TRE-4 को लेकर 20 मई को बड़े प्रदर्शन की तैयारी:SDM ने शिक्षकों के साथ बैठक की; गुरु रहमान बोले- लॉ एंड ऑर्डर बनाना हमारी जिम्मेदारी

पटना में TRE-4 को लेकर 20 मई को बड़े प्रदर्शन की तैयारी है। इससे पहले मंगलवार को प्रशासन ने पटना के कई शिक्षकों और कोचिंग संचालकों के साथ बैठक की। बैठक में ASP, SDM सहित कई अधिकारी मौजूद रहें। बैठक के दौरान प्रशासन ने शिक्षकों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चेतावनी दी। दरअसल, प्रदर्शन से पहले जिला प्रशासन को इनपुट मिला कि छात्रों का यह आंदोलन बड़ा रूप ले सकता है। प्रशासन की ओर से साफ तौर पर कहा गया है कि अगर छात्रों की तरफ से किसी भी तरह की हिंसात्मक गतिविधि होती है और उसमें किसी शिक्षक की भूमिका सामने आती है, तो संबंधित शिक्षकों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।” गुरु रहमान ने कहा, “कानून-व्यवस्था बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। शिक्षक ऐसा कोई काम नहीं करेंगे, जिससे माहौल खराब हो।” शिक्षकों को दी गई चेतावनी उन्होंने बताया कि प्रशासन ने शिक्षकों से उनके क्लास का समय भी पूछा। शिक्षकों ने अधिकारियों को बताया कि सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक क्लास चलता है। इस पर प्रशासन ने कहा कि इसी दौरान छात्रों को पढ़ाई में व्यस्त रखा जाए, ताकि वे आंदोलन में शामिल न हों। प्रशासन की कोशिश है कि छात्रों का प्रदर्शन बड़ा रूप न ले और स्थिति नियंत्रण में बनी रहे। रहमान सर ने आगे कहा, “इससे पहले पूर्व शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने आश्वासन दिया था कि जल्द नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ। BPSC के एग्जामिनेशन कंट्रोलर की ओर से भी जल्द नोटिफिकेशन आने की बात कही गई थी, लेकिन अभी तक कोई घोषणा नहीं हुई।” TRE-4 को लेकर लगातार असमंजस में हैं अभ्यर्थी छात्रों का कहना है कि भर्ती में देरी का सीधा असर उम्र सीमा पर पड़ रहा है। हर महीने हजारों अभ्यर्थी अधिकतम आयु सीमा के करीब पहुंच रहे हैं। जिन छात्रों ने 2023-24 में तैयारी शुरू की थी, वे अब लगातार असमंजस में हैं कि भर्ती कब होगी। कोचिंग संस्थानों के अनुसार बिहार में TRE-4 की तैयारी कर रहे छात्रों की संख्या करीब 2 लाख है। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र बड़ी संख्या में हैं, जिनके लिए सरकारी शिक्षक की नौकरी सबसे स्थिर रोजगार मानी जाती है। इस देरी ने एक और संकट पैदा किया है। लंबे इंतजार के कारण छात्रों में मानसिक तनाव बढ़ रहा है। प्रदर्शन में शामिल कई अभ्यर्थियों ने कहा कि वे अब “भर्ती कैलेंडर नहीं, सिर्फ अंतिम नोटिफिकेशन देखना चाहते हैं।” अभिषेक कुमार श्रीवास्तव ने कहा, ‘TRE 4 का नोटिफिकेशन जारी होना चाहिए। करीब 2.5 साल हो गए। रोज सुन रहे हैं आज होगा, कल होगा, परसो होगा। हमलोग डिप्रेशन में आ गए हैं। नई सरकार आ गई, लेकिन हमारा नोटिफिकेशन नहीं आया।’ TRE-4 परीक्षा पर क्या कह रही सरकार? शिक्षा विभाग और BPSC की ओर से TRE-4 को लेकर अलग-अलग समय पर कई संभावित तिथियां बताई गईं। लेकिन अभी तक स्पष्ट और अंतिम आधिकारिक कैलेंडर जारी नहीं हुआ। यही भ्रम आंदोलन को बढ़ा रहा है। सरकार की ओर से कहा गया कि TRE-4 परीक्षा सितंबर 2026 में कराई जा सकती है और रिजल्ट नवंबर तक आएगा। दूसरी ओर सितंबर 2025 में शिक्षा मंत्री ने दिसंबर 2025 में परीक्षा कराने की बात कही थी। