गुनाकार देव गोस्वामी भी रंगमंच के नामी कलाकार हैं। सेउजप्रिया ने बताया- घर में सत्रिया और रंगमंच दोनों ही गूंजते हैं, सुबह-सुबह खोल (पारंपरिक वाद्य यंत्र) की गूंज से बेटी की आंख खुलती है, ये काफी दिलचस्प लगता है। आप गोवाहटी में अपने एकल नाटक के लिए भी तैयारी कर रही हैं? इसके बारे में बताएं। बोलीं- ये 45 मिनट का नाटक है, जिसमें मैं सूत्रधार और एक बूढ़ी औरत का किरदार निभा रही हूं। इसके अलावा पति के साथ असम के पारंपरिक अंकिया नट का भी मंचन करती हूं। भरतनाट्यम और सत्रिया में क्या अंतर है? बोलीं – सत्रिया शरीर की अलग मूवमेंट जिसे उल्ह (वेव) कह सकते हैं पर आधारित है। सभी नृत्य शैली में ग्रेविटेशनल फोर्स नर्तक को मदद करती है, मगर सत्रिया में इसका उल्टा होता है। इसमें ग्रेविटी के अगेंस्ट जाकर स्टेप करने होते हैं, जिसके लिए वर्षों की मेहनत करनी पड़ती है और बैलेंस बनाए रखना पड़ता है। सेउजप्रिया ने कहा- सत्रिया नृत्य पहले पुरुषों द्वारा ही प्रस्तुत किया जाता रहा, 1950-60 के दशक से लड़कियां भी इसका हिस्सा बनीं। अब महिलाएं ही इसको ज्यादा अपना रही हैं। पुरुष मुख्यतया मॉनेस्ट्री में इसे प्रस्तुत करते हैं, जहां उन्हेंे ही इसकी प्रस्तुति की इजाजत दी जाती है। मंच में तो महिलाएं ही इससे अधिक जुड़ रही हैं। _photocaption_अब लड़कियों की संख्या बढ़ी है *photocaption* सत्रिया नृत्य से जुड़े रोचक तथ्य

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