NEET परीक्षा में सॉल्वर बैठाने के मामले में नालंदा और मुजफ्फरपुर पुलिस ने अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं फरार मास्टरमाइंड उज्जवल कुमार की तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है। गिरफ्तार 7 आरोपियों में 3 मास्टरमाइंड उज्जवल के साथी हैं, जबकि चार अन्य NEET परीक्षार्थी थे। नालंदा में 2 मई की देर रात पावापुरी थाने की पुलिस ने दो लग्जरी गाड़ियों (स्कॉर्पियो-N और ब्रेजा) से 3 लोगों को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान पावापुरी विम्स मेडिकल कॉलेज के MBBS छात्र अवधेश कुमार, मुजफ्फरपुर का रहने वाला पंकज कुमार साह और मुजफ्फरपुर का ही रहने वाला अवधेश के रूप में की गई। इनकी गिरफ्तारी के बाद ही नीट फर्जीवाड़े के गैंग का खुलासा हुआ था। पूछताछ में आरोपियों ने बताया था कि मास्टरमाइंड नालंदा के भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान (VIMS) के MBBS सेकेंड ईयर का छात्र उज्जवल है। उज्जवल परीक्षाओं में सॉल्वर बैठाने का नेटवर्क चलाता है, जो राजस्थान से लेकर छत्तीसगढ़ तक फैला है। NEET सॉल्वर गैंग के गिरफ्तार तीनों आरोपी कौन हैं, आरोपियों की निशानदेही पर गिरफ्तार 4 अन्य आरोपी कौन हैं, पुलिस ने कैसे इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किया था, गैंग कैसे काम करता था और कितने की डील हुई थी? पढ़िए, एक्सक्लूसिव रिपोर्ट। सबसे पहले जानिए गिरफ्तार सभी 7 आरोपी कौन हैं मास्टरमाइंड उज्ज्वल राज विम्स के 2022 बैच का छात्र है। नियमों के मुताबिक, उसे अब तक एमबीबीएस के पांचवें वर्ष में होना चाहिए था, लेकिन डॉक्टरी की पढ़ाई उसके बस की बात नहीं थी। वह लगातार फेल होकर अभी भी सेकेंड ईयर अटका है। इस दौरान वो सॉल्वर गैंग संचालित करने लगा। गिरफ्तार अमन कुमार सिंह, फरार मास्टरमाइंड उज्जवल उर्फ राजा बाबू का मौसेरा भाई है। उज्जवल और अमन पावापुर विम्स के हॉस्टल के कमरा नंबर 502 में एक साथ रहते थे। इन तीनों आरोपियों से पूछताछ के बाद इनकी निशानदेही पर पुलिस ने जिन 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया था, उनमें सीतामढ़ी के डॉ. नरेश कुमार दास का बेटा हर्षराज, मुजफ्फरपुर का मनोज कुमार, मुजफ्फरपुर के ही बोचहां का गौरव कुमार और हथौड़ी थाना क्षेत्र का सुभाष कुमार शामिल है। पुलिस ने सभी 7 आरोपियों को जेल भेज दिया है। पावापुरी ओपी प्रभारी गौरव सिंह के मुताबिक, गिरोह में मुख्य रूप से उज्ज्वल, उसका भाई अमन और अवधेश एक्टिव थे। ये तिकड़ी पिछले 2 साल से अलग-अलग एग्जाम में सॉल्वर बैठाने के धंधे में शामिल थी। अवधेश का काम मुख्य रूप से ‘क्लाइंट हंटिंग’ यानी ऐसे छात्रों की तलाश करना जो परीक्षा पास करने के लिए मोटी रकम देने को तैयार हों। अवधेश मुजफ्फरपुर और आस-पास के इलाकों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों से संपर्क साधता था। नेटवर्क इतना मजबूत था कि लोग खुद काम कराने के लिए इन तक पहुंचने लगे थे। इस बार 10-12 छात्रों से हुई थी डील? पूछताछ के दौरान ये संकेत मिले हैं कि हालिया परीक्षा के दिन गिरोह के पास करीब 10 से 12 छात्रों के फोन आए थे, जिससे यह अंदेशा जताया जा रहा है कि एक साथ कई सॉल्वर बैठाने की योजना थी। हालांकि, पैसों के लेनदेन और बंटवारे का सटीक आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है। गौरव सिंह ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों ने सारा दोष उज्ज्वल पर मढ़ा हैं। अब उज्जवल की गिरफ्तारी के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि अब तक कितने छात्रों से डील हुई है और सिंडिकेट में और कौन-कौन