अंबाला में कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन रद्द:NDPS एक्ट में कोर्ट 10 साल की सजा सुना चुका; कवरिंग कैंडिडेट पत्नी का नामांकन मंजूर

अंबाला सिटी नगर निगम में नामांकन पत्रों की जांच के दौरान कांग्रेस के एक प्रत्याशी का नामांकन रद्द हो गया। वार्ड-3 से पार्षद प्रत्याशी को NDPS एक्ट के तहत दर्ज केस में लोकल कोर्ट से 10 साल की सजा सुनाई गई थी। हालांकि सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, जो याचिका अभी लंबित है। वार्ड-3 ओपन वार्ड है। 21 अप्रैल को जारी कांग्रेस की लिस्ट में यहां से संजीव शर्मा को प्रत्याशी घोषित किया गया था। नामांकन पत्र में एनडीपीएस (नशील पदार्थों से संबंधित) एक्ट के दर्ज एफआईआर की जिक्र किया था। इस मामले में स्थानीय कोर्ट से सजा हुई। संजीव शर्मा की पत्नी प्रियंका शर्मा ने कवरिंग कैंडिडेट के तौर पर परचा भरा था, जो सही पाया गया है। ऐसे में कांग्रेस अब प्रियंका को समर्थन दे सकती है। अंबाला में 80 नामांकन भरे गए अंबाला में मेयर पद के लिए 3 नामांकन हुए हैं। इनमें BJP की अक्षिता सैनी, कांग्रेस की कुलविंदर कौर सैनी के अलावा निर्दलीय सोनिया रानी हैं। इसके अलावा 20 वार्ड पार्षदों के लिए 77 नामांकन हुए हैं। 28 अप्रैल को नाम वापसी का दिन है। उसके बाद तय होगा कि किस वार्ड में कितने प्रत्याशी मैदान में बचेंगे। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने सभी वार्डों में प्रत्याशी उतारे हैं। नामांकन से 3 घंटे पहले सैलजा समर्थक का टिकट बदला इससे पहले नामांकन के आखिरी दिन कांग्रेस ने वार्ड-19 से प्रत्याशी बदल दिया था। पहले सांसद कुमारी सैलजा के समर्थक सचिन पुनिया को टिकट मिला था। टिकट मिलने के बाद पुनिया प्रचार में जुट गए थे। पंफलेट और प्रचार सामग्री भी छप गई थी। नामांकन करने की अवधि खत्म से 3 घंटे पहले कांग्रेस ने इस वार्ड से पुनीत कवि को प्रत्याशी घोषित कर दिया। इस बार यह ओपन वार्ड है। पिछले चुनाव में पुनीत एससी रिजर्व वार्ड से कांग्रेस के समर्थन से चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गए थे। पुनीत स्थानीय विधायक निर्मल सिंह के समर्थक हैं। कांग्रेस झटके तो भाजपा भीतरघात झेल रही अंबाला में कांग्रेस जहां झटके झेल रही है, वहीं भाजपा को भी भीतरघात का खतरा सता रहा है। बीजेपी की मेयर प्रत्याशी अक्षित सैनी के नामांकन के वक्त निवर्तमान मेयर शैलजा सचदेवा नहीं दिखी थी। पूर्व मंत्री असीम गोयल ने भी कहा था कि विपक्ष के साथ अपनी काली भेड़ों से भी लड़ना है। वहीं, कांग्रेस में मेयर पद के लिए इकलौता दावा कुलविंदर कौर का ही थी, इसलिए पार्टी के पास ज्यादा विकल्प थे ही नहीं।

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