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार बार-बार संभावित तिथियां बता रही है, लेकिन आधिकारिक विज्ञापन जारी नहीं कर रही। इससे तैयारी कर रहे छात्रों के सामने अनिश्चितता बनी हुई है। कई छात्र यह भी नहीं समझ पा रहे कि भर्ती में आखिर पद कितने हैं। एक बड़ा विवाद डोमिसाइल नीति को लेकर भी है। TRE-4 में पहली बार डोमिसाइल लागू करने की बात कही गई। छात्रों का आरोप है कि इसी कारण सीटों की संख्या घटाई गई। छात्र नेता दिलीप ने कहा कि पहले 1.20 लाख पदों पर बहाली की बात हुई, लेकिन डोमिसाइल लागू होते ही संख्या घट गई। भर्ती कैलेंडर में यह भी स्पष्ट नहीं है कि आवेदन, एडमिट कार्ड, परीक्षा और रिजल्ट के बीच कितना समय होगा। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि कैलेंडर स्पष्ट हो तो आंदोलन की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि बिहार में शिक्षक भर्ती अब केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुकी है। इसलिए सरकार के हर बयान पर लाखों छात्रों की नजर रहती है। प्रदर्शन में शामिल छात्रों के बयान आंदोलन की भावनात्मक स्थिति भी दिखाते हैं। एक छात्रा ने कहा, “हम किसी से लड़ने नहीं आए थे, लेकिन पुलिस ने हमें घसीटा।” दूसरे छात्र ने कहा, “जमीन बेचकर तैयारी कर रहे हैं, अब उम्र निकल रही है।” कई छात्र संगठनों ने यह भी कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन पूरे बिहार में फैल सकता है। क्या मांग कर रहे हैं छात्र-छात्राएं? TRE-4 अभ्यर्थियों की मांगें सिर्फ वैकेंसी जारी करने तक सीमित नहीं हैं। वे भर्ती प्रक्रिया में कई बदलाव भी चाहते हैं। मांग 1: सरकार तुरंत विस्तृत नोटिफिकेशन जारी करे और पदों की संख्या स्पष्ट करे। अभ्यर्थी चाहते हैं कि पहले घोषित 1 लाख से अधिक पदों के अनुसार भर्ती निकले। मांग 2: “एक अभ्यर्थी-एक रिजल्ट” नियम लागू किया जाए। छात्रों का कहना है कि कई बार एक उम्मीदवार कई रिजल्ट में चयनित हो जाता है, जिससे सीटें खाली रह जाती हैं और मेरिट प्रभावित होती है। मांग 3: TRE-4 में PCS जैसी प्री, मेंस और इंटरव्यू प्रणाली लागू न की जाए। अभ्यर्थियों का कहना है कि शिक्षक भर्ती को जरूरत से ज्यादा जटिल बनाया जा रहा है। मांग 4: आयु सीमा में राहत दी जाए। भर्ती में देरी सरकार की वजह से हुई है, इसलिए ओवरएज होने वाले छात्रों को अतिरिक्त मौका मिलना चाहिए। कितने छात्र ओवरएज हो सकते हैं, कितनों का TET पीरियड खत्म होने वाला है? TRE-4 भर्ती में देरी का सबसे बड़ा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है जो अधिकतम आयु सीमा के करीब हैं। छात्र संगठनों और कोचिंग संस्थानों के अनुमान के अनुसार करीब 25 हजार अभ्यर्थी अगले कुछ महीनों में ओवरएज हो सकते हैं। बिहार शिक्षक भर्ती में सामान्य वर्ग के पुरुषों के लिए अधिकतम आयु सीमा 37 वर्ष है। महिलाओं और आरक्षित वर्गों के लिए उम्र सीमा में अलग-अलग छूट दी जाती है। कई अभ्यर्थी पहले ही उम्र सीमा के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे छात्रों की है, जिन्होंने कोरोना काल के बाद लगातार तैयारी की। उनका तर्क है कि भर्ती प्रक्रिया समय पर होती तो वे पात्र रहते। अब सरकारी देरी का नुकसान उन्हें उठाना पड़ रहा है। दूसरा बड़ा संकट TET और CTET प्रमाणपत्र की वैधता को लेकर है। कई अभ्यर्थियों का कहना है कि उनके पात्रता प्रमाणपत्र का प्रभावी उपयोग समय पर नहीं हो पा रहा। हालांकि