शामिल हैं। कैसे काम करता था यह ‘एजुकेशन माफिया’ नेटवर्क? उज्ज्वल ने अपने फेल होने के समय का इस्तेमाल एक खतरनाक नेटवर्क बनाने में किया। यह गिरोह राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से ‘प्रोफेशनल सॉल्वर’ बुलाता था जो असली अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देते थे। एक अभ्यर्थी से 20 से 25 लाख रुपए तक की डील की जाती थी। उज्ज्वल का साथ दे रहा था उसी का कॉलेज मेट अवधेश कुमार, जो अब पुलिस की गिरफ्त में है। साथ ही उसका ममेरा भाई अमन कुमार, जो पिछले दो साल से अवैध रूप से मेडिकल हॉस्टल में रहकर इस काले धंधे की कमान संभाल रहा था। अब जानिए कैसे हुआ गैंग का खुलासा राजगीर डीएसपी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि 3 मई को आयोजित हुई नीट परीक्षा को लेकर जिला में ‘रोको-टोको’ और वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। 2 मई की शाम पावापुरी मोड़ के पास चेकिंग के दौरान स्कॉर्पियो और ब्रेजा दो संदिग्ध गाड़ियां भागने लगीं, जिन्हें घेराबंदी कर पकड़ा गया। स्कॉर्पियो चला रहे व्यक्ति की पहचान अवधेश कुमार (31) के रूप में हुई, जो विम्स (VIMS) कॉलेज में MBBS सेकेंड ईयर का छात्र है। गाड़ी की तलाशी लेने पर स्कॉर्पियो के डैशबोर्ड के नीचे से 2 लाख 95 हजार रुपए नकद, तीन मोबाइल फोन बरामद हुआ। फोन की जांच में नीट, एईओ और बीएसएनएल जैसी कई प्रतियोगी परीक्षाओं के एडमिट कार्ड, अभ्यर्थियों के साथ चैट और पैसों के लेन-देन डिटेल मिली। मिले सबूतों के आधार पर पुलिस ने अवधेश कुमार को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की। पुलिस की पूछताछ में आरोपी अवधेश ने नीट परीक्षा में सॉल्वर बैठाने से जुड़ी जानकारी दी, जिसके आधार पर मोतिहारी का अमन कुमार सिंह और मुजफ्फरपुर के पंकज कुमार साह को पकड़ा गया। जिसने इस पूरे नेटवर्क और गैंग का मास्टरमाइंड के बारे में बताया। अब जानिए परीक्षा पास कराने का प्रोसेस और कितने में हुई थी डील आरोपियों ने बताया कि उज्जवल का एक गैंग चलता है जो नीट परीक्षा में फर्जी सॉल्वर बैठाकर परीक्षा पास कराता है। गैंग परीक्षा में राजस्थान, छत्तीसगढ़ समेत कई अलग-अगल राज्यों से सॉल्वर बुलाता है जो स्टूडेंट्स की जगह परीक्षा देता है। जिसके लिए स्टूडेंट्स-पेरेंट्स से लाखों रुपए की डील होती है। कुछ रुपए एडवांस में लेता है। बाकी बचे हुए रकम काम होने के बाद लेता है। उज्जवल की पूरी गैंग प्रोसेस से काम करती थी 60 लाख रुपए में हुई थी डील, 2 लाख एडवांस गिरफ्तार हुए 4 आरोपियों ने बताया कि नीट परीक्षा पास करने के लिए गिरोह के मुख्य सरगनाओं के साथ 50 से 60 लाख रुपए में डील पक्की की थी। एडवांस के तौर पर डेढ़ से दो लाख रुपए भी दे चुके थे। लेकिन अवधेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद वो परीक्षा में अपनी जगह सॉल्वर को नहीं बैठा सके। आरोपियों की निशानदेही पर गैंग के मास्टरमाइंड के कॉलेज और हॉस्टस के कमरे का तलाशी ली गई। हॉस्टल का कमरा नंबर 502 और 110 की तलाशी तीन दिन पहले पावापुरी ओपी पुलिस की एक विशेष टीम ने विम्स मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में उज्जवल, अवधेश के कमरे की तलाशी लेने पहुंची थी। VIMS के अधीक्षक डॉ. जैकी जमा ने कहा, स्थानीय पुलिस ने दोनों छात्रों का कमरा नंबर 502 और 110 की तलाशी ली। पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए वीडियोग्राफी भी कराई गई। कमरों से कोई आपत्तिजनक दस्तावेज या नीट परीक्षा से जुड़े साक्ष्य बरामद नहीं हुए। पुलिस को दोनों छात्रों के कमरों से केवल कॉलेज के परिचय पत्र (ID Card) मिले हैं।