एनसीईआरटी ने तैयार किए प्राइमर, वेबसाइट पर सिलेबस जारी:सीबीएसई स्कूलों में अब कक्षा 1 से 8वीं तक पढ़ाई जाएगी मैथिली

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मातृभाषा के रूप में मैथिली को मिली मंजूरी केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के पाठ्यक्रम में मैथिली भाषा को शामिल कर लिया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत अब कक्षा 1 से 8वीं तक मैथिली को मातृभाषा विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा। केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने दरभंगा के भाजपा सांसद गोपाल जी ठाकुर को पत्र लिखकर यह जानकारी दी। इस फैसले से मिथिलांचल समेत पूरे देश में मैथिली भाषियों को अपनी भाषा पढ़ने का मौका मिलेगा। दरभंगा के सांसद गोपाल जी ठाकुर ने इसी साल 8 फरवरी 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी से मुलाकात की थी। उन्होंने मैथिली को सीबीएसई के पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग उठाई थी। इस पर शिक्षा मंत्रालय ने त्वरित पहल करते हुए मैथिली को मातृभाषा के रूप में मान्यता दे दी। मुख्यमंत्री ने कहा- ऐतिहासिक और स्वागत योग्य कदम : मुख्यमंत्री ने सोशल नेटवर्किंग साइट एक्स पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए लिखा, “मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और मातृभाषा मैथिली को शिक्षा व्यवस्था में सशक्त स्थान दिलाने की दिशा में लिया गया यह निर्णय ऐतिहासिक एवं अत्यंत स्वागतयोग्य है। उन्होंने आगे लिखा कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम में कक्षा 1 से माध्यमिक स्तर तक मैथिली भाषा को मातृभाषा विषय के रूप में मान्यता मिलना मिथिला की सांस्कृतिक अस्मिता और भाषाई गौरव के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय भाषाओं, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन को निरंतर नई मजबूती मिल रही है। मुख्यमंत्री चौधरी ने कहा कि यह निर्णय न केवल मैथिली भाषा को नई पहचान और सम्मान देगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी मातृभाषा, संस्कृति और जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी बनेगा। पाठ्य पुस्तकें तैयार, वेबसाइट पर इसका सिलेबस अपलोड
मैथिली संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में से एक है।
एनसीईआरटी ने मैथिली सहित 121 भारतीय भाषाओं में शुरुआती पाठ्य पुस्तकें (प्राइमर) विकसित कर ली हैं।
एनसीईआरटी की अन्य पाठ्य पुस्तकों का अनुवाद भी मैथिली में हो रहा है। सत्र 2026-27 से लागू होगा नया नियम और पाठ्यक्रम
सीबीएसई द्वारा जारी गाइडलाइंस के अनुसार, यह नया नियम और पाठ्यक्रम आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा। कक्षा 1 से लेकर कक्षा 10 तक के विद्यार्थियों के पास अब मैथिली को अपनी मातृभाषा के रूप में चुनने का विकल्प उपलब्ध होगा। मैथिली 22 मान्यता प्राप्त भाषाओं में से एक है
नई शिक्षा नीति के अनुसार कक्षा 5 तक और संभव हो तो कक्षा 8 तक मातृभाषा के माध्यम से पढ़ाई की व्यवस्था की जानी है। केंद्रीय मंत्री ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि मैथिली संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 मान्यता प्राप्त भाषाओं में से एक है। मिथिला की सांस्कृतिक अस्मिता को नई पहचान मिली
सीबीएसई पाठ्यक्रम में मैथिली को शामिल करने का फैसला केवल एक शैक्षणिक बदलाव नहीं, बल्कि मिथिला की सांस्कृतिक अस्मिता, भाषाई गौरव और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। यह मैथिली की विकास का नया दौर है।

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