केंद्र सरकार ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के अहम पदों पर पंजाब और हरियाणा के वर्चस्व को खत्म कर दिया है। अब खुली भर्ती के नियम अधिसूचित किए गए हैं, जिसके बाद मेंबर पॉवर और मेंबर इरिगेशन पंजाब-हरियाणा के अलावा अन्य राज्यों के अधिकारी भी बन सकेंगे। केंद्र सरकार ने BBMB नियम, 1974 में संशोधन किया है। इन नियमों को भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (संशोधन) नियम, 2026 के नाम से जाना जाएगा। बाहरी राज्यों से अधिकारियों की हो सकेगी तैनाती BBMB नियम, 1974 में किए गए संशोधन के बाद भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के अब सदस्य (बिजली) और सदस्य (सिंचाई) के पदों पर पंजाब-हरियाणा के अलावा बाहर के राज्यों के अधिकारियों को भी नियुक्त किया जा सकता है। इन पदों को अब देश भर के उन उम्मीदवारों के लिए खोल दिया गया है जो नई तकनीकी और अनुभव संबंधी शर्तों को पूरा करते हैं। 20 साल का अनुभव अनिवार्य नए नियमों के तहत उम्मीदवारों के पास संबंधित क्षेत्र में इंजीनियरिंग की डिग्री और कम से कम 20 साल का अनुभव होना अनिवार्य है, जिसमें से कम से कम एक साल मुख्य अभियंता यानि Chief Engineer के पद पर होना जरूरी है। इसमें केंद्र सरकार का तर्क है कि ये बदलाव उच्च अनुभवी पेशेवरों के चयन को सुनिश्चित करने के लिए किए गए हैं। 1966 में पंजाब के पुनर्गठन के बाद से थी यह व्यवस्था बता दें, 1966 में पंजाब के पुनर्गठन के बाद से पारंपरिक रूप से ‘सदस्य (बिजली) पंजाब से और ‘सदस्य (सिंचाई)’ हरियाणा से नियुक्त किया जाता था। इन पदों के लिए पंजाब और हरियाणा की सरकारें अपने अनुभवी इंजीनियरों के नाम केंद्र सरकार को भेजती थीं और उन्हीं में से चयन किया जाता था। 1974 के मूल नियमों में यह स्पष्ट रूप से नहीं लिखा था कि ये पद केवल इन्हीं दो राज्यों के लिए हैं, लेकिन पिछले 5 दशकों से इसी कन्वेंशन का पालन किया जा रहा था। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि लाभार्थी राज्यों (पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश) का प्रबंधन में सीधा दखल और संतुलन बना रहे। हालांकि, नए संशोधन में यह भी उल्लेख है कि पंजाब (बिजली के लिए) और हरियाणा (सिंचाई के लिए) के संबंधित सरकारी विभागों के अनुभवी उम्मीदवारों को वरीयता (प्राथमिकता) दी जाएगी। योग्यता की शर्तें बहुत सख्त पुराने समय में इन पदों के लिए योग्यता की शर्तें बहुत विस्तृत नहीं थीं। नए नियमों में अब पूरे भारत से आवेदन मांगे जा सकते हैं और अनुभव की शर्तें (जैसे 20 साल का अनुभव और 1 साल बतौर चीफ इंजीनियर) इतनी सख्त कर दी गई हैं कि अब पंजाब और हरियाणा के बाहर के अधिकारी भी आसानी से इन पदों की दौड़ में शामिल हो सकते हैं। बढ़ सकता है पंजाब सरकार से विवाद केंद्र सरकार के इस बदलाव का पंजाब सरकार विरोध दर्ज करवा सकती है। पंजाब सरकार की केंद्र और बीबीएमबी के साथ कई मसलों पर तनानती रह चुकी है। BBMB और पंजाब सरकार के बीच विवाद मुख्य रूप से पानी के बंटवारे, जमीन के मालिकाना हक, और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर है। पंजाब सरकार ने बीबीएमबी के कई फैसलों का कड़ा विरोध किया है, जिसमें हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने के निर्देश और बोर्ड द्वारा नई लीज नीति बनाने का प्रयास शामिल है। मई 2025 में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने नंगल में बीबीएमबी परिसर में धरना दिया था। वहीं सुरक्षा व्यवस्था और अन्य फैसलों को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा है। पंजाब सरकार का मानना है कि ये कदम राज्य की स्वायत्तता और संसाधनों पर केंद्र सरकार के बढ़ते नियंत्रण का हिस्सा हैं। ये हैं मुख्य विवाद
पानी का बंटवारा: मई 2025 में, बीबीएमबी ने हरियाणा को 8500 क्यूसिक अतिरिक्त पानी देने का आदेश दिया था, जिसे पंजाब सरकार ने मानने से इनकार कर दिया। पंजाब का तर्क है कि राज्य में पानी की पहले ही भारी कमी है।
