अमृतसर में कांग्रेस पार्षद गुरदीप पहलवान की चर्चित हत्या मामले में करीब 8 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजीव कुंडी की अदालत ने इस मामले में गैंगस्टर जगदीप सिंह उर्फ जग्गू भगवानपुरिया समेत पांच आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। कोर्ट में 16 मई को देर शाम इस मामले में फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष इन आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। इस फैसले से पीड़ित पक्ष को बड़ा झटका लगा है। परिवार ने इसे निराशाजनक बताते हुए उच्च न्यायालय में अपील करने की बात कही है। जिन पांच लोगों को बरी किया गया है उनमें जग्गू भगवानपुरिया के अलावा बॉबी मल्होत्रा, भूपिंदर सिंह उर्फ सोनी कंगला, कार्तिक उर्फ घोड़ा और वरिंदर सिंह उर्फ सन्नी शामिल हैं। तीन आरोपियों को अदालत ने दोषी ठहराया हालांकि अदालत ने तीन अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया है। अरुण कुमार उर्फ छुरीमार, अंग्रेज सिंह और अमनप्रीत सिंह उर्फ रिंका को भारतीय दंड संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत दोषी पाया गया। इनमें धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 148 (घातक हथियारों से दंगा), 302 (हत्या), 473 (जालसाजी) और 201 (सबूत मिटाने) शामिल हैं। अदालत ने इन तीनों दोषियों को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक पर 22,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में उन्हें अतिरिक्त छह महीने की सजा काटनी होगी। अमृतसर का चर्चित हत्याकांड फिर सुर्खियों में यह मामला अमृतसर के सबसे चर्चित राजनीतिक हत्याकांडों में से एक रहा है, जिसने लंबे समय तक शहर में तनाव और राजनीतिक हलचल बनाए रखी। अदालत के इस फैसले के बाद एक बार फिर से यह मामला सुर्खियों में आ गया है, और आगे की कानूनी लड़ाई की संभावना जताई जा रही है। पढ़िए क्या था पूरा मामला गुरदीप पहलवान की 2 जून 2018 को रेलवे रोड स्थित गोल बाग अखाड़े में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जहा वे रोजाना अभ्यास के लिए जाते थे। चश्मदीदों के मुताबिक तीन हथियारबंद हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी, जबकि उनके कई साथी बाहर पहरा दे रहे थे। हत्या के कुछ दिनों बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुई थी, जिसमें दावा किया गया था कि यह हत्या नवंबर 2014 में मारे गए गैंगस्टर संगम मल्होत्रा (जो जग्गू भगवानपुरिया का करीबी साथी था) की मौत का बदला है। उस पोस्ट में आरोप लगाया गया था कि संगम की हत्या के पीछे गुरदीप पहलवान का हाथ था। गुरदीप पहलवान को साल 2015 में भगवानपुरिया गैंग की ओर से जान से मारने की धमकियां भी मिली थीं।