केंद्र सरकार ने CTET प्रमाणपत्र को आजीवन वैध किया है, लेकिन राज्य स्तर पर भ्रम और दस्तावेजी प्रक्रियाएं अब भी चिंता का कारण हैं। कई छात्राओं ने बताया कि पारिवारिक दबाव भी बढ़ रहा है। लंबे समय तक तैयारी के बाद नौकरी नहीं मिलने से शादी और आर्थिक जिम्मेदारियों का संकट बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार समय पर स्पष्ट निर्णय नहीं लेती है तो आने वाले महीनों में आंदोलन और व्यापक हो सकता है। क्योंकि यह सीधे युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल बन चुका है। TRE-1, TRE-2 और TRE-3 कितने समय में हुए? बिहार में पिछले दो वर्षों में शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया काफी तेज रही। सरकार के अनुसार TRE-1, TRE-2 और TRE-3 के जरिए करीब 2.27 लाख शिक्षकों की नियुक्ति हुई। BPSC TRE 1.0 पद-1.70 लाख परीक्षा-24, 25 और 26 अगस्त 2023 रिजल्ट- अक्तूबर से नवंबर 2023 तक BPSC TRE 2.0 पद- 69 हजार परीक्षा-7 से 15 दिसंबर 2023 रिजल्ट- दिसंबर 2023 से जनवरी 2024 तक BPSC TRE 3.0 पद- 87,774 परीक्षा-19 से 22 जुलाई 2024 रिजल्ट-नवंबर 2024 से मार्च 2025 तक TRE-3 में हालांकि पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने जैसे विवाद सामने आए। इसके कारण प्रक्रिया लंबी खिंची और अभ्यर्थियों का भरोसा प्रभावित हुआ। यही वजह है कि TRE-4 को लेकर छात्र अब ज्यादा सतर्क और आक्रामक हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब पहले तीन चरण जल्दी हो सकते हैं तो TRE-4 में इतनी देरी क्यों हो रही है। सरकार के पास पहले से रिक्तियों का डेटा मौजूद है फिर भी विज्ञापन जारी नहीं हो रहा। TRE-3 के अनुभव ने छात्रों में यह डर भी पैदा किया है कि कहीं TRE-4 में भी प्रक्रिया लंबी न खिंच जाए। इसलिए वे पहले से दबाव बना रहे हैं कि सरकार स्पष्ट टाइमलाइन दे। विशेषज्ञ मानते हैं कि बिहार में शिक्षक भर्ती अब सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि राजनीतिक भरोसे का मुद्दा भी बन गई है। इसलिए हर देरी सीधे सरकार की साख पर असर डालती है। सरकार स्पष्ट क्यों नहीं बोल पा रही? TRE-4 को लेकर सरकार के अलग-अलग बयानों ने स्थिति और उलझा दी है। कभी 1.20 लाख पदों की बात, कभी 46 हजार और फिर 26 हजार पदों का दावा। इसी विरोधाभास ने अभ्यर्थियों का भरोसा कमजोर किया है। सूत्रों के अनुसार डोमिसाइल नीति लागू होने के बाद रिक्तियों की नई गणना की गई। इसके कारण विभागीय स्तर पर कई बार फाइलों में बदलाव हुआ। यही कारण है कि अंतिम संख्या तय होने में देरी हुई। सरकार पर वित्तीय दबाव भी एक कारण माना जा रहा है। बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति का मतलब वेतन मद में भारी खर्च बढ़ना है। बिहार पहले से राजकोषीय दबाव झेल रहा है। इसके अलावा नई भर्ती प्रक्रिया में प्री, मेंस और इंटरव्यू जैसे बदलावों पर भी विभाग के भीतर सहमति पूरी तरह स्पष्ट नहीं दिखती। छात्र इसका विरोध कर रहे हैं, जबकि कुछ अधिकारी इसे गुणवत्ता सुधार का तरीका बता रहे हैं। राजनीतिक स्तर पर भी शिक्षक भर्ती संवेदनशील मुद्दा बन चुकी है। युवाओं की नाराजगी चुनावी असर डाल सकती है। इसलिए सरकार जल्दबाजी में कोई गलत घोषणा नहीं करना चाहती। लेकिन यही चुप्पी अब आंदोलन को और उग्र बना रही है। छात्र कह रहे हैं कि “सरकार साफ-साफ बता दे-भर्ती होगी कब?”

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