जमीन का मालिकाना हक: मार्च 2026 में, पंजाब सरकार ने BBMB को पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि नंगल और तलवाड़ा टाउनशिप सहित राज्य के भीतर स्थित बीबीएमबी की जमीनों का मालिकाना हक पंजाब सरकार के पास है। बोर्ड के पास इसके लिए कोई लीज नीति बनाने का अधिकार नहीं है।
सुरक्षा और प्रशासन: पंजाब सरकार ने डैमों की सुरक्षा से केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को हटाने और पंजाब पुलिस को तैनात करने की मांग की है। इस मुद्दे पर पंजाब और केंद्र के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है।
नियुक्ति नियम: केंद्र सरकार द्वारा बीबीएमबी में शीर्ष पदों के लिए भर्ती नियमों में बदलाव (जिससे पंजाब और हरियाणा का वर्चस्व कम हो सकता है) का भी पंजाब ने विरोध किया है। सियासी दलों का विरोध शुरू
बिक्रम मजीठिया ने पंजाब सरकार के सिर फोड़ा ठीकरा
बीबीएमबी में शीर्ष पदों के लिए भर्ती नियमों में बदलाव से पंजाब का वर्चस्व खत्म होने का ठीकरा अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम मजीठिया ने पंजाब सरकार के सिर फोड़ा है। मजीठिया ने कहा कि बीबीएमबी जो पंजाब के पानी और बिजली के प्रबंधन से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण संस्थान है, उसमें ही भगवंत मान ने पंजाब के हक बुरी तरह गिरवी रख दिए हैं। यह सिर्फ नाकामी नहीं, बल्कि सीधी हार मान लेने वाली बात है। केंद्र सरकार के साथ मुख्यमंत्री की सेटिंग उन्होंने कहा कि जहां पंजाब का हक मजबूत करना था, वहां मान सरकार की कमजोरी और केंद्र के साथ मिलीभगत से हक ही हाथ से निकल रहे हैं। पहले पानी के मसले पर दरवाजे खोले, अब बीबीएमबी में भी पंजाब की हिस्सेदारी कम हो रही है। यह सब एक साजिश की कड़ी की तरह दिखाई दे रहा है। इस सबके पीछे केंद्र सरकार के साथ मुख्यमंत्री की ‘सेटिंग’ सामने आ रही है। भगवंत मान ने केंद्र के साथ मिलकर पंजाब के हितों को कमजोर किया है। मजीठिया ने कहा कि ऐसा लगता है कि भगवंत मान जानबूझकर पंजाब के हालात खराब करने पर तुले हुए हैं। इससे पहले एसवाईएल (SYL) के मसले में भी पंजाब को मुश्किल हालात में धकेला गया था, अब फिर वही रास्ता अपनाया जा रहा है। पंजाब के हक की रक्षा करने के बजाय, मान सरकार चुप बैठी है और सिर्फ विज्ञापनबाजी कर रही है। सिर्फ विज्ञापनों से सरकार नहीं चलती। हक के लिए खड़ा होना पड़ता है, जो यह सरकार नहीं कर रही है। अकाली दल हमेशा पंजाब के हक के लिए लड़ता आया है और आगे भी डटकर विरोध करता रहेगा। ये फैसला पंजाब के संघीय ढांचे पर सीधा हमला- हरजोत बैंस
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि भाजपा की केंद्र सरकार ने फिर से एक पंजाब विरोधी फैसला लिया है। केंद्र ने BBMB में पंजाब का वर्चस्व खत्म करने की साजिश की है। पंजाब का भविष्य और पानी इससे जुड़ा हुआ है कि कितना पानी छोड़ना है, ये एक पंजाबी बेहतर तरीके से समझ सकता है। बाहर से कोई व्यक्ति आ जाएगा, तो बाढ़ (Floods) जैसी स्थितियों में खतरा और बढ़ जाएगा। केंद्र ने नियमों में संशोधन (Rules Amend) कर दिया है और अब देश के किसी भी हिस्से से अधिकारी वहां तैनात किया जा सकता है। यह सीधे तौर पर पंजाब पर और हमारे संघीय ढांचे पर हमला है। हरजोत बैंस ने कहा कि बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा ने इस फैसले के लिए आज का दिन चुना। यह संविधान के भी खिलाफ है। पंजाब भाजपा के नेताओं को इस पर जवाब देना चाहिए और इस फैसले को तुरंत वापस (Roll Back) लिया जाना चाहिए। नियमों में संशोधन पंजाब के उचित अधिकारों पर हमला- राजा वड़िंग
पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष एवं लुधियाना सासंद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा कि बीबीएमबी भर्ती नियमों में संशोधन पंजाब के उचित अधिकारों पर सीधा हमला है। यह केवल नीतिगत बदलाव नहीं है, बल्कि पंजाब के अधिकारों और उसके संसाधनों पर नियंत्रण को कम करने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास है। क्या यह पंजाब पर केंद्र की पकड़ मजबूत करने की दिशा में एक और कदम है? पंजाब कांग्रेस इस फैसले का पुरजोर विरोध करती है।